छत्तीसगढ़

बाघ का हमला: 65 वर्षीय चरवाहे की मौत, ग्रामीणों में आक्रोश

Shantanu Roy
23 Nov 2025 5:27 PM IST
बाघ का हमला: 65 वर्षीय चरवाहे की मौत, ग्रामीणों में आक्रोश
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Kawardha. कवर्धा। मध्यप्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क के सुपखार परिक्षेत्र और छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले की सीमा पर रविवार को मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक गंभीर घटना सामने आई। छत्तीसगढ़ के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत चिल्फी थाना क्षेत्र के ग्राम सिंघनपुरी निवासी 65 वर्षीय चरवाहा गुनीराम यादव का क्षत-विक्षत शव सुपखार कोर एरिया के जंगल में मिला। शव के आधे हिस्से में बाघ के हमले के स्पष्ट निशान होने के कारण वन विभाग ने घटना को टाइगर अटैक माना है।
गाय चराने गया था, रात तक घर नहीं लौटा
घटना शनिवार सुबह की है, जब गुनीराम यादव रोज की तरह अपनी गायों को लेकर कान्हा नेशनल पार्क के सुपखार क्षेत्र की ओर गए थे। देर शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजन चिंतित हुए और थाना चिल्फी में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। रविवार सुबह ग्रामीणों, पुलिस और वन विभाग द्वारा संयुक्त खोज अभियान शुरू किया गया। खोजबीन के दौरान परिक्षेत्र 314 के जंगल में एक क्षत-विक्षत शव मिला, जिसकी पहचान गुनीराम यादव के रूप में हुई।
शव के पास पाए गए बाघ के स्पष्ट सबूत
वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और पाया कि शव के आसपास घसीटने के निशान, पंजों की आकृतियाँ और बाघ के पगमार्ग स्पष्ट रूप से मौजूद थे। शव के ऊपरी हिस्से में दांतों के कटाव के गहरे निशान भी मिले। इन सब साक्ष्यों के आधार पर घटना को बाघ के हमले का मामला माना गया। अधिकारियों के अनुसार इलाके में कुछ समय से बड़ी बिल्ली प्रजाति के मांसाहारी वन्यजीवों की गतिविधि बढ़ी है।
पहले भी कई गांव विस्थापित, जोखिम फिर भी कायम
सिंघनपुरी, बिठली रनवाही, सुखड़ी एवं आसपास के गांव लंबे समय से बाघ-गतिविधि वाले क्षेत्रों में आते हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने पिछले वर्षों में कई गांवों का विस्थापन भी किया था, लेकिन ग्रामीण अभी भी पशु चराने और लकड़ी संग्रह के लिए कोर एरिया के नजदीक पहुँच जाते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में बाघ, तेंदुए और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों की आवाजाही तेज हुई है, पर चेतावनी बोर्ड, सायरन सिस्टम और गश्त पर्याप्त नहीं है।
दो राज्यों की संयुक्त टीम की कार्रवाई
घटना मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर हुई, इसलिए कान्हा टाइगर रिजर्व और चिल्फी वन परिक्षेत्र की संयुक्त टीम मौके पर पहुँची। पंचनामा कार्रवाई पूरी की गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अधिकारियों ने हमले की वैज्ञानिक जांच करते हुए पगमार्ग, घसीटने के निशान और दांतों के कटाव का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया है। दोनों राज्यों के विभाग संयुक्त रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जिससे परिजनों को मुआवजा देने की
प्रक्रिया
तेज होगी। घटना के बाद क्षेत्र में भय और नाराजगी दोनों बढ़ गए हैं। ग्रामीणों ने कोर एरिया में आमजन के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाने, गश्त बढ़ाने, चेतावनी बोर्ड एवं सायरन लगाने तथा चराई के लिए वैकल्पिक सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघों की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
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