छत्तीसगढ़

प्रभारी रेंजर का नोट गिनते वीडियो वायरल, ठेले वालों से वसूली करने का आरोप

Nil dhankar
25 Jan 2026 1:57 PM IST
प्रभारी रेंजर का नोट गिनते वीडियो वायरल, ठेले वालों से वसूली करने का आरोप
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बलरामपुर। जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र में पदस्थ प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर का एक और विवादित मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित रूप से किसी व्यक्ति से रिश्वत लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में प्रभारी रेंजर ₹500-₹500 के नोट गिनते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर के खिलाफ सरगुजा रेंज के आईजी और मुख्य वन संरक्षक को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सड़क किनारे ठेला लगाने वाले गरीब व्यवसायियों से प्रति माह ₹5000 की अवैध वसूली की मांग की जाती थी। बताया जाता है कि यह शिकायत सरगुजा रेंज तक पहुंची, लेकिन आज तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पण्डरी में वन विभाग द्वारा 7 जनवरी को 43 लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में तीन दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई हुई और न ही नोटिस का कोई स्पष्ट परिणाम सामने आया। ग्रामीणों ने शिकायत में यह भी बताया कि घटना के अगले दिन उन्हें जानकारी मिली कि उनके खिलाफ थाने में फर्जी और निराधार FIR दर्ज करा दी गई है। आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारी पीयूष पटेल द्वारा यह रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसमें कहा गया कि ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की और उनकी वर्दी फाड़ दी। जबकि ग्रामीणों का दावा है कि पीयूष पटेल घटना स्थल पर वर्दी में मौजूद ही नहीं थे, ऐसे में वर्दी फाड़ने का आरोप पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है

स्थानीय लोगों का आरोप है कि किसी मंत्री या प्रभावशाली नेता के दबाव अथवा वन विभाग की मिलीभगत के चलते वर्षों से अतिक्रमण फल-फूल रहा है। 43 लोगों के नाम पर नोटिस जारी कर विभाग ने केवल औपचारिकता पूरी की, लेकिन वास्तविक कार्रवाई न होने से विभाग की नीयत पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अगर विभाग ईमानदार होता तो नोटिस के बाद अब तक कार्रवाई हो चुकी होती।

वहीं दूसरी ओर प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर रिश्वत मांगने के अलावा गरीब ठेला व्यवसायियों को धमकाने, मारपीट करने और फर्जी मुकदमों में फंसाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों ने वन विभाग की छवि को गहरी चोट पहुंचाई है और आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शिवनाथ ठाकुर का 15 से 20 वर्षों तक एक ही रेंज में पदस्थ रहना आखिर कैसे संभव हुआ। विभागीय नियमों के अनुसार समय-समय पर अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण होना चाहिए, लेकिन सिपाही से लेकर प्रभारी रेंजर तक का पूरा कार्यकाल रघुनाथनगर रेंज में ही बिताना पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

इस पूरे मामले में रघुनाथनगर के प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने पैसा लेकर वन भूमि पर कब्जा कराया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शिवनाथ ठाकुर सिपाही के पद पर थे, तभी से पैसे लेकर कब्जा करवाने का खेल शुरू हो गया था और आज प्रभारी रेंजर बनने के बाद उनका हौसला और बुलंद हो गया है। वायरल वीडियो और लगातार सामने आ रहे आरोपों के बाद अब आमजन और सामाजिक संगठनों द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो इससे वन विभाग की साख पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अब देखना यह होगा कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और शासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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