भ्रष्ट अधिकारियों का कारनामा : देश में छत्तीसगढ़ एकमात्र राज्य है फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र कुछ हजार में बेचे जा रहे

छत्तीसगढ़ में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह सक्रिय
राज्य के कोटे से सुरक्षा बलों में नौकरी कर रहे दूसरे राज्य के युवा, स्थानीय युवाओं का हक मार रहे लालची अधिकारी-कर्मचारी
रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ में फर्जी निवास-जाति प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह सक्रिय हैं। पिछले दिनों CRPF में भर्ती होने वाले जवान की गिरफ्तारी के बाद इसका खुलासा हुआ है। पुलिस ने फेक सर्टिफिकेट बनाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह फर्जी निवास प्रमाणपत्र बलरामपुर तहसील से जारी किया गया था। इस मामले में पहले ही बलरामपुर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज है। आरोपी एक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए हर व्यक्ति 3 से 4 लाख रुपए लेता था। जांच में आरोपी ने करीब 20 से 25 फर्जी निवास प्रमाणपत्र बनवाने की बात स्वीकार की है। CRPF भर्ती में छत्तीसगढ़ का कटऑफ बाकी राज्यों की तुलना में कम होता है। इस कारण दूसरे राज्यों के लोग यहां से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर भर्ती हो गए। राजनांदगांव के डोंगरगढ़ तहसील कार्यालय से करीब 20 से 25 फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाए गए हैं, जिनमें से कई लोग सशस्त्र बलों में भी भर्ती हो चुके हैं। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
छत्तीसगढ़ के युवाओं का हक मार रहे फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वालों में राजस्व व अन्य विभागों में कार्यरत शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों के संलिप्त हैं। ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों की पहचान कर उन्हें बर्खास्त किया किया जाना चाहिए इनके कृत्यों के चलते छग के युवाओं को रोजगार से वंचित होना पड़ रहा है। दूसरे राज्यों के युवा अपने रिश्तेदारों व राजनीतिक पहुंच के दम पर सांठगांठ कर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर छग के कोटे से सुरक्षा बलों में नौकरी हासिल कर रहे हैं और राज्य के युवा छले जा रहे हैं। सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। सरगुजा जिले में तहसीलदार से छोटे स्तर के अधिकारी कुछ रूपयों के लालच मे फज़़ी प्रमाण पत्र बनाने में लगे हुए है। पूरे प्रदेश में फर्जी प्रमाण पत्र, निवास पत्र, आधार कार्ड बड़े पैमाने पर बनाए जा रहे हैं जिससे छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को आगे चलकर बड़ी परेशानियों को सामना करना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ के बेरोजग़ार युवाओं का हक मारा जा रहा है सभी शासकीय नौकरियों में बाहर से व अन्य प्रांत के बेरोजग़ार युवक छत्तीसगढ़ के मूल निवासी फज़ऱ्ी प्रमाण पत्र बनाकर स्थानीय बेरोजगारों का हक मारकर नौकरी हथिया रहे है। जबकि केंद्र सरकार और राज्य सरकार छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अलग-अलग विभागों में और सुरक्षा बलों में छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए नई भर्तियां शुरु की है। लेकिन छत्तीसगढ़ के भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारियों के कारण छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवाओं का हक मारकर अन्य प्रदेशों के युवाओं की भर्ती प्रमाणपत्र-निवास प्रमाणपत्र, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज कुछ पैसे लेकर फर्जी बनाकर किया जा रहा है। जिसका पुख्ता प्रमाण विगत दो-तीन सालों में हुई नई भर्तीयों में फर्जी दस्तावेज के मामले सामने आने से मिला है। छत्तीसगढ़ के कोटे पर नौकरी पाने वाले यूपी, बिहार, ओडिशा, झारखंड और बंगाल से ही आए हुए बेरोजगार युवक है जिन्हें फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी मिली हुई है। |
अब तक 4 आरोपी किए गए गिरफ्तार
जानकारी के अनुसार, 204 कोबरा बटालियन सीआरपीएफ जगदलपुर में पदस्थ कॉन्स्टेबल सुमित सिंह का निवास प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया है। सुमित सिंह राजस्थान के धौलपुर जिले के मनिया गांव का रहने वाला है। सुमित ने छत्तीसगढ़ राज्य कोटे का गलत तरीके से लाभ लेकर साल 2023 में एसएससी के जरिए सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। जांच में खुलासा हुआ कि सुमित सिंह का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बलरामपुर तहसील से जारी किया गया था। यह प्रमाण पत्र ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से बनवाया गया था। बलरामपुर तहसीलदार सुनील कुमार गुप्ता ने 28 अप्रैल 2026 को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि सीआरपीएफ कॉन्स्टेबल सुमित सिंह का निवास प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनाया गया है। यह प्रमाण पत्र विशाल सोनी के शैक्षणिक और अन्य दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर तैयार किया गया था। पुलिस ने सुमित सिंह और अन्य के खिलाफ धारा 318(2), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2) बीएनएस और 66(सी), 66(डी) आईटी एक्ट का अपराध दर्ज किया था। सुमित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच में पता चला कि फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाने का मुख्य आरोपी विवेक सिंह तोमर (24) है, जो मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के अंबा का रहने वाला है।
इसके बाद पुलिस ने विवेक सिंह तोमर (24) और उसके साथी आकाश सिंह (22) निवासी मुरैना को रायपुर से हिरासत में ले लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि विवेक सिंह तोमर ने डोंगरगढ़ से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण पत्र भी बनवाया था। वहीं आकाश सिंह ने अपना नाम बदलकर तुकेश्वर (पिता भोजराम, निवासी पुलिस लाइन के पीछे, बलरामपुर) के नाम से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बनवा लिए थे। तहसील कार्यालय में ऑनलाइन एप्लीकेशन जमाकर अवैध तरीके से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाने वाले आरोपी ओमप्रकाश चंद्रवंशी (28) निवासी राजनांदगांव को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
3 से 4 लाख रुपए में फर्जी प्रमाणपत्र
पुलिस जांच में पता चला कि, विवेक सिंह तोमर छत्तीसगढ़ के बाहर रहने वाले लोगों को राज्य का निवासी प्रमाण पत्र दिलाने का काम अपने साथियों से करवाता था। उसके साथी ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर लोगों के दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर ऑनलाइन आवेदन जमा करते थे। मास्टरमाइंड आरोपी विवेक सिंह तोमर ने एक-एक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रति व्यक्ति 3 से 4 लाख रुपए लिए थे। सीआरपीएफ भर्ती में छत्तीसगढ़ का कटऑफ अन्य राज्यों की तुलना में कम होने के कारण दूसरे राज्यों के लोग यहां से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर भर्ती हो गए।
सूरजपुर में भी मामले सामने आए थे
दो साल पहले सूरजपुर जिले के रामानुजनगर अनुविभाग क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नारायणपुर निवासी लालूउद्दीन पिता नवाब अली अंसारी ने अपने 4 पुत्रों अहमद रजा अंसारी, अंजुम परवीन, जमाल रजा अंसारी, जावेद रजा अंसारी के देवनगर उप तहसील से फर्जी दस्तावेजों से अस्थाई जाति प्रमाण पत्र हासिल कर लिया था. मामले की पोल तब खुली जब ग्रामीणों ने मौखिक रूप से इसकी शिकायत एसडीएम से की. शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई. जांच में पाया गया कि आरोपी लालुउद्दीन के द्वारा दाखिल खारिज पंजी के प्रतिलिपी पर कूटरचित कर मुसलमान के स्थान पर मोमिन जुलाहा लिखकर आवेदन सहित अन्य दस्तावेज संलग्न किया, जिसे नायब तहसीलदार उपतहसील देवनगर द्वारा अस्थाई जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया।
आरोपी के जाति प्रमाणपत्र निरस्त
तत्पश्चात स्थाई जाति प्रमाण पत्र के लिए एसडीएम रामानुजनगर में आवेदन किया और वहां भी स्थाई पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण पत्र हासिल कर लिया। जिसमें एसडीएम अजय मोडिय़म ने जांच कराई। जांच में पाया गया कि आरोपी लालुद्दीन के द्वारा दाखिल खारिज के सत्यापित प्रतिलिपि में छेड़छाड़ कूट रचित कर दस्तावेज में संलग्न किया। जांच के बाद आरोपी के जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए हैं। लेकिन आरोपी के खिलाफ अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है. जिससे अधिकारियों पर भी कार्य में संलिप्त होने का संदेह हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने द्वारा एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा पैसे की लेनदेन कर प्रमाण पत्र प्राप्त किया है।
सांठगांठ से जारी हुए थे प्रमाण पत्र
इस पूरे मामले में पहले तो देवनगर उपतहसील से अस्थाई जाति प्रमाण पत्र और बाद में अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय रामानुजनगर से स्थाई जाति प्रमाण पत्र जारी हुए हैं। लोगों ने यह आरोप लगाया है कि एक संगठित गिरोह आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र के लिए इन कार्यालयों में सक्रिय है और इनमें राजस्व अमले के कुछ कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध है. बहरहाल सांठगांठ से जारी हुए इन प्रमाण पत्रों से प्रशासन की भी नींदे उड़ गई है. कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि बड़ी तादाद में ऐसे प्रमाण पत्रों के और भी प्रकरण जांच में सामने आएंगे।
छत्तीसगढ़ के युवाओं का हक मार रहे
फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वालों में राजस्व व अन्य विभागों में कार्यरत शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों के संलिप्त हैं। ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों की पहचान कर उन्हें बर्खास्त किया किया जाना चाहिए इनके कृत्यों के चलते छग के युवाओं को रोजगार से वंचित होना पड़ रहा है। दूसरे राज्यों के युवा अपने रिश्तेदारों व राजनीतिक पहुंच के दम पर सांठगांठ कर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर छग के कोटे से सुरक्षा बलों में नौकरी हासिल कर रहे हैं और राज्य के युवा छले जा रहे हैं। सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
-सरगुजा जिले में तहसीलदार से छोटे स्तर के अधिकारी कुछ रूपयों के लालच मे फज़़ी प्रमाण पत्र बनाने में लगे हुए है। पूरे प्रदेश में फर्जी प्रमाण पत्र, निवास पत्र, आधार कार्ड बड़े पैमाने पर बनाए जा रहे हैं जिससे छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को आगे चलकर बड़ी परेशानियों को सामना करना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ के बेरोजग़ार युवाओं का हक मारा जा रहा है सभी शासकीय नौकरियों में बाहर से व अन्य प्रांत के बेरोजग़ार युवक छत्तीसगढ़ के मूल निवासी फज़ऱ्ी प्रमाण पत्र बनाकर स्थानीय बेरोजगारों का हक मारकर नौकरी हथिया रहे है। जबकि केंद्र सरकार और राज्य सरकार छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अलग-अलग विभागों में और सुरक्षा बलों में छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए नई भर्तियां शुरु की है। लेकिन छत्तीसगढ़ के भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारियों के कारण छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवाओं का हक मारकर अन्य प्रदेशों के युवाओं की भर्ती प्रमाणपत्र-निवास प्रमाणपत्र, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज कुछ पैसे लेकर फर्जी बनाकर किया जा रहा है। जिसका पुख्ता प्रमाण विगत दो-तीन सालों में हुई नई भर्तीयों में फर्जी दस्तावेज के मामले सामने आने से मिला है। छत्तीसगढ़ के कोटे पर नौकरी पाने वाले यूपी, बिहार, ओडिशा, झारखंड और बंगाल से ही आए हुए बेरोजगार युवक है जिन्हें फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी मिली हुई है।





