दिल का शौक भला कब निकालेंगे, तनखा में तो सिर्फ किराए निकल गए

ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
सुशासन में योगदान का प्रतिफल मुख्य सचिव अमिताभ जैन को मिला वे अपने प्रशासनिक करियर के 36 साल पूरे कर लिए हैं। 21 अगस्त1989 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (ढ्ढ्रस्) में चयनित हुए जैन ने जिला कलेक्टर से लेकर केंद्र और राज्य सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। 30 जून 2025 को रिटायरमेंट की औपचारिकता पूरी करने के बाद उन्हें तीन माह का सेवा विस्तार मिला है, जिसके साथ वे 30 सितंबर तक मुख्य सचिव पद पर बने रहेंगे। यह छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार है, जब किसी मुख्य सचिव को रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार मिला है। आईएएस हलकों में खुसुर-फुसुर है कि प्रशासनिक सेवा में ऊंचाई हासिल करना सबके बूते की बात नहीं है। जिनको मौका मिलना था वो बारी का इंतजार करते रह गए और फिर जैन साहब ने बाजी पटल दी। अब बेसब्री से सितंबर का इंतजार होने लगा है। नए सीएस खोज सीएम के विदेश यात्रा के बाद शुरू होने की खबर है। मंत्रालय में अब 10 दिनों तक नए सीएस के लिए बायोडाटा बनाने का काम शुरू हो चुका है। अब इसका खुलासा तो सितंबर में होगा यह माना जा रहा है या फिर एक औऱ उपलब्धि जोड़ दी जाएगी यह देखना दिलचस्प होगा।
कैदियों को पुण्य कमाने का मौका
कहते है न भगवान के घर देर है अंधेर नहीं। जाने अनजाने में हुए अपराध की सजा काट रहे कैदियों को पुण्य कमाने का मौका जेल प्रशासन ने देकर बंदियों के जीवन में सकारात्मक पहल की है। इनके हाथों से बने गणेश लोगों के घरों में जाकर यही संदेश देंगे कि कर्म का फल अवशेय मिलता है जितना पुण्य आपके हिस्से में लिखा है वो तो मिलेगी ही। जेल से छूटने के बाद बंदियों को जेल जाने की गुनाह से छुटकारा मिलने के साथ कमाई का भी जरिया बनकर बंदियों के बाकी बचे जीवन में रंग भर देंगे। रंगीन गणेश की प्रतिमाएं बंदियों के जीवन को नया मेड़ देगा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि यह बंदियों के लिए भी सबक है कि दुनिया कितनी भी बड़ी हो जाए गणेश के दिमाग से छोटी ही होगी। इसलिए बंदीगृह में गणेशोत्सव के मद्देनजर केंद्रीय जेल के कैदी भगवान गणेश की इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं मिट्टी से बनाई जा रही हैं, ताकि विसर्जन के बाद ये पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। ये प्रतिमाएं जेल एम्पोरियम में प्रदर्शनी और बेहद किफायती दरों पर बिक्री के लिए रखी गई हैं।प्रतिमाओं के निर्माण को अंतिम रूप दे रहे आजीवन कारावास की सजा काट रहे छह कैदियों भोजराम पिता बिसाहू, सुजीत पिता सुभाष, खेलन पिता पूरन, भेषन पिता हेमलाल, दीपक पिता कांता और हेमत पिता विष्णु ने किया है। जेल प्रशासन का मानना है कि कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने, उनके भीतर छिपी कला को निखारने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनती हैं। इससे कैदियों को न केवल आत्मविश्वास मिलता है बल्कि उनका पुनर्वास भी सशक्त रूप से संभव हो पाता है।
सीएम साय की पहली जापान यात्रा एैतिहासिक होगी
सीएम साय की पहली जापान की यात्रा में एैतिहासिक साबित होने वाली है। विदेशी निवेशक को नाचा के माध्यम से छत्तसीगढ़ की म्ट्टिी में भरे अकूत भंड़ार का सिंहावलोकन करने का मौकी मिलेगा। भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन , भारत सरकार के आमंत्रण पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जापान और दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर रवाना हुआ। इस यात्रा का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करना है। टोक्यो (22-24 अगस्त) में प्रतिनिधिमंडल जापानी उद्योगपतियों, व्यापार संघों और निवेशकों के साथ इन्वेस्टर कनेक्ट सेशंस एवं व्यावसायिक बैठकों में भाग लेगा। इसके बाद ओसाका (25-26 अगस्त) में मुख्यमंत्री साय वर्ल्ड एक्सपो 2025 में शामिल होंगे और छत्तीसगढ़ में निवेश अवसरों पर विभिन्न हितधारकों से चर्चा करेंगे। दौरे का अंतिम चरण सियोल (27-29 अगस्त) में होगा, जहां निवेशक गोलमेज बैठकों, कोरिया की शीर्ष कंपके दौरान सीएम साय कों छत्तीसगढ़ में विकास को गति देने आइिडया भी मिलेगा। जिस पर विपक्ष ने कोहराम मचाकर यह बताना चाह रहे है कि हम तो पांच साल सरकार में रहे पर विदेश नहीं जाकर लोकल फार फोकल को बढ़ावा दिया है अब कहते फिर रहे तूझे मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं।
महंगे शौक ने भ्रष्टाचारी बना दिया
भूपेश सरकार में घोटालो की लम्बी फेहरिस्त है जिसमे से एक बोरे बासी घोटाला भी शामिल था जो जनसामान्य में काफी फेमस हुआ था कि छत्तीसगढय़ा लोग 6 से 7 करोड़ का बासी खा गए थे। जानकारी के मुताबिक एक करोड़ तो सिर्फ डोम बनाया गया था, मजदूरों को भी लगभग एक करोड़ का खाना खिलाया था साथ ही इन मजदूरों और आगंतुकों को लगभग 30 लाख का मिनरल वाटर और छाछ भी पिला दिए थे इतना ही नहीं अतिथियों को 20 लाख का मोमेंटो भी दिया गया था गया था। और तो और लगभग 20 लाख का बाजा बजा दिए और गुब्बारा उड़ा दिए जिसका छत्तीसगढी संस्कृति में कोई स्थान नहीं है। ये कृत्य अधिकारीयों ने सर कमीशन के लिए किया गया था। अब वे पुराने अधिकारी फिर वही इतिहास दोहरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इन सबको देखते सीएसपीडीसीएल में भी भष्टाचार बिजली से पूरा रोशनी से सराबोर कर दिया हुआ ये कि बिजली कंपनी में परदेशिया ठेकेदार ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से 132 करोड़ से भी अधिक का काम ले लिया और अधिकारी उसके प्रमाण पत्र को देख नहीं पाए और उसको काम दे दिए। जनता में खुसुर फूसुर है कि अधिकारी दस्तावेज चेक किए या नहीं इसकी गांरटी नहीं है। पर इस बात की गांरटी जरूर है कि नोटो की गड्डी को हर हाल में चेक किए होंगे। आधिकारियों ने भी तो महंगे शौक पाल कर रखे हैं। इसी बात पर शायर जीशान साजिद का एक शेर याद आया- हम अपने दिल का शौक भला कब निकालेंगे, तनखा में तो सिर्फ किराए निकल गए।





