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रिजिजू के आरोपों पर थरूर का पलटवार, कहा- लोकतंत्र की रक्षा करना हर नागरिक का अधिकार
Rajeshwari Nishad
19 Oct 2026 10:34 PM IST

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Delhi : कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उन आरोपों पर जवाब दिया है, जिनमें उन्होंने विपक्ष पर भारत में सत्ता परिवर्तन की साजिश रचने का आरोप लगाया था। थरूर ने कहा कि भारत की तुलना बांग्लादेश या फ्रांस से करना सही नहीं है। उन्होंने साफ किया कि विपक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में विश्वास करता है और हिंसा को कभी सही नहीं ठहराता।
थरूर के मुताबिक, सरकार बदलने की कोशिश और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपनी बात रखना दो अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर है। इसका किसी सरकार को गिराने या सत्ता परिवर्तन से कोई संबंध नहीं है।
थरूर बोले- भारत की तुलना फ्रांस और बांग्लादेश से नहीं हो सकती
थरूर ने कहा कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। इसलिए इन देशों में हुई घटनाओं को भारतीय राजनीति से जोड़कर देखना उन्हें प्रासंगिक नहीं लगता। उन्होंने कहा कि फ्रांस में बसों और पुलिस स्टेशनों में आग लगाने जैसी हिंसक घटनाओं का समर्थन नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह खुद भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल होते रहे हैं और उनका मानना है कि विपक्ष को भी इसी रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का गलत अर्थ निकालकर उन्हें सरकार गिराने की साजिश से जोड़ना ठीक नहीं है।
दरअसल, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को आरोप लगाया था कि फ्रांस और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं जैसी साजिश भारत में भी रची गई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनाव है, न कि जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों के जरिए।
लोकतंत्र की रक्षा करना हर नागरिक का अधिकार: थरूर
थरूर ने कहा कि लोकतंत्र किसी व्यक्ति या संस्था की ओर से दिया गया उपहार नहीं है। भारत के नागरिक ही इसके संरक्षक हैं और उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करने का अधिकार है।
उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे उम्मीद की जाती है कि वे संविधान के मुताबिक अपनी जिम्मेदारियां निभाएं। थरूर ने स्पष्ट किया कि वह संस्थाओं को चुनौती देने की बात नहीं कर रहे, बल्कि उनके कामकाज और आचरण पर सवाल उठा रहे हैं।
उनके मुताबिक, लोकतंत्र में संस्थाओं की जवाबदेही पर चर्चा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर चिंता करना केवल किसी एक राजनीतिक दल का मामला नहीं, बल्कि सभी भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण है।
SIR प्रक्रिया वापस लेने की मांग कर रहा विपक्ष
शशि थरूर ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि विपक्ष इस प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहा है। उनके अनुसार, यह संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है और इसे सरकार गिराने की कोशिश बताना गलत है।
SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। विपक्षी दल प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की भूमिका और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
रिजिजू ने 18 अक्टूबर को ...
रिजिजू ने 18 अक्टूबर को X पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सामाजिक कार्यकर्ता नेहा बोरा दिखाई दे रहे थे। यह वीडियो नेहा बोरा के उस संदेश के संदर्भ में सामने आया, जिसमें उन्होंने भारत के जेन-जी आंदोलन को बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरित बताया था।
14 अक्टूबर को सामने आए अपने वीडियो संदेश में नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने कहा था कि भारत में युवाओं का आंदोलन बांग्लादेश से प्रेरित है और इसका संबंध लोकतंत्र तथा मतदाताओं के अधिकारों से है। अपने संदेश में नेहा ने शिक्षा के निजीकरण, विश्वविद्यालयों में छात्रों के अधिकारों और संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दे भी उठाए थे। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
NEET पेपर लीक और SIR विरोध प्रदर्शनों में भी सक्रिय रहीं नेहा
नेहा बोरा इस साल NEET पेपर लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी चर्चा में आई थीं। इन प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। इसके अलावा वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में भी शामिल हुई थीं।
अक्टूबर में वह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों में भी शामिल रहीं। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।
फिलहाल थरूर और रिजिजू के बयानों से SIR, विपक्ष के प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। थरूर ने जहां शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया है, वहीं रिजिजू ने चुनाव के जरिए ही सत्ता परिवर्तन की बात कही है।
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