मुस्लिमों के विकास की खुशहाल पहल के लिए है वक्फ कानून : बृजमोहन अग्रवाल

दिल्ली/रायपुर। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने वक्फ कानून को लेकर कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भाजपा का देश में संपूर्ण प्रभुत्व वाला स्वर्णिम काल चल रहा है। तभी तो संसद में अल्पमत में रहते हुए भी वक्फ बोर्ड बिल पारित करवाते हुए उसे कानूनी रूप देने का चमत्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और भाजपा के आधुनिक चाणक्य एवं देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कर दिया है। इससे देश में प्रखर हिंदुत्व के कुंठित विरोधी पूरी तरह से हक्के बक्के रह गए हैं। पहले धारा 370 को हटाना फिर देश में भव्य राम मंदिर का निर्माण और अब वक्फ बोर्ड के नाम पर चल रहे संपत्तियों के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कर्मठ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी की जोड़ी ने देश के मुस्लिम समुदाय के विकास की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। बिल को राष्ट्रपति द्रौपदी की मंजूरी मिलने के बाद अब वक्फ पर नया कानून बन चुका है लेकिन संसद में बिल पारित होने के दौरान प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में गृह मंत्री अमित शाह ने जिस तरह से गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया, वह वाकई काबिले तारीफ़ है। ये वो भाजपा नहीं है जो एक वोट मैनेज करने में 1999 के दौरान विफल हो गई थी और आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई थी। ये तो विकास पर सतत सक्रिय आज की सशक्त भाजपा है। संसद ने 'वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025' को स्वीकृति देकर वर्षों से मुस्लिम समुदाय में चले आ रहे अन्याय और भ्रष्टाचार के युग का अंत किया और न्याय व समानता के युग की नई शुरुआत की है।वक्फ पर नए कानून के माध्यम से वक्फ बोर्ड और वक्फ संपत्तियाँ अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और न्यायसंगत होने वाली हैं। इससे निश्चित ही मुस्लिम समुदाय के गरीबों, महिलाओं और बच्चों को लाभ मिलेगा। करोड़ों मुस्लिम लोगों को न्याय देने वाले इस महत्त्वपूर्ण कानून के लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी को बधाई देता हूँ। साथ ही कानून बनाने के लिए
समर्थन करने वाले सभी दलों व सांसदों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। अब तक देश में वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग का सबसे बड़ा सबूत यह है कि देश में 6 लाख एकड़ वक्फ प्रॉपर्टी की कुल कीमत 1.20 लाख करोड़ रुपए है। इससे सालाना 12,000 करोड़ रुपए का राजस्व आना चाहिए लेकिन हकीकत में इससे सिर्फ 126 करोड़ रुपये ही आ रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के गरीब वर्ग के लोगों के साथ मुस्लिम समुदाय के कुछ रसूखदार लोग ही धर्म, दान और न्याय के नाम पर छल करते हुए भ्रष्टाचार कर रहे हैं। जिस पर इस कानून के माध्यम से जबरदस्त कुठाराघात किया गया है। वक्फ बोर्ड के पास रेलवे के बराबर लाखों एकड़ भूमि है, लेकिन आय केवल 126 करोड़ रुपये है। मुस्लिम समुदाय के कुछ रसूखदार लोग अब नए कानून के आने के बाद पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो जाएंगे।
1954 के वक्फ अधिनियम से शुरू होकर, वक्फ संपत्तियों को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे में उभरती चुनौतियों का समाधान करने और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए विगत वर्षों में अब तक कई संशोधन हुए हैं। संसद में हाल ही में पारित हुए वक्फ संशोधन विधेयक 2025 या वक्फ पर नए कानून
का मुख्य उद्देश्य वक्फ अधिनियमों में पारदर्शिता बढ़ाना, शासन संरचनाओं में सुधार करना और वक्फ संपत्तियों को दुरुपयोग से बचाना है। नया कानूनी सुधार वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को सबसे सटीक और पारदर्शी आकार देगा जिससे सबसे ज्यादा लाभ मुस्लिम वर्ग के ही कमजोर तबके के लोगों को होगा। ये किसी भी प्रकार की तानाशाही नहीं है बल्कि तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं को खत्म करने वाली मोदी सरकार का मुस्लिम समुदाय के कल्याण की दिशा में उठाया गया एक और अहम कदम है। वक्फ पर नया कानून
प्रशासन का आधुनिकीकरण करने, मुकदमेबाजी को कम करने और वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक व्यापक विधायी प्रयास है।
नए कानून का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 की कमियों को दूर करना और 2013 (संशोधन) अधिनियम द्वारा पेश की गई विसंगतियों को दूर करना है।
यह कानून मुस्लिम समुदाय की
जमीनों को सुरक्षा प्रदान करेगा।
किसी की जमीन अब घोषणा मात्र से वक्फ की नही बनेगी। और वह
अल्लाह की नहीं हो जाएगी। साथ ही मुस्लिम समुदाय के आम नागरिकों की निजी संपत्ति भी सुरक्षित होंगी। लोकसभा में 232 के मुकाबले 288 मतों से और राज्यसभा में 95 के मुकाबले 128 मतों से बिल के पारित होने के बाद और उस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने पर देश में अब नया वक्फ कानून बन गया है। इस नए कानून में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है जो वक्फ संपत्तियों पर लिमिटेशन एक्ट को भी लागू करता है। इससे पहले, वक्फ अधिनियम 1995 के तहत वक्फ को लिमिटेशन एक्ट से छूट मिली हुई थी, लेकिन अब नए कानून और संशोधन के साथ यह छूट समाप्त हो गई है। इस तरह वक्फ संपत्तियों पर भी लिमिटेशन एक्ट लागू होगा। वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 107 के तहत वक्फ संपत्तियों पर लिमिटेशन एक्ट 1963 के प्रावधान लागू नहीं होते थे। इसका मतलब था कि वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति पर अनिश्चित समय तक दावा कर सकता था। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति किसी वक्फ संपत्ति पर दशकों से कब्जा कर रहा था, तो भी वक्फ बोर्ड उस संपत्ति पर दावा कर सकता था। बिना यह विचार किए कि कब्जा करने वाले व्यक्ति ने लंबे समय से उस संपत्ति पर अधिकार बना रखा है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को लिमिटेशन एक्ट का लाभ नहीं मिलता था और वह वक्फ बोर्ड के दावे के खिलाफ कोर्ट में यह नहीं कह सकता था कि “आपने इतनी देरी बाद दावा किया है, अब यह संपत्ति मेरी है। अब नए वक्फ संशोधन या नए कानून के तहत वक्फ संपत्तियों पर लिमिटेशन एक्ट का दायरा लागू हो जाएगा। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति किसी वक्फ संपत्ति पर 12 साल या उससे अधिक समय तक कब्जा करता है, तो वक्फ बोर्ड उस पर दावा नहीं कर सकेगा। अब वक्फ बोर्ड के लिए भी संपत्ति पर दावा करने के लिए एक निर्धारित समय सीमा होगी। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में इस बिल को पेश करते हुए स्पष्ट किया था कि लिमिटेशन एक्ट के लागू नहीं होने के कारण वक्फ बोर्ड कहीं भी दावा कर सकता था, जिससे विवादों की स्थिति उत्पन्न हो रही थी।लिमिटेशन एक्ट के लागू होने से यह सुनिश्चित होगा कि संपत्तियों पर दावा एक निश्चित समय सीमा तक ही किया जा सकेगा। जिससे वक्फ बोर्ड की मनमानी पर रोक लगेगी और आम मुस्लिम नागरिकों को यह विश्वास मिलेगा कि उनकी संपत्ति अचानक वक्फ के नाम पर नहीं छिनी जाएगी। अब वक्फ बोर्ड 12 साल या उससे अधिक समय तक किसी संपत्ति पर कब्जा किए बिना उस पर दावा नहीं कर सकेगा। इसका मतलब यह भी होगा कि वक्फ संपत्तियों पर एडवर्स पजेशन एक्ट लागू होगा, जिससे अगर किसी व्यक्ति ने वक्फ संपत्ति पर 12 साल तक कब्जा किया है, तो उसे उस संपत्ति का स्थायी मालिक मान लिया जाएगा। यह बदलाव वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और विवादों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अभी वक्फ एक प्रकार से ऐसी
चल या अचल संपत्ति है, जिसे इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति, अल्लाह के नाम पर या धार्मिक मकसद या परोपकार के मकसद से दान करता है। ये संपत्ति परोपकार के मकसद से समाज के लिए दान दी जाती है। अल्लाह के सिवा और कोई इसका मालिक नहीं होता है। वक़्फ़ संपत्ति की न तो ख़रीद-फ़रोख़्त की जा सकती है। और न ही इन्हें किसी को हस्तांतरित किया जा सकता है। वक़्फ़ ट्रस्ट जैसा होता है। जिस तरह से ट्रस्ट में लोग संपत्ति दान कर देते हैं ठीक उसी तरह से इस्लाम में वक़्फ़ होता है। बिल पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी से कानून बनने पर अब किसी की भी जमीन सिर्फ घोषणा मात्र से वक्फ की संपत्ति नहीं हो जाएगी। नए कानून के अंतर्गत ‘वक्फ’ और ‘वक्फ बोर्ड’, दोनों अलग-अलग हैं। गैर-मुस्लिम सदस्य ‘वक्फ परिषद’ और ‘वक्फ बोर्ड’ में होंगे, ‘वक्फ’ में नहीं। उनका काम धार्मिक कार्यों में दखल देना नहीं, बल्कि यह देखना होगा कि जिस उद्देश्य के लिए दान दिया गया है, उसका उपयोग सही ढंग से हो रहा है या नहीं।
कांग्रेस ने वर्ष 2013 में रातों-रात वोट बैंक के उद्देश्य से वक्फ कानून को अत्यंत एक तरफ़ा बना दिया था। जब दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 संपत्तियाँ चुनाव से मात्र 25 दिन पहले ही वक्फ को सौंप दी गईं थीं। वक्फ के नाम पर जिस गरीब की जमीन हड़प ली जाती थी, कांग्रेस ने उससे कोर्ट जाने का अधिकार भी छीन लिया था। भाजपा सरकार ने नए कानून में उसको कोर्ट जाने का अधिकार भी दे दिया है। नए कानून में
वक्फ बोर्ड के लिए नियुक्त होने वाले चैरिटी कमिश्नर का काम केवल यह देखना होगा कि चैरिटी कानून के अनुसार चले। यह धार्मिक नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक कार्य ढांचे के तहत चले। इस तरह वक्फ के नाम पर दान की गई संपत्तियों को बेचने वालों को पकड़ने का कार्य वक्फ बोर्ड ही करेगा। धारा 370, सीएए, राम मंदिर - तीन तलाक और हलाला के मुद्दे पर कुंठित और अब तक तुष्टीकरण की घाघ चाल चलने वाले विपक्ष ने अल्पसंख्यकों को उग्र हिंदुत्व के नाम पर भयभीत करने पूरी कोशिश की लेकिन मोदी सरकार ने इससे उलट पिछले 15 सालों में मुस्लिम समुदाय के संपूर्ण विकास पर ही ध्यान दिया है।
अब भाजपा सरकार नए वक्फ कानून के जरिए मुस्लिम समुदाय का बेहतर आर्थिक और सामाजिक विकास करना चाहती है। भाजपा की ऐसी स्वच्छ और स्पष्ट पारदर्शी सोच का आप सभी पुरजोर वंदन और अभिनंदन करें।





