बैन के बावजूद रायपुर के होटल-कैफे में हुक्का पार्टी Video, पुलिस के लिए चुनौती

रायपुर। राजधानी रायपुर में राज्य सरकार और जिला प्रशासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रतिबंधित हुक्के की बिक्री और उपयोग खुलेआम जारी है। नियमों की अवहेलना का यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक सख्ती पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन द्वारा लिखित आदेश जारी किए जाने के बाद भी शहर के कई क्लबों, पार्टियों और होटलों में धड़ल्ले से हुक्के का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकार द्वारा स्वास्थ्य कारणों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए हुक्के पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद राजधानी के पॉश इलाकों से लेकर आउटर क्षेत्रों तक कई जगहों पर हुक्के की खुलेआम बिक्री हो रही है। सूत्रों के अनुसार, कुछ होटल और कैफे संचालक प्रतिबंध को नजरअंदाज करते हुए ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध करा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई आयोजनों और निजी पार्टियों में भी हुक्के का उपयोग आम बात हो गई है।
चिंता की बात यह भी है कि प्रतिबंध के बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हुक्के से जुड़े फोटो और वीडियो खुलेआम अपलोड किए जा रहे हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर क्लबों और पार्टियों की ऐसी पोस्ट सामने आ रही हैं, जिनमें हुक्के का उपयोग साफ तौर पर दिखाई देता है। इससे न सिर्फ आदेशों की अवहेलना हो रही है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि पुलिस की साइबर निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है। खाद्य विभाग और स्थानीय थानों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि नियमित रूप से मॉनिटरिंग और औचक निरीक्षण किए जाएं, तो इस तरह के मामलों पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा प्रतीत होता है कि न तो खाद्य विभाग की ओर से सख्त कार्रवाई हो रही है और न ही पुलिस थानों द्वारा नियमित जांच की जा रही है। इसी का फायदा उठाकर होटल और क्लब संचालक बेखौफ होकर प्रतिबंधित हुक्के का उपयोग करवा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हुक्के का सेवन सिगरेट से कम खतरनाक नहीं है। इससे फेफड़ों, हृदय और श्वसन तंत्र पर गंभीर असर पड़ता है। बावजूद इसके, युवाओं में इसे स्टेटस सिंबल के रूप में पेश किया जा रहा है, जो चिंता का विषय है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह प्रवृत्ति और तेजी से बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि हुक्के पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाए। होटल, क्लब और कैफे संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, साथ ही सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और पुलिस इस गंभीर मामले पर कब तक ठोस कदम उठाती है, या फिर राजधानी में नियमों की अनदेखी यूं ही जारी रहेगी।





