छत्तीसगढ़

बोधघाट जल विद्युत परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध, कहा- जान देंगे पर जमीन नहीं

Shantanu Roy
23 Jun 2025 10:27 PM IST
बोधघाट जल विद्युत परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध, कहा- जान देंगे पर जमीन नहीं
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Dantewada. दंतेवाड़ा। बोधघाट जल विद्युत परियोजना को लेकर दंतेवाड़ा जिले के 56 गांवों में जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है। हितालकूडूम गांव में बोधघाट संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित बैठक में सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का विरोध किया और स्पष्ट किया कि "जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे।" ग्रामीणों ने आंदोलन को और तेज करने का एलान किया है।
विवाद का कारण
बोधघाट परियोजना का उद्देश्य 125 मेगावाट बिजली उत्पादन, 3.7 लाख हेक्टेयर सिंचाई, और 500 मेगावाट बिजली का विस्तार करना है। लेकिन इस परियोजना से 56 गांव, 13,783 हेक्टेयर भूमि और लगभग 50 लाख पेड़ प्रभावित होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने बिना विस्थापन नीति और स्थानीय विश्वास के इस परियोजना को आगे बढ़ाया है, जो अस्वीकार्य है।
प्रमुख तथ्य: प्रभावित भूमि
🔹 5407 हेक्टेयर वन भूमि
🔹 5010 हेक्टेयर निजी भूमि
🔹 3068 हेक्टेयर राजस्व भूमि
डूबान क्षेत्र: 56 गांव
नुकसान: 50 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई
लागत: लगभग ₹29,000 करोड़
बिजली उत्पादन क्षमता: 125 मेगावाट (जल) + 500 मेगावाट (संभावित)
परियोजना का इतिहास संक्षेप में
1950: कल्पना की गई
1979: आधारशिला (PM मोरारजी देसाई)
1985: विश्व बैंक से 300.4 मिलियन डॉलर की मंजूरी
1988: पर्यावरणीय आपत्तियों से रोक
2004: पुनः प्रयास, लेकिन नक्सली प्रभाव बाधक
2014: निजी कंपनी द्वारा प्रयास, स्थानीय विरोध से काम बंद
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सरकार:
स्पष्ट विस्थापन नीति नहीं लाती
मुआवजा और पुनर्वास का ठोस प्लान नहीं देती
और स्थानीय विश्वास नहीं जीतती
तब तक परियोजना का काम शुरू नहीं होने देंगे।
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