छत्तीसगढ़

आदिवासी प्रतिभाओं को मिलेगी नई उड़ान: ओपी चौधरी

Shantanu Roy
26 July 2025 9:39 PM IST
आदिवासी प्रतिभाओं को मिलेगी नई उड़ान: ओपी चौधरी
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छग
Jashpur. जशपुर। आदिवासी बहुल जशपुर जिले के पंड्रापाठ क्षेत्र को एक बड़ी सौगात मिली है। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने यहां ₹20.53 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी की स्वीकृति दी है। यह अकादमी कुल 10.27 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी और इसमें केवल खेल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य की भी समुचित व्यवस्था रहेगी। तीरंदाजी अकादमी के निर्माण का मुख्य उद्देश्य जशपुर और आसपास के आदिवासी अंचलों विशेषकर विशेष पिछड़ी जनजाति – पहाड़ी कोरवा समुदाय के बच्चों को खेलों की दुनिया में आगे लाना है। यह अकादमी राज्य शासन के ‘खेलो छत्तीसगढ़’ अभियान के तहत आदिवासी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का एक ठोस प्रयास है।
क्या होगी अकादमी में खास सुविधाएं?
पंड्रापाठ में बनने वाली इस तीरंदाजी अकादमी में कई आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। यहां एक मानक तीरंदाजी प्रशिक्षण मैदान होगा, जिसमें आधुनिक उपकरणों के साथ बच्चों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही पुस्तकालय की सुविधा, प्राथमिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा, बच्चों के कौशल विकास हेतु एक समर्पित प्रशिक्षण केन्द्र और आवासीय सुविधा भी दी जाएगी। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि जशपुर और बस्तर जैसे क्षेत्रों के आदिवासी बच्चे जन्मजात प्रतिभाशाली होते हैं, उन्हें केवल एक मंच, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। यह तीरंदाजी अकादमी उन्हीं बच्चों के भविष्य को दिशा देने का माध्यम बनेगी।
पहाड़ी कोरवा बच्चों को मिलेगा विशेष लाभ
यह अकादमी खासतौर पर पहाड़ी कोरवा जनजाति के बच्चों के लिए वरदान साबित होगी। वर्तमान में पहाड़ी कोरवा समाज शिक्षा, स्वास्थ्य और खेलों में काफी पिछड़ा हुआ है। ऐसे में इस अकादमी से उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ने में मदद मिलेगी।
खेल से जुड़ी नई सोच का हिस्सा है यह योजना
राज्य सरकार की मंशा है कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को न केवल शिक्षा और रोजगार में अवसर मिले बल्कि खेलों में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो। सरकार की इस नई पहल से जशपुर जिला आने वाले वर्षों में तीरंदाजी का हब बन सकता है। पंड्रापाठ में तीरंदाजी अकादमी की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों में खासा उत्साह है। जनप्रतिनिधियों और समाजिक संगठनों ने इसे राज्य सरकार की दूरदर्शिता बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे आदिवासी बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा। यह तीरंदाजी अकादमी आने वाले समय में न केवल जशपुर का नाम रोशन करेगी बल्कि छत्तीसगढ़ को खेल के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
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