छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी मनोज अग्रवाल की परिवीक्षा पर रिहाई का आदेश जारी

Shantanu Roy
21 Jan 2026 11:11 PM IST
हाईकोर्ट ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी मनोज अग्रवाल की परिवीक्षा पर रिहाई का आदेश जारी
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Bilaspur. बिलासपुर। दोहरे हत्याकांड के आरोपी मनोज अग्रवाल की परिवीक्षा पर रिहाई को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अंडर सिकरेट्री जेल के 01 मई 2025 के आदेश को रद्द करते हुए मनोज अग्रवाल को रिहा करने का आदेश दिया। मनोज अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में परिवीक्षा पर रिहाई के लिए याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि 30 अप्रैल 2012 को बिलासपुर के सत्र न्यायालय द्वारा उन्हें
आईपीसी
की धारा 147, 148, 302, 302/149 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 व 27 के तहत दोषी ठहराया गया था। आरोपी ने 09 जून 2010 से 02 अप्रैल 2016, 18 अप्रैल 2016 से 02 जुलाई 2020 और 31 जनवरी 2021 से 05 मार्च 2021 तक जेल में समय बिताया और वर्तमान में 16 मार्च 2021 से जेल में है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि परिवीक्षा पर रिहाई आवेदन केवल कारावास अपराधों के आधार पर खारिज किया गया, जबकि वर्ष 2018 के बाद आरोपी के खिलाफ कोई कारावास अपराध दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि पुराने कारावास अपराधों को आधार मानकर रिहाई का आवेदन अस्वीकार करना उचित नहीं। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय ने अंडर सिकरेट्री जेल के आदेश का समर्थन किया। राज्य परिवीक्षा बोर्ड ने 15 अप्रैल 2025 को आयोजित बैठक में याचिकाकर्ता के मामले की समीक्षा की। बोर्ड ने पाया कि मनोज अग्रवाल ने गैरकानूनी गैंग बनाकर अवैध हथियार से दो व्यक्तियों की हत्या की और जेल में रहते हुए तीन बार नियमों का उल्लंघन किया। जेल अधीक्षक द्वारा अर्जित कारावास छूट भी जब्त की जा चुकी थी। बोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता का व्यवहार जेल में भी अच्छा नहीं था। इसके बावजूद हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की परिवीक्षा अस्वीकार करने का कोई वैध कारण नहीं है। वर्ष 2018 के बाद कोई कारावास अपराध दर्ज नहीं होने के कारण पुराने अपराध आधार नहीं बन सकते। कोर्ट ने यह भी ध्यान रखा कि याचिकाकर्ता ने 14 वर्ष और 8 महीने की सजा पूरी कर ली है और 4 फरवरी 2025 तक 3 वर्ष 5 महीने 25 दिन की छूट मिल चुकी है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अंडर सिकरेट्री जेल का 01 मई 2025 का आदेश विधि की दृष्टि से मान्य नहीं है और इसे रद्द किया जाता है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि, शर्तों और प्रावधानों के तहत, छत्तीसगढ़ कैदी परिवीक्षा रिहाई अधिनियम, 1954 के अंतर्गत रिहा किया जाए। फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा किए गए अपराध की गंभीरता के साथ-साथ उसने कारावास की पूरी अवधि काट ली है और भविष्य में अपराध की संभावना का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। वहीं, बिलासपुर शहर के पुलिस, स्टेशन हाउस अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश भी याचिकाकर्ता के पक्ष में मिली थी। इस प्रकार, डिवीजन बेंच ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए मनोज अग्रवाल की रिहाई को वैधानिक रूप से सुनिश्चित किया।
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