छत्तीसगढ़

प्रेस क्लब रायपुर का झगड़ा पंजीयक दफ्तर पहुंचा

Nil dhankar
1 Aug 2025 9:57 AM IST
प्रेस क्लब रायपुर का झगड़ा पंजीयक दफ्तर पहुंचा
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संविधान संशोधन और सदस्यता अटकी

प्रेस क्लब में चुनावी सुगबुगाहट शुरू

प्रेस क्लब के लाल किले पर किसका झंडा ..?

रायपुर। राजधानी रायपुर में प्रेस क्लब में चुनावी सुगबुगाहट एक बार फिर सुनाई देने लगी है चुनी हुई कार्यकारिणी के कार्यकाल को खत्म हुए 5 महीने होने के बाद अब तक तो नए चुनाव को लेकर कोई सरगर्मी में नहीं थी लेकिन अब संविधान संशोधन और चुनाव कराए जाने की शिकायत पंजीयन फार्म एड सोसाइटी के पास पहुंची है अलग-अलग आई इन शिकायतों ने चुनावी चिंगारी हवा देदी है बताया जा रहा है कि शिकायतों की सुनवाई 29 जुलाई को संपन्न होने के बाद संविधान संशोधन प्रस्ताव को अनुमोदन मिलने की राह कठिन हो गई है ऐसे में कार्यकाल खत्म होने के बाद अब चुनाव की राह खुलती दिख रही है , ऐसी संभावना है कि जल्द अब प्रेस क्लब में फिर एक बार चुनावी रणभेरी बजेगी और चुनाव में पत्रकारों के अलग-अलग ग्रुप हाथ आजमाते नजर आएंगे।

पिछला चुनाव 17 फरवरी 2024 को संपन्न हुआ था जिसमें सारे समीकरणों को धत्ता बताते हुए सभी पुराने पैनलों को चकमा देकर नए पैनल के युवा पदाधिकारियों ने दो अलग-अलग पैनलों से लड़ते हुए पूरी प्रेस क्लब के कार्यकारिणी में कब्जा कर पुराने दिग्गजों को साइड कर दिया था,, संकल्प और संगवारी पैनल के जीते हुए इन पदाधिकारी का मजबूत लाल किला इस बार भी सबके सामने चुनौती बनकर आने वाला है,

चुनावी समीकरण :

पिछले चुनाव में जीत हासिल करने वालों में संकल्प पैनल में प्रफुल्ल ठाकुर अध्यक्ष ,संदीप शुक्ला, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पद पर रमन हलवाई के साथ संयुक्त सचिव अरविंद सोनवानी के साथ चार पदों पर कब्जा किया था वहीं संगवारी पैनल से युवा पत्रकारों में डॉ शिव वैभव पांडे और तृप्ति सोनी ने जीत हासिल की थी, वैसे तो विजयी उम्मीदवार अलग दो अलग-अलग पैनल के थे लेकिन सभी पदाधिकारी में गाढ़ी मित्रता आपस में एक सोच विचार के होने के कारण तालमेल काफी बेहतर रहा, इस वजह से इस बार भी इन सुपर सिक्स पदाधिकारी का पैनल सबसे सशक्त दावेदारी कर रहा है बताया जा रहा है की संकल्प पैनल के साथ दिवाकर मुक्तिबोध , सुनील कुमार, राजीव रंजन, रुचि गर्ग, आसिफ इकबाल, उचित शर्मा, जैसे प्रेस जगत के आधार स्तंभ जैसे पत्रकारों का मार्गदर्शन है ,, बड़े पत्रकारों के मार्गदर्शन में वर्तमान पदाधिकारी ने वैचारिक और क्रांतिकारी कई महत्वपूर्ण और मिल के पत्थर स्थापित करने वाले काम अपने कार्यकाल में किए हैं इन उपलब्धियां और फैसले का भी फायदा वर्तमान पदाधिकारी के चुनावी समीकरण को मजबूत बना रहे है

उपलब्धियां का मिलेगा लाभ

1. वर्तमान कार्यकारिणी ने अपने इस कार्यकाल में वैचारिक क्रांति के लिए विशेष पहल की और बड़े-बड़े विचारों के व्याख्यान कराकर प्रेस क्लब को एक वैचारिक मंच के रूप में स्थापित किया है

2. प्रेस क्लब में स्वर्गीय गोविंद लाल वोरा के नाम की लाइब्रेरी की स्थापना कर पठन-पाठन को बढ़ाने का काम किया है

3. प्रेस क्लब में होली मिलन के साथ ईद मिलन कर कर धार्मिक सद्भाव स्थापित करने की नई परंपरा की शुरुवात की

4. प्रेस क्लब की गतिविधियों को सरकार का भी समर्थन मिला है वित्त मंत्री ने प्रेस क्लब की एक मांग पर प्रेस क्लब को विकास कार्यों के राशि का प्रावधान भी बजट में किया है

5. पत्रकार हितों को लेकर रायपुर प्रेस क्लब ने राज भवन, मुख्यमंत्री निवास के घेराव जैसे साहसिक कदम उठाकर अपनी संघर्षशीलता दिखाई है

6. इन कार्यों के साथ-साथ प्रेस क्लब ने अपने संविधान में परिवर्तन कर अपना दायरा रायपुर से बढ़कर प्रदेश स्तरीय कर लिया है वही संविधान संशोधन के द्वारा वह पोर्टल को भी सदस्यता देने का रास्ता खोल खोलकर प्रेस क्लब ने क्रांतिकारी कदम उठाया है जिसमें नियमों को बदलाव करना है नये सदस्यों को वोटिंग पावर देने जैसा चुनावी फैसला भी शामिल है,यही नही इस एक वर्ष के कार्यकाल में नई सदस्यता देने के अभियान छेड़ कर वर्तमान कार्यकारिणी ने करीब 300 नए सदस्य बनाये है वही छटनी अभियान चलाकर पुराने 125 सदस्यों के नाम काट दिए गए हैं चुनावी लाभ के लिए किए गए इस फैसले पर काफी हद तक जीत हार का समीकरण निर्भर करने वाला है

इन सारी उपलब्धियां और नए कदमों के चलते इस बार प्रेस क्लब का चुनाव नए समीकरण के साथ होता दिख रहा है , चुने हुए पदाधिकारीयो ने अपने एक नए पैनल को वैचारिक और अपनी अलग कार्य शैली से स्थापित कर दिया है जो कि अब तक परंपरागत रूप से चुनाव लड़ते आ रहे पैनल के सामने बड़ी चुनौती बन गए है

फिर ताल ठोकेंगे पुराने पैनल

प्रतिद्वंदी पैनलों की बात करें तो वर्तमान पदाधिकारी के मजबूत लाल किले को ध्वस्त करना अन्य सभी प्रतिद्वंदी पैनल के लिए कठिन होने वाला है क्योंकि प्रतिद्वंदी पैनल पुराने पत्रकारों के वह ग्रुप है जो कि आपस में बटे हुए हैं , जिसमें ब्राह्मण पारा पैनल , अनिल पुसदकर का प्रतिष्ठा पैनल, दामू पैनल, सुकांत राजपूत का पैनल शामिल है, इन सभी पैनल के लिए वैचारिक रूप से लाल पत्रकार ग्रुप का मुक़ाबला कठिन काम होगा, और नए सदस्य का समर्थन भी टेढ़ी खीर साबित होगी , वैसे तो मुख्य मुकाबला अध्यक्ष और महासचिव के पद पर ही है जिसपर पत्रकारों की गुटीय संतुलन के समीकरण का असर होगा , बाकी पद पर पत्रकार अपनी पसंदगी और नापसंदगी के आधार पर वोट करते हैं इसलिए सभी अध्यक्ष और महासचिव पद में कब्जे के लिए पत्रकार के सभी ग्रुप एड़ी चोटी का जोर लगाएंगे वर्तमान में प्रेस क्लब की सत्ता पर काबिज ग्रुप के सामने हर बार की तरह अलग-अलग चार ग्रुप के उम्मीदवार मुकाबले में रहने वाले हैं ऐसे में पिछले परिणाम के कांटे के मुकाबले से हट कर इस बार नए सदस्य किसके के साथ तय जीत हार तय करता है वाले चुनाव से समीकरण काफी हद तक वर्तमान पदाधिकारी के फायदा पहुंचाने वाला रहेगा,

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