छत्तीसगढ़

नगरों में भारी वाहनों के प्रवेश का समय सीमा निर्धारित

Nilmani Pal
7 Jun 2025 8:36 AM IST
नगरों में भारी वाहनों के प्रवेश का समय सीमा निर्धारित
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सारंगढ़ बिलाईगढ़ सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नगरों से लगे हुए सड़क, जिसमें धूल, मिट्टी, डस्ट व प्रदूषण के कारण आमजनों की सुरक्षा एवं दुर्घटना को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम 1994 के नियम 215 के तहत् प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारी मोटरयान को प्रातः 6:30 से 10 बजे तक व शाम 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने प्रतिबंधित किया है। यह आदेश यात्री बसों पर लागू नहीं होगा। यह आदेश कलेक्टर कार्यालय सारंगढ़ बिलाईगढ़ से जारी किया गया है जो तत्काल और आगामी आदेश पर्यन्त तक प्रभावशील होगा।

श्रवण यंत्र मिलने से 3 वर्षीय बालक हर्ष हुआ गदगद

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संपन्न सुशासन तिहार का दौर राज्य के नागरिकों के लिए सहायक सिद्ध हुआ है। कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने जिले के सभी समाधान शिविर में सभी विभाग के अधिकारियों को विभागीय योजनाओं की जानकारी, पात्रता आदि की जानकारी देने निर्देश दिए थे, जहां सभी अधिकारियों के जानकारी देने पर स्थानीय निवासी योजनाओं से अवगत हुए और वे लाभान्वित हो रहे हैं। इसी कड़ी में सुशासन तिहार में समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग जनों को वितरित किए जाने वाले सहायक उपकरण की जानकारी दी गई थी, उसी से प्रेरित होकर बच्चे के पिता द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवा कर समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया गया और समाज कल्याण अधिकारी को अपनी परेशानी बताई। विभाग द्वारा दिव्यांग हर्ष के आवश्यक दस्तावेज का परीक्षण करके त्वरित रूप से जिला कार्यालय में ही डिजिटल श्रवण यंत्र और 36 नग बैटरी प्रदाय की गई तथा उपकरण के उपयोग के संबंध में आवश्यक जानकारी दी।

जिले के सारंगढ़ तहसील के ग्राम पंचायत ठाकुरदिया निवासी दयानिधि पटेल के 3 वर्षीय पुत्र हर्ष को जन्म के बाद से ही कम सुनाई देने की समस्या थी। इस समस्या के कारण हर्ष न तो बोल पा रहा था, और न ही अच्छे से सुन ही पा रहा था, हर्ष के साथ हर समय किसी अनहोनी का भी भय बना रहता था। हर्ष के पिता दयानिधि, अपने बच्चे के इलाज के लिए बहुत परेशान थे । दिव्यांग हर्ष को अपने दैनिक जीवन के कार्यों में भी अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। हर्ष की इस समस्या के कारण उसके घर वाले भी बहुत परेशान रहते थे। सड़क में चलने वाले गाड़ियों के हॉर्न की तेज आवाज भी सुनाई नहीं देने के कारण हर्ष के साथ हमेशा दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती थी।

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