सर उठाती हुई मौजों से हवाओं ने कहा वक्त के साथ चलो उलझा न करो

ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
मंत्री पद जाते ही सबसे पहले उनके खास समर्थकों का मोह भंग होता है इसी कड़ी में सोशल मीडिया से जानकारी प्राप्त हो रही है कि एक कद्दावर मंत्री के सिपहसालार भी जगह छोड़ दिए हैं या मंत्री जी खुद उनको अपने से दूर कर दिए ये समझ नहीं आया। एक समय में प्रदेश की राजनीति में मंत्री की तूती बोलती थी लेकिन आज पूछ परख कम हो गई है। एसे में उनके ईर्द-गिर्द वाले दूसरा सुरक्षित ठिकाना ढूंढ रहे हैं जहां से दो पैसे की आवक बनी रहे औऱ पुराना जलवा भी बरकरार रहे । क्योंकि अभी इनकी कोई नहीं सुन रहा है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि फेस बुक औऱ वाट्स एप एसा साधन हौ जिसके जरिए लोग अपनी भड़ास निकालते है और पब्लिक इन लोगों की नूरा कुश्ती का आनंद लेती है। देखा जा रहा है कि एक कद्दावर मंत्री के खास सिपहसालार इन दिनों सोशल मीडिया में छाए हुए हैं और घायलों की भांति दु:ख भरे पोस्ट किए जा रहे हैं। एैसे एक नेता नहीं कई नेता हैं जो शोसल मीडिया के माध्यम से अपना दिल का दर्द हल्का कर रहे हैं। सब समय -समय का खेल है। इन सबको देखते हुए शायर इकबाल आसिफ ने ठीक ही कहा है सर उठाती हुई मौजों से हवाओं ने कहा वक्त के साथ चलो उलझा न करो।
शाकाहारी इवेंट या मांसाहारी इवेंट...
राजधानी में इवेंट के नाम पर कई तरह के इवेंट आयोजित किये जा रहे हैं। शाकाहारी इवेंट के नाम पर मांसाहारी इवेंट हो रहा है। बड़े घरों के बिगड़े नवाबों की संलप्तिता ने सब गुड़ गोबर एक कर दिया है छोटे मोटे होते तो अभी तक तो मामला फिनिश भी हो गया होता। जनता में खुसुर फुसुर है कि इवेंट की दुनिया के बड़े बड़े मगरमच्छों को क्यों नहीं धर रहे हैं? राज्य बनने के बाद से छत्तीसगढ़ में इवेंट ऑर्गनाइजर्स की बाढ़ आ गई। इवेंट पहले भी होते थे लेकिन उनका दायरा छोटा होता था।उसके बाद तो रेव पार्टियों की बाढ़ आ गई है, पहले आसपास के बिगड़े नवाब ही शामिल होते थे अब पुरे देश के नवाब शामिल होकर पार्टी की शोभा बढ़ा रहे हैं। और तो और लोग बैंकाक, पटाया, थाईलैंड जाना छोड़ दिए हैं। उसकी एक वजह यह भी है कि बड़े तो बड़े छोटे छोटे चिरकुट टाइप के इवेंट ऑर्गनाइजर भी पार्टी में ’कंप्लीट अरेंजमेंट’का दावा करते है। कंपलीट के मायने इवेंट का लुत्फ़ उठाने वाले भलीभांति जानते हैं साथ ही आयोजक, प्रशासन और पुलिस भी अच्छी तरीके से जानती है। वैसे तो फार्म हॉउस लोग परिवार और मित्रो के लिए बनाता हैए लेकिन अब ट्रेंड चेंज हो गया है।
शहर के बाहरी हिस्सों में बने कुछ फॉर्म हाउस हमेशा गुलज़ार रहते है।सुनसान पड़े रहने वाले फॉर्म हाउस की रौनक बताती ही कि वहां रंगीनियां छाई है।वो फॉर्म हाउस वालो के लिए बिना टैक्स की आमदनी तो है ही,शहर के नरपशुओं के लिए सुरक्षित ऐशगाह भी बनी हुई है।जहाँ सुरा,सुंदरी और नशे के सभी प्रकार के सामान आसानी से उपलब्ध होते हैं। बच्चों के साथ बच्चियां भी अब इसका शिकार हो रही है। उन्हें फ्री एंट्री के नाम पर चारे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और उनके जाल में हॉस्टल में रहने बहन बेटियां भी फसती जा रही है,जो बाद में इवेंट के नाम पर नरपशुओं को पड़ोसी जाती है। सिलसिला कब तक चलेगा आधुनिकता के अंधी दौड़ में सब शामिल हो चुके हैं. कुछ हद तक पेरेंट्स भी जिम्मेदार हैं बच्चे तो हैं ही।
रंगदारी ही रंगदारी
त्योहारी सीजन में शहर में विज्ञापनों की भरमार रहती है जिसमें व्यापारी अपने सामान बेचने तरह तरह के स्लोगन दते हैं जैसे रिमोट ही रिमोट, पर्स ही पर्स, या और भी उसी तरह से अब शहर के नशेबाजों ने भी वाट्सप और अन्य ग्रुप में रंगदारी ही रंगदारी की जानकारी दे रहे हैं। युवा वर्ग नशे में इस कदर लिप्त होंगे है कि उसे यह समझ ही नहीं रहा की क्या गलत और क्या सही। युवा सिर्फ यही बोल रहे हैं कि भाई की जहां जरूरत हो एक कॉल में भाई उपलब्ध है ये भाई इस बात से अनभिज्ञ हैं कि उनके बाप छत्तीसगढ़ पुलिस की नजर उन पर है। जनता में खुसुर फुसुर है कि अब छत्तीसगढ़ पुलिस भी चुस्त दुरुस्त होने वाली है यानी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने वाली है। अच्छी बात है बस ऐसा न हो कि पुराने को रंग रोगन करके फिर से जनता के सामने खड़ा कर दिया जाए। वर्ना ये तो ऐसा होगा जैसे कौंवे का नाम बाज रख दिए। वैसे भी जनता देख ही रही है की तोमर बंधुओं के खिलाफ धड़ाधड़ एफआईआर कर बाज बनने वाले टीआई को फिर से कौंवा बना दिया गया।
स्कूल शिक्षा विभाग का गजब कारनामा...
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग का गजब कारनामा सामने आया है। प्रदेश में संचालित पूर्व-प्राथमिक स्कूलों (प्ले स्कूल, किड स्कूल) की जानकारी लोक शिक्षण संचालनालय के पास उपलब्ध नहीं है। कितने स्कूल संचालित हैं, यह भी प्रशासन के पास नहीं है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी संयुक्त संचालकों को पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि महाधिवक्ता कार्यालय, बिलासपुर से क्कढ्ढरु के निर्देशानुसार, ऐसे स्कूलों की जानकारी तीन दिन के भीतर साफ्ट और हार्ड कॉपी दोनों रूप में संलग्न प्रपत्र में उपलब्ध करायें। जानकारी संकुल समन्वयको के माध्यम से संकलित किया जाना है जिससे ऐसी छोटी से छोटी शालाओं की जानकारी प्राप्त हो सके। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सिर जी आप सिर फोड़ लीिजए पर कोई जानकारी नहीं मिल सकती है। पता है ये स्कूल शिक्षा विभाग है जो मंत्रियों का पढ़ाता है तो संचालनालय को तो ट्यूशन तो करा ही सकता है। लोक शिक्षण संचालनालय तो पूरी तरह मंत्री के निजी स्टाफ की तरह काम कर रहा है। उसे शिक्षा और अपनी नैतिक जिम्मेदारी से कोई मतलब नहीं है वो तो सिर्फ ट्रांसफर औऱ पोस्टिंग पर ध्यान देता है। स्कूलों की संख्या ध्यान नहीं देता। वो तो मंत्री के स्टाफ में अटैचमेंट के लिए ध्यान मग्न रहते है। ताकि मास्टरी के साथ नेतागिरी भी चलती रहे ।
अब हवाई करतब की बारी ...
छत्तीसगढ़ की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाले राज्योत्सव में इस बार भारतीय वायु सेना का भव्य शौर्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा। राज्योत्सव की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विमानन विभाग और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने आयोजन से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा की। अपर मुख्य सचिव साहू ने अधिकारियों को वायु सेना के शौर्य प्रदर्शन की तैयारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए और सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्यान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव का यह आयोजन छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक वैभव को प्रदर्शित करने के साथ-साथ सुरक्षा और तकनीकी सटीकता के उच्च मानकों पर भी खरा उतरना चाहिए। जनता में खुसुर-फुसुर है कि भूपेश सरकार में जमीनी करबत दिखाने वाले सारे जादूगर अब विष्णुदेव सरकार में हवा हवाई करतब दिखाने वाले है। जनता भी जानती है कि सरकार खुद चलती है या अधिकारी चलाते है इसका एक लाइन का जवाब हो सकता है कि सरकार को खुश करने के लिए क्या क्या जतन करना पड़ता तब जाकर हवाई करतब का आनंद लिया जा सकता है।
भ्रषटाचार नहीं शिष्टाचार बोलो..
समाचारों में रोजाना भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ते औऱ सुनते हैै कि भ्रष्टाचार हर विभाग में सिर चढ़ कर बोल रहा है। बोले भी क्य़ों नहीं क्य़ोंकि भ्रष्टाचार में भी शिष्टाचार बरता जा रहा है। भ्रष्टाचारी एक कहावत को चरितार्थ कर रहे है कद्दू कटेगा तो सब में बंटेगा । उसी सिस्टम को फालो करते हुए ऊपर से नीचे तक सबको हिस्सा दिया जा रहा है एैसे में भ्रष्टाचार को शिष्टाचार ही बोला जाएगा। लेकिन यहां भ्रष्टाचार शिष्टाचार नहीं बन पाया छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग स्कैम मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो /श्वह्रङ्ख ने दीपेन चावड़ा को गिरफ्तार किया है। दीपेन चावड़ा जेल में बंद कारोबारी अनवर ढेबर का सहयोगी है और वह श्वह्रङ्ख में दर्ज अन्य मामलों में लगभग 2,000 करोड़ रुपए से अधिक अवैध धनराशि का प्रबंधक रहा है। कस्टम मिलिंग स्कैम में दीपेन चावड़ा के द्वारा लगभग 20 करोड़ रुपये लोकसेवकों की ओर से एकत्र करने के साक्ष्य मिले हैं। यह मामला फरवरी 2025 में तत्कालीन प्रबंध संचालक मनोज सोनी और रोशन चंद्राकर के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किए जाने के बाद सामने आया था। इस प्रकरण में अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के खिलाफ भी विवेचना जारी है। श्वह्रङ्ख की टीम ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद दीपेन चावड़ा से केस से संबंधित कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ में एसे कई बड़े स्वनाम धन्य नेता और अधिकारी है जो हर सरकार में लीड रोल निभाते है। जो फर्जी तरीके से पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता बनकर सरकारी मटकी से माखन चोरी कर कन्हेया होने का दावा करते है।





