गुजरात

56 लोगों की जान लेने वाले अहमदाबाद धमाकों का मामला, दोषी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, तनवीर की मौत की सजा पर रोक

Rajeshwari Nishad
19 Oct 2026 10:44 PM IST
56 लोगों की जान लेने वाले अहमदाबाद धमाकों का मामला, दोषी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, तनवीर की मौत की सजा पर रोक
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अहमदाबाद : 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए मोहम्मद तनवीर को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने तनवीर की मौत की सजा पर रोक लगा दी है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने उसकी याचिका पर सुनवाई की।
तनवीर ने गुजरात हाईकोर्ट के 7 जुलाई 2026 के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश तनवीर की याचिका से जुड़ा है। इसे मामले के सभी दोषियों की सजा पर रोक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
गुजरात हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी 38 दोषियों की सजा
अहमदाबाद धमाकों के मामले में विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में फैसला सुनाया था। अदालत ने 38 आरोपियों को मौत की सजा दी थी, जबकि 11 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए दोषियों ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
7 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल अपीलों को खारिज कर दिया था। इसके साथ ही 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद बरकरार रही थी। अब मोहम्मद तनवीर ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर शीर्ष अदालत ने उसकी फांसी पर रोक लगाई है।
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुए थे सिलसिलेवार धमाके
अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को कई स्थानों पर बम धमाके हुए थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 70 मिनट के भीतर शहर के अलग-अलग इलाकों में 21 धमाके किए गए। इन हमलों में 56 लोगों की मौत हुई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
इस घटना के बाद पुलिस ने अहमदाबाद में हुए धमाकों और सूरत में मिले बमों से जुड़े मामलों की जांच शुरू की। शुरुआती दौर में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं। बाद में कई मामलों को एक साथ जोड़कर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाई गई।
2009 में शुरू हुआ था मुकदमा, हजारों दस्तावेज पेश किए गए
इस मामले में ट्रायल 2009 में शुरू हुआ था। मुकदमे के दौरान करीब 80 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही चली। जांच और सुनवाई की प्रक्रिया कई वर्षों तक जारी रही। कोरोना महामारी के दौरान भी अदालत में सुनवाई चलती रही।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में 1,100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज कराए और 6,000 से ज्यादा दस्तावेज पेश किए। मामले में बड़ी संख्या में चार्जशीट और उनसे संबंधित दस्तावेज भी दाखिल किए गए। मुकदमे का दायरा और इसमें जुटाए गए साक्ष्य इसकी लंबी कानूनी प्रक्रिया को दर्शाते हैं।
मृतकों के परिवारों और घायलों को मुआवजा देने का निर्देश
गुजरात हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पीड़ित परिवारों और घायलों को मुआवजा देने का निर्देश भी दिया था। आदेश के मुताबिक, धमाकों में जान गंवाने वाले 56 लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और 200 से अधिक घायलों को एक-एक लाख रुपये देने की बात कही गई थी। मुआवजे का भुगतान 30 मार्च 2027 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन और प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े लोगों की भूमिका का दावा किया था। मामले में दोषियों की सजा और अपील से संबंधित कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग अदालतों में आगे बढ़ती रही है। मोहम्मद तनवीर की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक इसी लंबी कानूनी प्रक्रिया का नया घटनाक्रम है।]
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