छत्तीसगढ़

अदालत ने नाबालिग दुष्कर्म मामले में आरोपी को दोषी ठहराया

Shantanu Roy
14 Jan 2026 12:13 AM IST
अदालत ने नाबालिग दुष्कर्म मामले में आरोपी को दोषी ठहराया
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छग
Mungeli. मुंगेली। नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में मुंगेली की एफ.टी.सी. अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह निर्णय आज अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत द्वारा पारित किया गया, जबकि फैसला 9 जनवरी 2026 को सुरक्षित रखा गया था। आरोपी पीड़िता का जीजा है और मामला सिटी कोतवाली मुंगेली थाना क्षेत्र से संबंधित है। मामले की कानूनी प्रक्रिया 9 दिसंबर 2024 को अपराध निर्धारण से शुरू हुई थी। 17 जनवरी 2025 से साक्ष्य की
सुनवाई
प्रारंभ हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मोती लाल साहू और लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ने मामले की पैरवी ठोस एवं प्रभावी तरीके से की। अदालत ने सभी मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पाया कि आरोपी ने 14 वर्ष की नाबालिग बालिका के साथ गंभीर लैंगिक अपराध किया। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 65(1), 64(2)(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(सी)/6 और 4(2) के तहत दोषसिद्ध किया। इसके तहत आरोपी को निम्नानुसार सजा सुनाई गई।

धारा 4(2) पॉक्सो एक्ट: आजीवन कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड।
धारा 6 पॉक्सो एक्ट: आजीवन कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड।
अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक अपराध के लिए अलग-अलग 6 माह का सश्रम कारावास।

अदालत ने आरोपी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत विचारण अवधि में बिताई गई निरोध अवधि का लाभ देने का आदेश भी दिया। आरोपी 9 अक्टूबर 2024 से न्यायिक अभिरक्षा में है और 9.10.2024 से 13.01.2026 तक कुल 1 वर्ष 3 माह 4 दिन की निरोध अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। पीड़िता के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए अदालत ने छत्तीसगढ़ शासन की यौन उत्पीड़न पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत 5,00,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसमें से 1,00,000 रुपये पीड़िता के बैंक खाते में तुरंत जमा किए जाएंगे और शेष 4,00,000 रुपये उसके वयस्क होने तक राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा के रूप में सुरक्षित रखे जाएंगे।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का आदेश दिया। पीड़िता का नाम, पता, फोटो या परिवार से संबंधित कोई जानकारी प्रकाशित करना कानूनन दंडनीय होगा। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि निर्णय की प्रति आरोपी को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी, सजा वारंट जारी कर आरोपी को जिला जेल मुंगेली भेजा जाएगा और निर्णय की प्रतिलिपि लोक अभियोजक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला मजिस्ट्रेट और जेल अधीक्षक को अनुपालन के लिए भेजी जाएगी। इस निर्णय के बाद पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस मामले में अदालत का निर्णय न केवल अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश है, बल्कि बच्चों और नाबालिकों के अधिकारों की सुरक्षा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
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