कार्टून युद्ध !! भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई बंदर और कुत्ते तक आई!

रायपुर। कांग्रेस द्वारा लगातार भाजपा नेताओं के खिलाफ की जा रही भद्दी बयानबाजी पर अब ‘जैसा का तैसा’ जवाब देने का फैसला भाजपा ने भी कर लिया है, ऐसा लगता है। कांग्रेस द्वारा इन दिनों लगातार असंसदीय शब्दों और भद्दे कार्टूनों का सहारा लेकर भाजपा नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसा करते हुए कांग्रेस अपने नेता राहुल गांधी की तरह ही किसी भी तरह की मर्यादा का ध्यान नहीं रखती है। कांग्रेस को शायद अभी तक यह भी लगता रहा है कि ‘पार्टी विथ डिफरेंस’ की छवि के कारण भाजपा उस भाषा में उसे जवाब नहीं दे सकती थी। पर अब ऐसा लगता है कि भाजपा भी अपनी उस छवि से आगे निकलने को तत्पर हो गई है। हालिया कार्टून विवाद इसकी तस्दीक करते हैं।
कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के लिए लगातार अपमानजनक टिप्पणियों की कड़ी में हाल में पहले तो कांग्रेस ने उन्हें सैयारा फ़िल्म की तर्ज पर अदानी के साथ चित्रित किया, तब भी भाजपा ने संयत प्रतिक्रिया ही दी। उसके बाद तो तमाम मर्यादाओं को धत्ता बताते हुए, इस बार मुख्यमंत्री को एक बंदर के रूप में कांग्रेस ने चित्रित किया। ऐतिहासिक बहुमत से चुनी गई पार्टी के नेता, एक सहज-सरल आदिवासी मुख्यमंत्री का ऐसा अपमान इस बार भाजपा को सहन नहीं हुआ। इस बार भाजपा की सहिष्णुता भी जवाब दे गई और उसने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कुत्ता दिखाते हुए, उन्हें राहुल गांधी का चरण चाटने वाला दिखा दिया। बगल में एक तस्वीर और लगायी गई, जिसे सौम्या चौरसिया बताया जा रहा है।इन दोनों कार्टून पर समाज में भी काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ तटस्थ समझे जाने वाले लोगों ने भी इसकी आलोचना की है। इस संबंध में नाम नहीं छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा - हमारे सहज सरल आदिवासी नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री को इतना अपमानजनक चित्रित किया जाना जिन लोगों को बुरा नहीं लगा, वे अब भूपेश बघेलजी का कार्टून बनाए जाने पर घड़ियाली आसूँ बहा रहे हैं। आखिर मुख्यमंत्री का अपराध क्या है? वे आदिवासी समाज से आते हैं तो क्या आप कुछ भी कह देंगे? अब ऐसी बदजुबानी सहन नहीं की जाएगी।
पार्टी विथ डिफरेंस का नारा याद दिलाने पर उक्त भाजपा नेता ने कहा कि निस्संदेह हम अलग तरह की पार्टी हैं और रहेंगे। लेकिन गाली खाने के लिए नहीं। हम सुशासन और पारदर्शिता आदि के मामले में अलग दल हैं और रहेंगे। किंतु यह नयी तरह की, नए दौर की भाजपा है। यह नई भाजपा, पाकिस्तान को उसके घर में घुस कर मारना भी जानती है। नक्सलियों को उसकी मांद में घुस कर ‘न्यूट्रलाइज’ करना भी जानती है। वह शब्द से माओवाद फैलाने वालों से भी उन्हीं की भाषा में निपटना अब शुरू कर चुकी है। ‘फाइट गुरिल्ला लाइक ए गुरिल्ला!’ गालीबाज गुरिल्लों की भद्दी बोली का जवाब वैसी ही बोलियों से, गोली वाले गुरिल्लों के गोली का जवाब गोली से, अब यही भाजपा की नीति है। चुनाव के समय दिए अपने नारे की तर्ज पर भाजपा नेता ने कहा - “अऊ नइ सहिबो, पलटवार करिबो “। बहरहाल। कांग्रेस और उसके ईको सिस्टम के लोग ऐसे पलटवार की उम्मीद नहीं कर रहे थे। उनके खेमे में सन्नाटा है और अब वे विक्टिम कार्ड खेल कर बचाव की मुद्रा में हैं। देखना होगा कि भाजपा और कांग्रेस का यह नया वाकयुद्ध आगे क्या गुल खिलाता है।





