छत्तीसगढ़

गांजा तस्करी मामले में तीन आरोपियों को 12-12 साल की सजा

Shantanu Roy
7 Jun 2026 7:11 PM IST
गांजा तस्करी मामले में तीन आरोपियों को 12-12 साल की सजा
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छग
Mahasamund. महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध गांजा तस्करी के एक मामले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। एनडीपीएस एक्ट के तहत दोष सिद्ध पाए जाने पर तीन आरोपियों को 12-12 वर्ष के सश्रम कारावास और 1-1 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश संघपुष्पा भतपहरी की अदालत द्वारा सुनाया गया। जानकारी के अनुसार, एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 (ख) (ii)(c) के तहत आरोपी बाबूल जैसवार (उत्तर प्रदेश, जिला जौनपुर), विकास कुमार (ग्राम सहरमा) और पवित्र लिमा (ओडिशा, ग्राम बरलागुड़ा कालिमा) को दोषी पाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 1 वर्ष का सश्रम कारावास भुगतना होगा।

मामला 15 जनवरी 2025 का है, जब थाना कोमाखान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो संदिग्ध व्यक्ति कोमाखान रेलवे स्टेशन के पास प्लास्टिक की बोरियों में अवैध गांजा लेकर ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों संदिग्धों को हिरासत में लिया। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिए, जिसके बाद तलाशी ली गई। तलाशी में उनके पास से बड़ी मात्रा में गांजा बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि यह एक संगठित तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है।

इसके बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए गांजा आपूर्ति से जुड़े अन्य आरोपी को भी ट्रेस किया और ओडिशा में दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया। इस तरह पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ और तीनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, गवाहों के बयान और बरामदगी रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी समाज के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे मामलों में सख्त सजा आवश्यक है ताकि नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके। इस फैसले को पुलिस और अभियोजन पक्ष की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय स्तर पर इस फैसले को लेकर लोगों ने राहत जताई है और इसे नशा विरोधी कार्रवाई की दिशा में एक मजबूत कदम बताया है। पुलिस का कहना है कि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और मुखबिर तंत्र को भी मजबूत किया गया है।
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