छत्तीसगढ़

पुलिसकर्मी के घर में फंदे से लटकी मिली आदिवासी नाबालिग की लाश

Shantanu Roy
31 Oct 2025 8:14 PM IST
पुलिसकर्मी के घर में फंदे से लटकी मिली आदिवासी नाबालिग की लाश
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छग
Bijapur. बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक पुलिसकर्मी के घर में कक्षा छठवीं की आदिवासी बच्ची की लाश फंदे से लटकती मिली, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश और सवालों का माहौल है। परिजनों ने इस घटना को हत्या करार देते हुए पुलिसकर्मी और उसकी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला जिले के दारापारा क्षेत्र का बताया जा रहा है। लगभग 13 दिन पहले (17-18 अक्टूबर) एक पुलिसकर्मी के घर से 14 वर्षीय नाबालिग चांदनी कुडियम की लाश संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे पर लटकी मिली थी। मृतका मूल रूप से दुगोली गांव की रहने वाली थी और कक्षा छठवीं की छात्रा थी।
‘पढ़ाने के नाम पर ले गया पुलिसकर्मी, घर में मिली लाश’
जानकारी के अनुसार, पुलिसकर्मी सुभाष तिर्की नामक व्यक्ति कुछ महीने पहले बच्ची को अपने घर पढ़ाने-लिखाने के नाम पर लेकर आया था। उसने परिजनों से कहा था कि वह उसकी देखभाल करेगा और उसे बेहतर शिक्षा देगा। परिवार ने भरोसा करते हुए अपनी बेटी को उसके पास भेज दिया था। लेकिन कुछ दिनों बाद चांदनी की लाश फंदे पर लटकती मिली। यह खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची, पूरा गांव स्तब्ध रह गया। परिजनों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर सुभाष तिर्की और उसकी पत्नी नीरजा तिर्की पर हत्या का आरोप लगाया।
परिजनों का गंभीर आरोप: ‘मामले को दबाने की कोशिश’
परिजनों का कहना है कि चांदनी ने शायद घर में कुछ ऐसा देख लिया था, जो पुलिसकर्मी और उसके परिवार के लिए राज़ बन गया। उसी बात को लेकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। बच्ची अपने भाई से बार-बार घर लौटने की बात कह रही थी, लेकिन उसे नहीं जाने दिया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्ची की मौत के बाद पुलिसकर्मी परिवार ने शव को छिपाने की कोशिश की। बताया गया कि बोलेरो वाहन से शव को गोपनीय तरीके से उसके गृहग्राम दुगोली पहुंचाया गया। इतना ही नहीं, परिजनों और ग्रामीणों को डेढ़ लाख रुपये देकर मामले को दबाने और अंतिम संस्कार जल्दबाजी में करवाने की भी कोशिश की गई थी।
जिला पुलिस पर लापरवाही और पक्षपात के आरोप
इस दर्दनाक घटना को हुए दो हफ्ते से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मृतका के परिवार का आरोप है कि बीजापुर पुलिस अपने ही विभाग के कर्मी को बचाने में लगी हुई है। पीड़ित परिवार बार-बार न्याय की गुहार लगा रहा है, पर जिला पुलिस प्रशासन ने इस ओर कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब एक आदिवासी बच्ची की संदिग्ध मौत पुलिसकर्मी के घर में होती है, और जांच वही विभाग करता है, जिससे आरोपी जुड़ा है — तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
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