लीपापोती कर छिपा रहा सिस्टम, विभाग और जेल प्रशासन को बदनाम करने की साजिश

जनता से रिश्ता की खबर पर प्रशासन ने लिया संज्ञान
सेंट्रल जेल में वीवीआईपी सुविधा चाहिए तो बस नजराना पेश करते रहे
हम अंग्रेज जमाने के जेलर नहीं, आगे इधर वीडियो बनाओ, आधे उधर ...
जेल में कैदी औऱ जेलर एक दूसरे के हमदर्द बनाकर मनवा रहे पिकनिक
सरकार औऱ जेल प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने वाला सहायक जेलर सस्पेंड
कांग्रेसी विचारधारा के अधिकारी सरकार और शासन को बदनाम करने की साजिश तो नहीं कर रहे...
रायपुर (जसेरि)। जेल का नाम सुनते ही सामान्य नागिरक के पसीने छुटने लगते है, रायपुर जेल अंग्रेज जमाने में सबसे सख्त जेल के रूप में विख्यात था, जहां बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को जेल में रखा जाता था, नगर समय के साथ सब कुछ परिवर्तित हो गया.। जेल को अपराधियों को सुधारने के भेजा जाता था, अब रायपुर जेल अपराधियों का पिकनिक गृह हो गया है. जब अपराधी शहर में ऊब जाते है तो कोई न कोई अपराध को अंजाम देकर जेल चले जाते है औऱ वहां जाकर राजसी ठाट का लुत्फ उठाते है। जेल के अधिकारी से लेकर जेलर तक अपराधियों को सुख सुविधा मुहैया कराते है। जिसके फल स्वरूप बीते दिनों एक वीडियों वारयल हुआ जिसमें जेल की पोल कर रख दी। जेल के अधिकारी ने लीपापोती कर कैदियों को अपने फायदे के लिए तरह -तरह सुविधा मुहैया कराते है।
जेल में मोबाइल कौन चला रहा है और जेल में कैदियों के पास मोबाइल कैसे पहुँचा, मोबाइल अभी तक ज़ब्ती क्यों नहीं हुआ, इसके पीछे भी भ्रष्टाचर की कहानी है। सरकार को चाहिए कि जेल के सिस्टम को आमूलचूल परिवर्तन की ज़रूरत है,बड़े अधिकारी अपनी गलतियों को छुपाने का भरपूर प्रयास कर रहे है। लेकिन सिस्टम जो बना हुआ है जेल का उससे अनजान कोई भी नहीं है। जेल के सिस्टम के उपयोगकर्ता कैदियों के पास है जो अपनी धनबल औऱ रसूख के जरिए मोबाइल फ़ोन का उपयोग कर रहे औऱ कैदियों को रिचार्ज करने से लेकर मोबाइल का उपयोग करने की सुविधा कौन उपलब्ध करा रहा है । सिस्टम को ट्रैक करना होगा तभी पता चलेगा की जेल में कितने मोबाइल काम करते है और कितने सिम जेल में अभी उपलब्ध है इसकी जाँच गहराई से होना बहुत ज़रूरी है । सरकार औऱ प्रशासन को जेल के प्रत्येक सिस्टम को समझने हेतु आजीवन सजा काटने हुए क़ैदी या 4 साल से अधिक जेल में रह चुके क़ैदी से ही वार्तालाप करने पर सम्पूर्ण जेल की व्यवस्था और सिस्टम के बारे में ख़ुलासा हो सकता है और यही ख़ुलासा जेल से छूटे क़ैदी और जेल से ज़मानत पर आए क़ैदी अपना नाम नहीं छापने की शर्त गए जनता से रिश्ता के संवाददाता को बताय़ा कि जेल के अंदर दवाई और हर प्रकार शराब से लेकर महँगे सामान और महंगे गैजेट्स आसानी से पहुँचाए जाते हैं न सिर्फ़ आपको उसके सिस्टम पर पेमेंट करना होता है । डेली का सट्टा खुलेआम जेल में चारों टाइम ओपन क्लॉज़ चलता है । जेल का सट्टा विगत 50 साल से चल रहा है जो आज तक कोई बंद नहीं करा पाया । ताज्जुब की बात तो ये सट्टे की जानकारी बड़े से बड़े को अधिकारी होने के बावजूद आज तक इस गंभीर विषय नहीं माना गया । सवाल अब ये उठता है कि है जेल के इस भ्रष्ट सिस्टम को किस तरीक़े से ख़त्म किया जाए या क़ैदी की सुविधाओं के लिए इसको परमानेंट क़ानून बना दिया जाए।
मामला क्या था... हिस्ट्रीशीटर राजा बैजड़ का वीडियो वायरल, राजधानी में मचा हडक़ंप
राजधानी की सेंट्रल जेल एक बार फिर सुर्खियों में है। रायपुर सेंट्रल जेल की बैरक नंबर-15 से सामने आए एक नए वीडियो ने पूरे जेल तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वीडियो न केवल जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण बन गया है कि जेल के भीतर अपराधियों का दबदबा और नेटवर्क किस हद तक सक्रिय है। रायपुर सेंट्रल जेल से सामने आया यह वीडियो छत्तीसगढ़ के जेल प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है वैसे भी सेंट्रल जेल पूरे रायपुर में चर्चा का विषय और चर्चित है कि रायपुर सेंट्रल जेल में पैसा दो तो सारी सुविधा उपलब्ध है सिर्फ़ इस बात के लिए ही सेंट्रल जेल रायपुर का हमेशा देश में सुर्खय़िों में नाम आता है। सेंट्रल जेल में पैसा देने से लडक़ी छोड़ सभी प्रकार की सुविधा जेल प्रशासन उपलब्ध कराता है। इसका पुख्ता प्रमाण समय-समय पर क़ैदी जेल से सजा काटकर बाहर निकलते हैं। मीडिया में खुलास करते हैं।
कुणाल शुक्ला के सोशल मीडिया वाल से
एक भूतपूर्व कैदी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया—भाईसाहब, ये रायपुर सेंट्रल जेल नहीं, रायपुर सेंट्रल रिसॉर्ट है!
यहाँ कैदी नहीं, मानो मेहमान ठहरते हैं, बस फर्क इतना है कि चेक-इन पुलिस कराती है और चेक-आउट अदालत तय करती है।
कहते हैं, यहाँ पैसे से क्या नहीं खरीदा जा सकता—बस आज़ादी छोडक़र सब कुछ रेट लिस्ट में उपलब्ध है। जेल की यह काली कमाई ऊपर से नीचे तक ऐसे बहती है जैसे गंगा हर घाट तक पहुँचती है।
कैदियों में सबसे अधिक माँग छोटी गोल नाम की बैरक की है, जिसे बड़े प्यार से नई जेल या कहिए पाँच सितारा सूइट कहा जाता है। यहाँ ठहरने की फीस किसी होटल से कम नहीं—पचास हज़ार से लेकर पाँच लाख रुपये प्रतिमाह तक, बस आपकी जेब और जुर्म का साइज बताना मत भूलिएगा।
बोर हो रहे हैं?शाम के पार्टी करना है? तो सिपाही थर्मस या मिल्टन की बोतल में ठंडी शराब पहुँचा देंगे—बिलकुल वही ब्रांड जो आप जेल के बाहर पीते थे, और ब्रांड का स्टीकर जेब से निकाल कर बाकायदा दिखा भी देंगे—सर, यही वाला! जाहिर है यही वाले ब्रांड की क़ीमत देनी पड़ेगी।
गांजे की चाह है? पाँच सौ से हज़ार रुपये में पुडिय़ा तैयार। गुटखा चाहिए? तो एक पाउच सौ से पाँच सौ तक। सिगरेट? हज़ार से दो हज़ार में डील फाइनल। माल की डिलीवरी टेनिस बॉल या फुटबॉल में होती है—बस दीवार के उस पार से बॉल और फुटबॉल को फेंक कर डिलेवरी जेल के अंदर आती है और रसूखदार क़ैदी के पास पहुँच जाती है। ज़ाहिर है, ये सब बिना पहरेदारों की सेटिंग के तो ऊपर वाला भी नहीं करा सकता है।
जेल में जैमर? वो तो बस जनता के लिए जुमला है। वीआईपी बैरक में बैठे कैदियों के पास स्मार्टफोन हैं—हर महीने 25 हज़ार रुपये किराया देकर कनेक्टेड रहने की सुविधा। तभी तो जेल से ही जिम करते वीडियो वायरल हो रहे हैं इसका खुलासा खोजी पत्रकार मुकेश एस सिंह ने हाल ही में किया था।
जेल में फोन चार्जिंग का सिस्टम भी जुगाड़ू—टीवी के स्वीच में मोबाइल चार्जर लगा दो, और लो नेटफ्लिक्स जेल एडिशन चालू।
थोड़े गरीब कैदियों के लिए भी ऑफऱ है—फोन कार्ड प्लान। बस दो से पाँच हज़ार रुपये दीजिए, और हफ़्ते में पाँच मिनट का कॉल टाइम पक्की डील। क्या पता, जेल के टावर से कॉल करके कोई बोले—भैया, नेटवर्क जेल में थोड़ा कम आता है! कुल मिलाकर, रायपुर सेंट्रल जेल अब सज़ा की नहीं, सुविधा की सेंट्रल जेल बन चुकी है—जहाँ हर गुनाह की प्रिमियम मेंबरशिप उपलब्ध है।





