छत्तीसगढ़

विश्वस्तरीय चित्रकला प्रदर्शनी का गांव में आगाज

Nilmani Pal
2 Dec 2025 11:51 AM IST
विश्वस्तरीय चित्रकला प्रदर्शनी का गांव में आगाज
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भिलाई। कला का सामाजिक सरोकार होता है और कलाकार इस कला को अन्यों में भी बांटे तभी उसकी कला धन्य होती है। कला से न सिर्फ इंसान अहिंसक बनता है बल्कि शांतचित्त और एकाग्र भी होता है। जिसका न सिर्फ स्कूली बच्चों में बल्कि वर्तमान तनाव से भरे व्यवहारिक जीवन में अत्यंत आवश्यकता है। ग्राम परसदा कुम्हारी हाईस्कूल में यह सारगर्भित व्याख्यान प्रख्यात मॉडर्न आर्ट चित्रकार डी.एस. विद्यार्थी ने दिया। इस दौरान उनकी पेंटिंग तथा डॉ. अंकुश देवांगन के दुनिया की सबसे छोटी मूर्तियों की प्रदर्शनी देखकर सभी आश्चर्यचकित थे।

ज्ञात हो कि डी.एस. विद्यार्थी तथा अंकुश देवांगन वर्षों से बस्तर के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों को निशुल्क चित्र और मूर्तिकला का प्रशिक्षण देते आ रहे हैं। ताकि यहां के बच्चे सृजनशील बनें और हिंसा के रास्ते में न जाएं। जिसका सदैव उचित प्रतिफल सामने आता रहा है। उनकी कलाओं को देखने के लिए बीहड़ अंचलों में त्यौहार सा माहौल बन पड़ता है।

युवावस्था से ही बच्चों को कला की सीख दे रहे अंकुश देवांगन ने बताया कि वे जानते हैं कि उनके इन छोटे कार्यों से कोई बड़ी क्रांति नहीं आ जाएगी। लेकिन यदि एक भी बच्चा हिंसा के रास्ते में जाने से बच गया तो वे और उनकी कला दोनों धन्य हो जाएगी। ग्राम परसदा हाईस्कूल में चित्रकार विद्यार्थी ने बच्चों को कला के मूल तत्वों के बारे में बताया और कम से कम समय में सुंदर पेंटिंग कैसे बनाई जाती है यह भी बनाकर दिखाया। विद्यार्थी भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत होने के बाद भी लगातार अपने सृजन कार्यों में संलग्न हैं। वर्तमान में वे गीता के 700 श्लोकों पर पेंटिंग बनाने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अनेकों सम्मान उन्हें मिल चुके हैं। उनकी कलाएं चीन, जापान जैसे अनेक देशों में भी संग्रहित हैं। उनकी उद्देश्यपूर्ण कलाएं शोख-चटख रंगों से सराबोर रहती है जो दर्शकों को देर तक देखने के लिए मजबूर कर देती है। ग्रामीण बच्चों और शिक्षकों ने ऐसी विश्व स्तरीय कलाएं पहली बार देखी थी, अतः आज वे नए संकल्प के साथ प्रसन्नचित होकर स्कूल से बाहर निकले थे।

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