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कांडला फोरम 2026 में ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल शिपिंग पर मंथन

Ratna Netam
7 Oct 2026 4:41 PM IST
कांडला फोरम 2026 में ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल शिपिंग पर मंथन
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कांडला। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA), कांडला ने बुधवार को समुद्री क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा आधारित शिपिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘कांडला फोरम 2026’ का आयोजन किया। इस बार फोरम की थीम **“एंकरिंग मैरीटाइम डीकार्बोनाइजेशन”** रखी गई। कार्यक्रम में हाइड्रोजन, क्लीन एनर्जी, शिपिंग, जहाज निर्माण, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े भारतीय और वैश्विक स्टेकहोल्डर्स ने हिस्सा लिया।
फोरम का मुख्य उद्देश्य समुद्री परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए उपलब्ध तकनीकों, निवेश संभावनाओं और स्वच्छ ईंधन आधारित परियोजनाओं पर चर्चा करना रहा। इसमें उद्योग प्रतिनिधियों और दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के बीच सीधे संवाद के जरिए तकनीक हस्तांतरण, ग्रीन फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की साझेदारियों की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। इसी व्यापक लक्ष्य के अनुरूप बंदरगाह और समुद्री क्षेत्र में भी स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी कांडला में ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मेथनॉल, ग्रीन अमोनिया और अन्य वैकल्पिक ईंधनों से जुड़े प्रोजेक्ट विकसित कर इस दिशा में अपनी भूमिका बढ़ा रही है। सितंबर 2026 में कांडला में देश की पहली पोर्ट-आधारित ई-मेथनॉल उत्पादन सुविधा की आधारशिला भी रखी गई थी।
कांडला में विकसित हो रही ई-मेथनॉल परियोजना को समुद्री डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस परियोजना के जरिए जहाजों के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाला वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराने की योजना है। जनवरी 2026 में असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड और DPA के बीच 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले ई-मेथनॉल प्लांट के लिए समझौता हुआ था। परियोजना में करीब 1,200 करोड़ रुपये के निवेश और हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की संभावना जताई गई थी।
इसके अलावा DPA ने मेथनॉल बंकरिंग क्षमता विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। अप्रैल 2026 में कांडला पोर्ट पर शोर-टू-शिप मेथनॉल बंकरिंग का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया था। इस ट्रायल के जरिए ईंधन ट्रांसफर, सुरक्षा प्रणाली और नियामकीय अनुपालन से संबंधित व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। पोर्ट का लक्ष्य आने वाले वर्षों में ई-मेथनॉल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि एशिया-यूरोप जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर चलने वाले डुअल-फ्यूल जहाजों को ग्रीन फ्यूल उपलब्ध कराया जा सके।
कांडला फोरम 2026 में इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक उद्योग जगत के साथ तकनीकी और निवेश सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। फोरम में इस बात पर चर्चा हुई कि ग्रीन हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव्स के उत्पादन से लेकर उनके स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और जहाजों में इस्तेमाल तक पूरी वैल्यू चेन कैसे तैयार की जाए।
DPA पहले से ही ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं के लिए बड़े स्तर पर जमीन आवंटित कर चुका है। उसकी 2025-26 प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार करीब 3,400 एकड़ भूमि विभिन्न कंपनियों को ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं के लिए आवंटित की गई है, जिनका संयुक्त उत्पादन लक्ष्य 2032 तक 5.6 मिलियन टन प्रति वर्ष रखा गया है। इसके अलावा पोर्ट पर 1 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, इलेक्ट्रिक ग्रीन टग, हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं भी विकसित की जा रही हैं।
DPA की रणनीति केवल ईंधन उत्पादन तक सीमित नहीं है। पोर्ट को ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर का हिस्सा बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों और संस्थानों के साथ सहयोग भी बढ़ाया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार, DPA ने रॉटरडैम पोर्ट के साथ ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और इनके डेरिवेटिव्स के लिए स्टोरेज, हैंडलिंग, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्पैच सुविधाएं विकसित करने की दिशा में सहयोग किया है।
फोरम में जहाज निर्माण क्षेत्र की भूमिका पर भी चर्चा हुई। DPA कांडला को व्यापक समुद्री हब के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत बड़े वाणिज्यिक जहाजों के निर्माण की क्षमता वाला शिपयार्ड विकसित करने की दिशा में भी पहल की गई है। इस योजना को Maritime India Vision 2030 और अमृत काल विजन 2047 के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम में वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रही। ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मेथनॉल, ग्रीन अमोनिया और स्वच्छ समुद्री ईंधन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होती है। ऐसे में फोरम ने परियोजना डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी कंपनियों को एक मंच पर लाकर संभावित निवेश मॉडल और साझेदारी पर चर्चा का अवसर दिया।
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी का लक्ष्य कांडला को केवल पारंपरिक कार्गो पोर्ट के रूप में विकसित करना नहीं, बल्कि उसे ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल शिपिंग का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है। इसी दिशा में इलेक्ट्रिक उपकरणों के उपयोग, वैकल्पिक समुद्री ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और कम कार्बन वाले परिवहन साधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कांडला फोरम 2026 के जरिए DPA ने वैश्विक और भारतीय उद्योग जगत के सामने अपने ग्रीन पोर्ट विजन को रखा। फोरम का फोकस इस बात पर रहा कि तकनीकी सहयोग, निवेश और उद्योग भागीदारी के जरिए समुद्री क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए।
ग्रीन हाइड्रोजन और ई-मेथनॉल परियोजनाओं से लेकर मेथनॉल बंकरिंग और ग्रीन अमोनिया तक, कांडला में विकसित हो रहा इकोसिस्टम भारत की स्वच्छ ऊर्जा और समुद्री डीकार्बोनाइजेशन रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। फोरम ने इसी दिशा में उद्योग, तकनीक और निवेश जगत को एक साथ लाकर भविष्य की साझेदारियों के लिए मंच उपलब्ध कराया।
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