गुजरात

गुजरात से शुरू हुआ सफर नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे

Ratna Netam
7 Oct 2026 3:11 PM IST
गुजरात से शुरू हुआ सफर नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे
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अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे होने के अवसर पर गुजरात में उनकी विकास यात्रा और प्रशासनिक मॉडल को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। उस समय राज्य 2001 के विनाशकारी कच्छ भूकंप समेत कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था। प्रधानमंत्री ने बाद में भी इस दौर को याद करते हुए कहा था कि कठिन परिस्थितियों ने गुजरात के पुनर्निर्माण और लोगों की सेवा के संकल्प को और मजबूत किया।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2001 में गुजरात के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भूकंप के बाद पुनर्निर्माण और लोगों का भरोसा बहाल करना था। इसी दौर में राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विकास नीतियों की समीक्षा शुरू की। प्रयास यह था कि विकास योजनाओं को केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों की जरूरतों के साथ जोड़ा जाए।
सरकारी विवरणों में कहा गया है कि नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। गुजरात में बिजली आपूर्ति की समस्या से निपटने के लिए ज्योतिग्राम योजना जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए, जबकि कृषि क्षेत्र में सिंचाई, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और किसानों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार की ओर से प्रकाशित आधिकारिक सामग्री में भी गुजरात में प्रशासन और विकास के इन प्रयासों का उल्लेख किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में ‘शाला प्रवेशोत्सव’ को जनभागीदारी से जोड़कर चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों का स्कूलों में नामांकन बढ़ाना और शिक्षा के प्रति परिवारों तथा स्थानीय समुदायों को जागरूक करना था। इसके बाद ‘गुणोत्सव’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के स्तर के मूल्यांकन पर जोर दिया गया।
इसी तरह कृषि क्षेत्र में ‘कृषि महोत्सव’ के माध्यम से किसानों तक सरकारी अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ और तकनीकी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया गया। किसानों को खेती से जुड़े आधुनिक तरीकों, मिट्टी की गुणवत्ता, सिंचाई, बीज और अन्य कृषि तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया गया। सरकार ने पशुपालन क्षेत्र को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए पशु आरोग्य मेलों के जरिए पशुओं के स्वास्थ्य और उपचार सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाने की पहल की।
युवाओं और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘खेल महाकुंभ’ को भी व्यापक जनभागीदारी वाले कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया गया। इसका उद्देश्य गांवों, शहरों और विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के जरिए अवसर देना था। इस पहल के माध्यम से खेल गतिविधियों को केवल पेशेवर खिलाड़ियों तक सीमित न रखकर आम लोगों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
औद्योगिक और निवेश के क्षेत्र में ‘वाइब्रेंट गुजरात’ आयोजन ने भी राज्य की विकास रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। इसके माध्यम से निवेशकों, उद्योग जगत और वैश्विक प्रतिनिधियों को गुजरात से जोड़ने का प्रयास किया गया। राज्य सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बदलाव, बुनियादी ढांचे के विकास और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस पूरे मॉडल की एक प्रमुख विशेषता जनभागीदारी रही। योजनाओं में लोगों की भागीदारी बढ़ाकर विकास को सरकारी कार्यालयों से निकालकर सीधे समाज तक पहुंचाने की कोशिश की गई। शाला प्रवेशोत्सव से लेकर कृषि महोत्सव और खेल महाकुंभ तक कई कार्यक्रमों को जनअभियान का स्वरूप दिया गया।
नरेंद्र मोदी ने भी अपने 25वें वर्ष में प्रवेश करते समय गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में अपने शुरुआती दौर का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि जब उन्हें गुजरात की जिम्मेदारी मिली, तब राज्य भूकंप, सूखे और राजनीतिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा था। उनके अनुसार, इन्हीं परिस्थितियों ने राज्य के पुनर्निर्माण और प्रशासनिक सुधारों की दिशा तय करने में भूमिका निभाई।
गुजरात के विकास मॉडल में प्रशासनिक व्यवस्था को परिणाम आधारित बनाने, तकनीक के इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं की निगरानी को भी महत्व दिया गया। समय के साथ कई योजनाओं में डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित समीक्षा को शामिल किया गया, जिससे विभागों के प्रदर्शन और योजनाओं के प्रभाव का आकलन किया जा सके।
राज्य सरकार की ओर से इस 25 साल की यात्रा को केवल राजनीतिक कार्यकाल के रूप में नहीं, बल्कि प्रशासन, विकास और जनभागीदारी के प्रयोगों की यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के पद तक नरेंद्र मोदी की यात्रा में कई ऐसे कार्यक्रमों और नीतिगत प्रयोगों को आगे बढ़ाया गया, जिनका बाद में व्यापक स्तर पर उल्लेख हुआ।
7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुई यह यात्रा अब 25 वर्षों का पड़ाव पूरा कर चुकी है। इस अवधि को लेकर सरकार की ओर से जारी सामग्री में सबसे अधिक जोर विकास, जनभागीदारी और प्रशासनिक सुधारों पर दिया गया है। गुजरात में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण से शुरू हुआ यह दौर आगे सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, कृषि, खेल और उद्योग जैसे क्षेत्रों में योजनाओं के विस्तार तक पहुंचा। अब 25 साल पूरे होने के मौके पर इन्हीं पहलों और अनुभवों को एक लंबी विकास यात्रा के रूप में रेखांकित किया जा रहा है।
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