छत्तीसगढ़

बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगाने देंगे : अरुण वोरा

Nilmani Pal
4 Jun 2025 4:19 PM IST
बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगाने देंगे : अरुण वोरा
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दुर्ग। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था का स्तर दिन पर दिन घटता जा रहा है, अब सरकार एक और बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है, लेकिन यह बदलाव विकास से ज्यादा विनाश की आहट लेकर आया है। राज्य सरकार ने स्कूलों के ‘युक्तियुक्तकरण’ के नाम पर एक ऐसा फैसला लिया है, जो न सिर्फ 10,463 स्कूलों को बंद करने की ओर बढ़ रहा है, बल्कि प्रदेश के शिक्षा तंत्र की रीढ़ माने जाने वाले 45,000 शिक्षकों की नौकरियों पर भी गहरी चोट करने जा रहा है। इस पर अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अरुण वोरा ने खुलकर विरोध जताया है।

वोरा का कहना है कि प्रदेश में पहले से ही 297 स्कूल बिना किसी शिक्षक के चल रहे हैं, जबकि 7,127 स्कूलों में केवल एक शिक्षक कार्यरत हैं। ऐसे में जरूरत थी कि खाली पदों पर शीघ्र भर्ती कर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए, लेकिन सरकार उल्टा रास्ता चुनते हुए शिक्षकों के पद ही खत्म करने की ओर बढ़ रही है। प्रदेश का शिक्षक वर्ग पहले ही भाजपा सरकार के झूठे वादों से आहत है, अब युक्तियुक्तकरण जैसे फैसले ने उनकी नौकरी की स्थिरता और भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब B.Ed-D.Ed सिर्फ फ्रेम में लगाने लायक डिग्रियां बन गई हैं... क्योंकि सरकार को शिक्षक नहीं, खर्च दिखते हैं! — सरकार खुद मान रही है कि शिक्षकों का बोझ अब उसके बजट पर भारी पड़ रहा है, इसलिए स्कूलों को मिलाया जाएगा और शिक्षक कम किए जाएंगे!"

उन्होंने आगे कहा- "भाजपा सरकार ने विधानसभा में खुद स्वीकार किया था कि प्रदेश में 58,000 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। बजट में 35,000 पद भरने का वादा किया गया। लेकिन अब उन्हीं पदों को समाप्त किया जा रहा है। यह शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के साथ विश्वासघात है। सरकार की इस नीति से न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित स्कूलों के बंद होने से हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे। वोरा ने बताया कि जल्द ही प्रदेश कांग्रेस इस जनविरोधी निर्णय के खिलाफ ज़मीनी स्तर पर आंदोलन करेगी और प्रदेश के हर जिले व ब्लॉक में इस नीति के खिलाफ आवाज़ उठाई जाएगी।

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