चिंता करके क्यों भला समय करें बरबाद, कर चिंतन हो जाइये खुशियों से आबाद

ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
पिछले दिनों मंडी बोर्ड में संविदा नियुक्ति की जमकर चर्चा हो रही थी लोग चाय की टपरी सब यही चर्चा कर रहे थे कि जब सर में किसी का हाथ हो तो कुछ भी संभव है। दरअसल कृषि विपणन मंडी बोर्ड में संविदा में प्रबध निदेशक और अधीक्षण यंत्री को बिठा दिया गया जबकि उस पद के लिए वहां के काबिल अधिकारी मौजूद थे। तभी एक सज्जन ने कहा कि भैया जब तक आपके सर में किसी बड़े आदमी का हाथ न हो तो आपका भला नहीं हो सकता। लोग चिल्लाते रहें कुछ नहीं होने वाला। एक वरिष्ठ नेता के सगे सम्बन्धी होने का फायदा मिल गया यानी सगे सम्बन्धी का नेता होना भी आजकल जरुरी है। इस बात पर चर्चा ख़त्म हुई नहीं थी कि एक सज्जन ने जलसंसाधन विभाग में संविदा में ईएनसी बनाये जाने पर चर्चा छेड़ दिया उनका कहना था की जल संसाधन विभाग में भी कई अधिकारियो को पीछे छोड़ कर रिटायर होने के बाद साहब मलाई खा रहे हैं। अरे भई कई सालों से विभाग और ऊपर तक रहे है तो अटैचमेंट तो रहेगा ही। इसी प्रकार एक मंत्री जी के पीए का भी मामला एक ने उठा दिया कि छोटे भाई को अपने पास मंत्रीजी ने जरुरी काम के लिए पीए बनाकर रखा लेकिन वसूली की शिकायत होने पर उनको हटाकर उन्ही के दूसरे भाई को रख लिया, इनकी भी शिकायत हुई तो मंत्रीजी ने इनको भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। लेकिन मामला अभी तक ख़त्म नहीं हुआ है टेबल के नीचे और बाहर से काम चलने की जानकारी मिल रही है। खैर किसी को चिंता करने की बात नहीं है क्योंकि जनता में खुसुर फुसुर है कि मैनपाट चिंतन के बाद शायद बड़े साहब अब इनकी चिंता करेंगे? आज हर किसी के जुबान पर यही बात है कि चिंता करके क्यों भला समय करें बरबाद, कर चिंतन हो जाइये खुशियों से आबाद।
शिक्षा विभाग की पोल परख ने खोल दी
टॉप टेन में छत्तीसगढ़ को देखने का दावा करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारियों के दावों की पोल परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण ने खोल दी है. नतीजे वही पुराने ढर्रे के हैं. भाषा में 59 त्न और गणित में 57त्न अंकों के साथ छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय औसत भाषा में 64त्न, गणित में 60त्न से थोड़ा पीछे छूट गया. मतलब, 41त्न बच्चे भाषा को समझने में और 43त्न गणित के सवालों को सुलझाने में ‘अटक’ गए. अब ये तो वही बात हुई कि बच्चे किताब खोलते हैं, लेकिन किताब बच्चों को खोल देती है? वही सहायक संचालक एम. सुधीश दावा करते है कि 2017 और 2021 के मुकाबले इस बार छत्तीसगढ़ ने छलांग मारी है. पहले तो हम शिक्षा के मैदान में आखिरी पायदान के करीब होते थे, लेकिन अब बीच में आ गए हैं. शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी आगे हैं. वहीं बालकों की तुलना में बालिकाओं ने फिर साबित किया है कि हम आगे हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि शिक्षा विभाग आज से नहीं वह तो अविबाजित मध्यप्रदेश के जमाने से पीचे से पहले नंबर पर रहा है। शिक्षा विभाग पर हमेशा से ही राजनीति का ग्रहण लगा हुआ है । शिक्षा विभाग के अधिकारी पढ़ाते कम राजनीति ज्यादा करते है। तो परिणाम तो वैसा ही होगा। यदि सरकार अटैचमेंट सिस्टम खत्म कर दे सात ही शिक्षा विभाग को सिर्फ शिक्षकीय कायऱ् करने दे तब कुछ सोचा जा सकता है।
कृषि का आधुनिक तरीका बता रहे हैं अतुल
किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करे तो उसे परंपरागत खेती से चौगुना लाभ मिल सकता है। युवाओं को कृषि से जोडऩे में जो कदम अतुल ने उठाया है वह सराहनीयऔऱ प्रशंसनीय है। हमारा देश कृषिप्रधान होने के बाद भी किसान पुत्र कृषि को छोडक़र इंजीनियरिंग, मेडिकल , साइंस की तरफ आकर्षित हो रहे है। लेकिन अतुल सिंह राजपूत एग्रीक्लचर में बीटेक की पढ़ाई के बाद किसानों के लिए डिजिटल गुरु बन गए। अतुल ने बताया कि खेती को जमीनी स्तर पर समझने के लिए एक वर्ष तक किसानों से मिलना शुरू किया और उनकी खेती के तौर-तरीके को समझा फिर एहसास हुआ कि परंपरागत खेती में लाभ नहीं होने से बहुत से किसान आधुनिक खेती करना चाहते हैं, लेकिन कर नहीं पा रहे हैं. इसके बाद अतुल किसानों को आधुनिक और जैविक खेती से परिचित कराने के लिए वीडियो बनाकर यूट्यूब में डालना शुरू किया। जनता में खुसुर-फुसुर है कि बाबू ये हिन्दुस्तान है यहां किसानों को समय पर खाद पानी नहीं मिल पाता तो वैज्ञानिक खेती की जानकारी कौन देगा। कृषि अधिकारी तो खुद किसानों के हिस्से का खाद पानी पीकर अपने मोटापे की फसल लहलहा रहा है।
सीजीएमएससी बन गया किलविस, अंधेरा कायम रहेगा
सीजीएमएससी में वही पुराना ढर्रा चल रहा है। कमाई के चक्कर में थोक में खरीदे इक्विपमेंट औऱ दवाई फेल हो रहे है। लगता है सीजीएमएससी के नस्ल में ही फर्जीवाड़ा का बहने वाला रक्त यथावत बह रहा है। सीजीएमएससी में हाल के दिनों में बैक-टू-बैक दवाओं और उपकरणों के सैंपल फेल पाए गए हैं। पहले भी कुछ उपकरणों पर रोक लगाई गई थी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि लगातार दवा और मेडिकल उपकरण का सैंपल फेल हो रहा है। उपयोगिता में रोक लगाई जा रही है। दवा और उपकरण को उठाने के लिए पत्र जारी हो रहे हैं। ऐसे में जिम्मेदारी तय होना चाहिए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।कमाई के चक्कर में जो भगवान बनने आए ते वो भी अब शैतान के साथ मिलकर किलविस की तरह अँधेरा कायम करना चाहते है। ताकि कोई उसके कारनामे को देख नहीं सके।
मैनपाट का गुबार रायपुर में दिखाई दे रहा
मैनपाट में हाल ही संपन्न हुए भाजपा के प्रशिक्षण शिविर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपाई प्रशिक्षण के नाम पर पिकनिक मनाने आए थे। भाजपा के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन हो गया पर वहां से गुबार रायपुर तक उड़ते दिखाई दे रहे है। मैनपाट से रायपुर लौटे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, ये परिवारवाद पार्टी है, जो गांधी परिवार के प्रति डिपेंडेंट है। लगातार विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनाव में मिली हार से बौखलाए हुए हैं। इनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि कांग्रेसी भी गलत नहीं कह रहे है । अब नवा रायपुर में तो कुछ बचा नहीं है । भाजपा में सबका साथ सबका विकास का जो मूल मंत्र है उस पर अमल करना है । भाजपा ने विधायक मंत्रियों सांसदों को अनुशासन और आचरण व्यवहार सीखाने में तीन दिन मैनपाट में लगा दिए। अब देखना है कि भाजपा आने वाले चुनाव में कितना अनुशासन और व्यवहार से जनता का दिल जीत पाई है।
बधाई हो डीएमएफ वाले ...
छत्तीसगढ़ में पिछले पांच साल में कांग्रेस शासनकाल में हुए डीएमएफ घोटले की जांच चल रही है वहीं कई अधिकारी जमानत पर भी है। उसके बाद भी पुरस्कार मिलना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। भारत सरकार के खान मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को जिला खनिज संस्थान न्यास के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया है। नेशनल डीएमएफ वर्कशॉप के दौरान केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव पी. दयानंद को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को मॉडल राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया और अन्य राज्यों को भी डेटा अपलोडिंग, पारदर्शिता और ज़मीनी क्रियान्वयन के अनुकरण की सलाह दी गई। नेशनल डीएमएफ कार्यशाला का आयोजन प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना एवं डीएमएफ की प्रभावशीलता को बढ़ाने और खनन क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से सचिव, संचालक एवं खनन प्रभावित जिलों के कलेक्टर्स शामिल हुए। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की ओर से सचिव, खनिज साधन विभाग पी. दयानंद, संचालक रजत बंसल के साथ बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा, कोरबा, रायगढ़ एवं दंतेवाड़ा जिलों के कलेक्टर्स एवं डीएमएफ के नोडल अधिकारी उपस्थित थे। जनता में खुसुर-फसुर है कि ये छत्तीसगढ़ है भैया यहां कुछ भी हो सकता है । हाल ही में मैनपाट में प्रशिक्षण शिविर में उल्टा पानी हाई लाइट हुआ है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि ये छत्तीसगढ़ यहां कुछ भी हो सकता है यहां पानी उल्टा बहता है तो सीधा कौन बहेगा।





