छत्तीसगढ़
नशीले इंजेक्शन तस्करी में दो आरोपियों को 15-15 साल की सजा
Shantanu Roy
30 Sept 2025 8:13 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। नशीले इंजेक्शन की तस्करी के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को 15-15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) किरण त्रिपाठी की अदालत में हुई। न्यायालय ने अपने निर्णय में माना कि आरोपी अजीत साहू और घनश्याम साहू, दोनों अनूपपुर निवासी, नशीले इंजेक्शन की अवैध तस्करी में लिप्त थे। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सबूत और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया और कठोर दंड दिया।
कैसे पकड़े गए आरोपी
यह मामला पिछले वर्ष का है, जब सिविल लाइन पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग नशीले इंजेक्शन की तस्करी करने वाले हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने उसलापुर रेलवे स्टेशन के पास घेराबंदी की और संदिग्धों को पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके पास से 75 नशीले इंजेक्शन बरामद हुए। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अजीत साहू और घनश्याम साहू के रूप में हुई। दोनों के खिलाफ धारा 22 एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच और चालान
इस मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अमृत साहू को सौंपी गई थी। उन्होंने मामले की गहन जांच कर सबूत इकट्ठे किए और आरोपियों की संलिप्तता को साबित किया। जांच पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों के खिलाफ चालान तैयार कर विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस कोर्ट) में पेश किया। अदालत में पेश किए गए दस्तावेज और गवाहों के बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया कि आरोपी संगठित तरीके से नशे का कारोबार कर रहे थे।
पुलिस अधिकारी को पुरस्कार
इस मामले में सफल जांच और अभियोजन की भूमिका निभाने वाले उपनिरीक्षक अमृत साहू को एसएसपी रजनेश सिंह ने पुरस्कृत करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अमृत साहू ने जिस सतर्कता और मेहनत से इस मामले की जांच की है, वह पूरे पुलिस विभाग के लिए सराहनीय उदाहरण है।
नशे के खिलाफ सख्ती
अधिकारियों का कहना है कि जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि ऐसे मामलों को समय रहते रोका जा सके। पुलिस का मानना है कि इस तरह के फैसले समाज में जागरूकता फैलाएंगे और अपराधियों को सख्त संदेश देंगे कि नशे का कारोबार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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