गुजरात

गुजरात UCC बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी BJP ने किया स्वागत

Ratna Netam
3 Oct 2026 5:16 PM IST
गुजरात UCC बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी BJP ने किया स्वागत
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अहमदाबाद। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल, 2026 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक विधेयक को 17 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली, जबकि इसे 1 अक्टूबर को गुजरात सरकार के असाधारण राजपत्र में प्रकाशित किया गया। अब राज्य सरकार अलग अधिसूचना जारी कर इसके लागू होने की तारीख तय करेगी।
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद शनिवार को सत्तारूढ़ BJP के नेताओं ने फैसले का स्वागत किया। पार्टी नेताओं ने इसे चुनावी और नीतिगत संकल्प पूरा करने तथा नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में उठाया गया कदम बताया। हालांकि UCC को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद भी रहे हैं और गुजरात विधानसभा में कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी ने विधेयक का विरोध किया था।
गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को करीब आठ घंटे की चर्चा के बाद इस विधेयक को बहुमत से पारित किया था। विधेयक तैयार करने से पहले राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने विधानसभा में UCC विधेयक पेश किया।
नए कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप सहित व्यक्तिगत नागरिक मामलों के लिए साझा कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। कानून पूरे गुजरात में लागू होगा और राज्य के बाहर रहने वाले गुजरात के निवासियों पर भी इसके कुछ प्रावधान लागू होंगे। अनुसूचित जनजातियों और संविधान के भाग XXI के तहत संरक्षित परंपरागत अधिकार वाले व्यक्तियों एवं समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
सरकार ने कानून को महिलाओं के अधिकार और लैंगिक समानता से भी जोड़ा है। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना और लैंगिक न्याय तथा सामाजिक सुधार को बढ़ावा देना है। यह कानून का घोषित उद्देश्य है; इसके व्यावहारिक प्रभाव का आकलन इसके लागू होने और न्यायिक व्याख्याओं के बाद अधिक स्पष्ट होगा।
विवाह को लेकर कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवित पति या पत्नी नहीं होना चाहिए। पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष रखी गई है। धार्मिक और पारंपरिक विवाह समारोह जारी रह सकेंगे, लेकिन विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। कानून लागू होने के बाद होने वाले विवाह का पंजीकरण निर्धारित अवधि में कराना होगा।
तलाक के मामलों में भी साझा आधार निर्धारित किए गए हैं। इनमें व्यभिचार, क्रूरता, कम से कम दो वर्ष तक परित्याग और सात वर्ष तक व्यक्ति का पता न चलने जैसी परिस्थितियां शामिल हैं। आपसी सहमति से तलाक के लिए भी प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि अदालत के बाहर होने वाले तलाक को मान्यता नहीं दी जाएगी और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए हुए तलाक का पंजीकरण आवश्यक होगा।
उत्तराधिकार के मामले में भी कानून महत्वपूर्ण बदलाव करता है। बिना वसीयत के मृत्यु होने की स्थिति में संपत्ति के वितरण के लिए उत्तराधिकारियों की श्रेणियां तय की गई हैं। राज्य सरकार ने बेटियों और बेटों के लिए समान उत्तराधिकार अधिकार को कानून की प्रमुख विशेषताओं में शामिल किया है।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। गुजरात में साथ रहने वाले पार्टनर्स को अपने लिव-इन रिलेशनशिप का विवरण निर्धारित रजिस्ट्रार के सामने प्रस्तुत करना होगा। कानून लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैध संतान के रूप में मान्यता देता है। कुछ परिस्थितियों में संबंधित जानकारी स्थानीय पुलिस को भेजने और 21 वर्ष से कम आयु के पार्टनर के माता-पिता या अभिभावकों को सूचित करने का भी प्रावधान है।
राष्ट्रपति की मंजूरी पर BJP नेताओं ने इसे सरकार के संकल्प की पूर्ति बताया है। पार्टी नेताओं के मुताबिक UCC से व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाने और विशेष रूप से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा देने में मदद मिलेगी। ये सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक दावे और कानून के पक्ष में उसके तर्क हैं।
वहीं विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध किया था और इसे चयन समिति के पास भेजने की मांग की थी। इस वजह से UCC गुजरात में राजनीतिक बहस का विषय भी रहा है।
संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के तहत राज्य से नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने की बात कही गई है। गुजरात सरकार ने विधेयक के उद्देश्यों में इसी संवैधानिक प्रावधान का उल्लेख किया है।
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। गुजरात UCC, 2026 में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर कानून के लागू होने की तारीख तय करेगी। इसलिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित नई व्यवस्थाएं कब प्रभावी होंगी, यह राज्य सरकार की आगामी अधिसूचना पर निर्भर करेगा।
गुजरात UCC को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य सरकार के सामने नियम और क्रियान्वयन व्यवस्था को अंतिम रूप देने का चरण है। इसके लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों का वास्तविक असर सामने आएगा। राजनीतिक स्तर पर जहां BJP इसे समानता और अपने संकल्प की पूर्ति के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष की आपत्तियों के कारण इस कानून को लेकर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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