
अगर सच्चाई के साथ जांच को अंजाम दिया गया तो, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के काले-कारनामों के कई राज खुलेंगे
भगोड़ा, भ्रष्टाचारी नेता को बचाने बड़ी लॉबी मैदान में, नाटक का अंत तुरंत होगा
रामगोपाल के डायरी के पन्नों का राज परत-दर-परत खोलेगा कौन?
10 जनपथ, राहुल-प्रियंका, पवन बंसल और बड़े नेताओं से लेनदेन के पन्ने खोलेंगे राज
कांग्रेस सरकार के प्रतिमाह के लेनदेन का संपूर्ण ब्यौरे का डायरी के पन्नों में उल्लेख
भगोड़ा,भ्रष्टाचारी रामगोपाल से बगैर संरक्षण सख्ती से पूछताछ पर और भी खुलासे होंगे, मुमकिन है भूपेश सहित सोनिया-राहुल-प्रियंका शराब घोटाले में हिस्सेदार साबित होंगे, डायरी में प्रतिमाह सभी को भ्रष्टाचार का पैसा देना अंकित है...
रायपुर (जसेरि)। ईओडब्ल्यू ने शराब और कोल घोटाले में तीन वर्ष से फरार चल रहे कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को हिरासत में लेने का अधिकृत बयान जारी किया है। इससे पहले ईओडब्ल्यू की टीम की बेटे वैभव अग्रवाल से दो दिन की पूछताछ के बीच कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल ने मु यालय पहुंच कर सरेंडर की खबरें आ रही थीं। ईओडब्ल्यू ने कोल लेवी वसूली के मामलों में पूछताछ कर रही है। इससे पहले पुत्र वैभव अग्रवाल से बुधवार को दूसरे दिन भी पूछताछ की । मंगलवार को भी उससे करीब 8 घंटे पूछताछ हुई।
दिन भर की पूछताछ के बाद उसे रात घर जाने दिया गया और आज पुन: तलब किया गया। रामगोपाल कई घोटाले में आरोपी है। इनमें मु य तीन हजार करोड़ के शराब और 450 करोड़ का कोल लेवी वसूली और 127 करोड़ के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन, डीएमएफ घोटाला प्रमुख है। इन सभी की पहले या बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ईडी ने भी पड़ताल में कई नामचीन लोगों को गिर तार और करोड़ों की संपत्ति सीज़ अटैच कर चुकी है। वह पिछले तीन साल से गायब हैं। ईडी, ईओडब्ल्यू के कई समन के बाद भी पूछताछ के लिए नहीं आ रहा। जबकि उनके पीसीसी द तर के करीबी कर्मी गिर तार हो चुके हैं। अग्रवाल के कभी देश में कभी दुबई में होने की खबरें थीं।
रामगोपाल अग्रवाल लगभग पिछले एक दशक से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष पद पर काबिज रहे । वर्ष 2018 में जब कांग्रेस की सरकार बनी और भूपेश बघेल मु यमंत्री बने, तो रामगोपाल अग्रवाल का कद और बढ़ गया। कांग्रेस संगठन में कोषाध्यक्ष पद पर बने रहते हुए भूपेश बघेल ने इन्हें नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष भी नियुक्त किया। इन्हीं के कार्यकाल में राइस मिलरों को फायदा पहुँचाने के लिए कस्टम मिलिंग के लिए प्रोत्साहन राशि 40 से बढ़ाकर 120 रूपए क्विंटल कर दी गई। ईडी की जांच में यह सामने आया कि इस प्रोत्साहन राशि के बदले 127 करोड़ का कमीशन भी लिया गया। वहीं शराब घोटाले का पैसा भी कोषाध्यक्ष होने के नाते रामगोपाल अग्रवाल के पास पहुँचा। इन दोनों मामलों में ईडी की गिर तारी से बचने के लिए रामगोपाल अग्रवाल तीन साल से गायब हैं। प्रदेश कांग्रेस भी बिना कोषाध्यक्ष के ही काम चला रही है। कोषाध्यक्ष से संबंधित सभी आर्थिक अधिकार और दस्तावेज बैंकों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू ने अपने पास ले लिए हैं।
परिवार से जुड़े अन्य संबंधित लोगों से भी हो सकती है पूछताछ : जांच एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों, पूर्व में दर्ज बयानों और अन्य साक्ष्यों का मिलान भी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार वैभव अग्रवाल से देर रात तक पूछताछ जारी रही। सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पडऩे पर रामगोपाल अग्रवाल के परिवार से जुड़े अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जाएगी।
घोटाले में शामिल होने का आरोप : रामगोपाल अग्रवाल का नाम करीब 3 हजार करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले, 450 करोड़ रुपए के कोल लेवी वसूली मामले और 127 करोड़ रुपए के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले की जांच में सामने आया है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और कमीशन के नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
3 साल से गायब थे कांग्रेस कोषाध्यक्ष : जानकारी के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल करीब 3 साल से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियां उनकी लोकेशन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। इससे पहले इन मामलों में कांग्रेस संगठन से जुड़े कुछ अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो चुकी है।
नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष भी थे रामगोपाल : रामगोपाल अग्रवाल वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष भी बनाए गए थे। कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि और शराब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन की ईडी भी जांच की जा रही है। अग्रवाल के फरार होने के बाद प्रदेश कांग्रेस में कोषाध्यक्ष से जुड़े वित्तीय अधिकार और बैंकिंग दस्तावेज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू के पास बताए जाते हैं।
चौकाने वाला खुलासा: नकटी गांव का नाक कटवाने वाले भ्रष्ट हाउसिंग बोर्ड के बड़े अफसर के साथ मिलीभगत
शराब घोटाले का मास्टरमाइंड भूपेश सरकार का अवैध शराब कारोबार का कर्ताधर्ता के सरेंडर करने की पीछे की कहानी बहुत निराली है अपने कथित रिश्तेदार नेता के सहारे पूरी प्लानिंग के तहत सरेंडर की कहानी बनाई गई है अंदर की बात बहुत जल्द सामने आने वाली है नकटीगांव के कारण भाजपा सरकार की नाक काटने वाला प्रकरण भी रामगोपाल अग्रवाल ने ही कांग्रेस शासन काल में अपने रिश्तेदार के सहारे बोया था हाउसिंग बोर्ड के तत्कालीन भ्रष्ट अधिकारी जो भूपेश बघेल के रिश्तेदार थे, हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर पहले नकटी गांव के आसपास पुरी जमीनों को राम गोपाल अग्रवाल के समर्पित बिल्डर और रिश्तेदार लोगों ने जमकर खरीदी की। जिसमें भूपेश परिवार के भी सदस्य शामिल थे।
हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने भी जमकर खरीदी की। फिर वहीं पर हाउसिंग बोर्ड का प्रोजेक्ट शासकीय जमीनों को अधिकरण कर बनाने का योजना बनाई। यह पूरी योजना कांग्रेस शासन काल में भूपेश बघेल के रिश्तेदार हाउसिंग बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारी के द्वारा अमली जामा पहनाया गया।
बाजार की चर्चा के अनुसार नकटी गांव के आसपास अधिकांश भूमाफियाओं ने जमीन की खरीदी बिक्री कांग्रेस शासन काल में जमकर की है। इसी वजह से हाउसिंग बोर्ड का प्रोजेक्ट शासकीय भूमि का अधिकरण कर लाया गया। उस प्रोजेक्ट के उपरांत आसपास की भूमि के रेट अनाप-शनाप बेतहाशा बढ़ जाते हैं। जिससे लाखों करोड़ों की कमाई भू माफियों को होती है। अधिकांश भूमिया गैर छत्तीसगढिय़ा होने के कारण और छत्तीसगढ़ के बाहर के होने के बावजूद छूटभैया नेताओं के सहारे यह बड़ा कारनामा को अंजाम दे जाते हैं।





