छत्तीसगढ़

श्रमिक वर्ग को साय सरकार ने बनाया मजबूत

Nilmani Pal
26 Sept 2025 3:21 PM IST
श्रमिक वर्ग को साय सरकार ने बनाया मजबूत
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विधवा, तलाकशुदा और अविवाहित महिलाएं बनी आत्मनिर्भर

रायपुर। श्रमिक वर्ग को साय सरकार ने मजबूत बनाया है, कई नए-नए योजना लॉन्च कर गरीबों को दूर करने का काम विष्णुदेव की सरकार ने बहुत कम समय में कर दिखाया है।राज्य की आर्थिक प्रगति में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भी जाना जाता है।

कृषि, खनन, वनों से प्राप्त उत्पादों और छोटे उद्योगों पर आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिलाएँ खेती-बाड़ी, तेंदूपत्ता संग्रहण और हस्तशिल्प निर्माण जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देते आ रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में निर्माण कार्य, घरेलू सेवाएँ और छोटे व्यापारों में उनकी भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। महिला श्रमिकों की भागीदारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, विशेष रूप से असंगठित क्षेत्रों में, फिर भी उनकी मेहनत को अब भी उचित मान्यता और पारिश्रमिक नहीं मिल पाता। महिला श्रमिकों के सामने कई चुनौतियाँ हैं। जिनमें समान वेतन का अभाव, समान कार्य के बावजूद वेतन असमानता, खनन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में असुरक्षित परिस्थितियाँ, प्रसूति लाभों और स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुँच, कम पढ़ाई और तकनीकी प्रशिक्षण के कारण सीमित अवसर, पारंपरिक सोच और घरेलू जिम्मेदारियाँ उनकी स्वतंत्रता को सीमित करती हैं।


छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिसमें मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण मिशन के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए विशेष सहायता दी जा रही है। नई श्रमिक नीति द्वारा असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत महिला श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाया गया है। महिला शक्ति केंद्रों के विस्तार से प्रत्येक जिले में महिला शक्ति केंद्र स्थापित कर महिला श्रमिकों को कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर महिला स्वावलंबन के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। सखी वन स्टॉप सेंटर में हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए त्वरित सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था। मनरेगा में महिलाओं के भागीदारी बढ़ाने रोजगार दिवसों में महिलाओं के न्यूनतम 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से मिनीमाता महतारी जतन योजना है, जो पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति सहायता प्रदान करती है।इस योजना के तहत बच्चे के जन्म के बाद पंजीकृत महिला श्रमिकों को 20 हजार की एकमुश्त राशि मिलती है। इसके अलावा राज्य सरकार विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम और सहायता योजनाएं भी चलाती है, जो महिला श्रमिकों को सशक्त बनाने में मदद करती हैं।

मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना अंतर्गत 18 से 50 वर्ष आयु के बीच की पंजीकृत महिला श्रमिकों को सिलाई मशीन के लिए सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण के लिए सहायता प्रदान करती है।छत्तीसगढ़ महिला कोष महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन करता है, जिसमें वित्तीय सहायता प्रशिक्षण और अन्य संसाधन शामिल हैं।घरेलू महिला कामगार कौशल उन्नयन एवं ठेका श्रमिक, हमाल कामगार परिवार सशक्तिकरण योजना,घरेलू महिला श्रमिकों, ठेका श्रमिकों और हमाल श्रमिकों के कौशल विकास और परिवार को सशक्त बनाने के लिए योजना है। सक्षम योजना छत्तीसगढ़ महिला कोष के तहत संचालित एक योजना है जो विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा और अविवाहित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को 1 हजार रूपए प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार महिला श्रमिकों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चला रही है, प्रशिक्षण के बाद उनके रोजगार का प्रबंध भी कर रही है, ताकि उन्हें आर्थिक मजबूती मिल सके, सरकार माताओं-बहनों तक जनहितैषी योजनाओं के शत प्रतिशत लाभ की पहुंच भी सुनिश्चित कर रही है। जबकि स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय सरकार में प्रदेश के विकास में महिला श्रमिकों के योगदान को सम्मान मिला है।

‘अटल श्रम सशक्तिकरण योजना‘

प्रवासी श्रमिक साथियों को सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदाय करने हेतु प्रथम चरण में 5 राज्य क्रमशः उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, गुजरात एवं महाराष्ट्र में जहां अधिक संख्या में श्रमिक प्रवास करते हैं, वहां ‘मोर चिन्हारी भवन’ बनाया जाएगा। इसके अलावा श्रमिकों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने 106 निजी चिकित्सालयों से अनुबंध किया गया है। इससे उन्हें हृदय रोग, किडनी रोग, मस्तिष्क रोग, जटिल सर्जरी आदि के लिए सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में उपचार सुविधा मिलेगी।

श्रम विभाग की अम्ब्रेला योजना अटल श्रम सशक्तिकरण योजना‘ के नाम से शुरू की गई है। इससे श्रमिकों तथा उनके परिवारों को एक ही स्थान पर सरकार के सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा, इसके लिए ‘श्रमेव जयते‘ पोर्टल बनाया गया है। पंजीकृत श्रमिकों के द्वारा आर्थिक गतिविधि के लिए बैंक से लिए जाने वाले ऋण पर लगने वाले ब्याज में अनुदान देने के लिए जल्द ही नई योजना शुरू की जा रही है ताकि आत्म निर्भर बनते हुए स्वयं मालिक बनने की दिशा में बढ़ सकें। इसके अलावा असंगठित श्रमिकों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन एवं सतत् निगरानी हेतु राज्य के प्रत्येक संभाग में संभाग स्तरीय श्रम कल्याण कार्यालय के स्थापना की जा रही है।

श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए श्रमिक बाहुल्य क्षेत्रों तिल्दा, उरला (रायपुर), लारा, खरसिया (रायगढ़) में नये औषधालय आरंभ करने की कार्यवाही की जा रही है। बीमित हितग्राहियों को टर्शरी चिकित्सा सुविधाएं कैशलेस आधार पर उपलब्ध कराने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने राज्य के 106 निजी चिकित्सालयों के साथ अनुबंध किया गया है। इन चिकित्सालयों के सुपर स्पेशलिटी चिकित्सकों द्वारा विभिन्न प्रकार के हृदय रोग, किडनी रोग, मस्तिष्क रोग, जटिल सर्जरी आदि से संबंधित उपचार की व्यवस्था है।

अस्पताल में भर्ती इंडोर पेशेंट के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु रायपुर तथा कोरबा में 100 बिस्तर युक्त एक-एक चिकित्सालय का निर्माण कर्मचारी राज्य बीमा निगम के द्वारा किया गया है। इन चिकित्सालयों में बीमित हितग्राहियों के उपचार हेतु ओ.पी.डी. सुविधा आरंभ की जा चुकी है। भिलाई तथा रायगढ़ 100 विस्तर युक्त चिकित्सालयों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त बिलासपुर में 100 बिस्तर चिकित्सालय निर्माण की स्वीकृति कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा दी गई है।

श्रमिकों को उनके कार्यस्थल के नजदीक ही सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना शुरू की गई है। इन केन्द्रों में श्रमिकों को पांच रूपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। पहले चरण में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, रायगढ़, महासमुंद एवं सूरजपुर में 21 केन्द्र प्रारंभ किए गए हैं। वर्ष 2024-25 में योजना अंतर्गत भोजन के लिए 24 नवीन केन्द्र 9 जिलों में प्रारंभ किए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत 60 प्रवर्ग में पंजीकृत 24.31 लाख निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए वर्ष 2024-25 में 505.07 करोड़ रूपए व्यय किया जाना प्रस्तावित है। छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल हेतु 6 करोड़ का प्रावधान-वर्ष 2024-25 में पंजीकृत 2 लाख 12 हजार संगठित श्रमिकों के लिए बजट में राज्य शासन के अनुदान हेतु 6 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

वर्तमान में पंजीकृत संगठित श्रमिक एवं उनके परिवार के सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य कल्याण हेतु मंडल द्वारा संचालित 13 योजनाएं जैसे-दुर्घटना, मृत्यु सहायता योजना, शैक्षणिक छात्रवृत्ति, कौशल उन्नयन, निःशुल्क सायकल वितरण योजना, निःशुल्क सिलाई मशीन योजना एवं शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना इत्यादि के लिए वर्ष 2024-25 में मंडल की संचित निधि से लगभग राशि 18.30 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है।

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