
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में चुनाव संपन्न हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और परिषदों का गठन भी हो चुका है, लेकिन एल्डरमैनों की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। इस कारण एल्डरमैन बनने की उम्मीद लगाए बैठे भाजपा कार्यकर्ताओं को फिलहाल केवल आश्वासन ही मिल रहा है। सभी की निगाहें अब राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं।
राज्य शासन आमतौर पर कैबिनेट के निर्णय के बाद नगरीय प्रशासन विभाग के माध्यम से एल्डरमैनों की नियुक्ति से संबंधित आदेश जारी करता है। चूंकि, यह नियुक्ति अक्सर राजनीतिक प्रकृति की होती है, इसलिए इसे लेकर कार्यकर्ताओं के बीच उत्सुकता बनी रहती है। छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा-9 के तहत नगरीय निकायों में एल्डरमैन और दिव्यांग मनोनीत सदस्य नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। नियमानुसार नगर निगमों में आठ, नगर पालिकाओं में पांच और नगर पंचायतों में तीन एल्डरमैन नियुक्त किए जाते हैं।
हालांकि, यदि किसी निकाय में वार्डों की संख्या अधिक होती है, तो एल्डरमैनों की संख्या बढ़ाने का भी प्रावधान है। इन नियुक्तियों के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों को परिषद में शामिल किया जाता है, जो शहर के विकास और प्रशासन से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव दे सकें।





