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नक्सलवाद के अंत की ओर लेंगे निर्णायक कदम
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के विकास में लंबे समय से सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद का अंत अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व और सुरक्षाबलों के अदम्य साहस से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की बहाली तेज़ी से हो रही है। यह बात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बस्तर अंचल के समग्र विकास पर केंद्रित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कही।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि नक्सलवाद की हिंसक विचारधारा भविष्य में दोबारा सिर न उठा सके। इसके लिए बस्तर अंचल में सुरक्षा के साथ-साथ सतत संवाद, विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से आम जनता का भरोसा लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति और विकास को साथ लेकर चलना ही स्थायी समाधान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का स्पष्ट लक्ष्य बस्तर का सर्वांगीण, संतुलित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने घोषणा की कि आगामी तीन वर्षों के लिए बस्तर के विकास का एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा, जिसे मिशन मोड में लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन ज़मीन पर दिखना चाहिए। उन्होंने सचिव स्तर के अधिकारियों को नियमित रूप से बस्तर क्षेत्र का दौरा करने और योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का तेज़ी से विस्तार अत्यंत आवश्यक है। इससे दूरस्थ से दूरस्थ इलाकों तक विकास की रोशनी पहुंचेगी और शासन-प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री साय ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्थानीय लोगों की स्वस्फूर्त भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि बस्तर के लोग शांति, विकास और मुख्यधारा से जुड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और खेल आयोजनों से युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बैठक में पेयजल, विद्युतीकरण और मोबाइल कनेक्टिविटी की गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान के लिए सतही जल स्रोतों से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने, शेष गांवों के शीघ्र विद्युतीकरण तथा दूरस्थ इलाकों में मोबाइल टावरों की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही आधार कार्ड निर्माण को लेकर बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
पर्यटन विकास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और जनजातीय विरासत को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने होम-स्टे को प्रोत्साहन देने, स्वदेश दर्शन योजना के तहत चिन्हित पर्यटन स्थलों के विकास, बस्तर टूरिज्म कॉरिडोर के निर्माण और युवाओं को पर्यटन आधारित आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। आईआईटीटीएम ग्वालियर से प्रशिक्षित बस्तर के 32 स्थानीय गाइडों को दिए गए प्रशिक्षण की उन्होंने विशेष सराहना की।
बैठक में वनधन केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण, शिक्षा के क्षेत्र में भवन विहीन विद्यालयों के लिए शीघ्र राशि स्वीकृति, नवोदय और पीएम स्कूलों का विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, पीएम-अभीम योजना, बाइक एम्बुलेंस सेवा, सिंचाई परियोजनाएं, आंगनबाड़ी और बालवाड़ी संचालन, ग्रामीण बस योजना तथा रोजगार और आजीविका से जुड़ी विभिन्न कार्ययोजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने सभी संबंधित विभागों को विशेष केंद्रीय सहायता के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए, ताकि बस्तर के समग्र, संतुलित और टिकाऊ विकास को नई गति मिल सके। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, पी. दयानंद, डॉ. बसवराजु एस. सहित समस्त विभागीय सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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