छत्तीसगढ़
नकली दवाओं के काले कारोबार का खुलासा, नवकार मेडिकल स्टोर्स पर FIR दर्ज
Shantanu Roy
8 Jan 2026 11:54 PM IST

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छग
Abhanpur. अभनपुर। खाद्य एवं औषधि प्रशासन जिला गरियाबंद की जांच में नकली दवाओं के एक संगठित कारोबार का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गोबरा नवापारा स्थित नवकार मेडिकल स्टोर्स से खांसी की नकली दवा “बेस्टो कोफ सिरप” फर्जी बिल के आधार पर बेची जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, औषधि निरीक्षक द्वारा 9 सितंबर 2025 को गोबरा नवापारा स्थित मेसर्स नवकार मेडिकल स्टोर्स में औचक निरीक्षण किया गया था।
निरीक्षण के दौरान दवाओं के क्रय-विक्रय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। मेडिकल स्टोर में प्रस्तुत बिल क्रमांक 460 दिनांक 23.09.2024 के आधार पर बेस्टो कोफ सिरप की बिक्री दर्शाई गई थी। इस सिरप का बैच नंबर बी-6019024, एक्सपायरी दिसंबर 2025 और एमआरपी 114.94 रुपये अंकित थी, जबकि बिल में इसकी कुल राशि लगभग 1200 रुपये दर्शाई गई थी। जब इस बिल और दवा की सत्यता की जांच संबंधित निर्माणकर्ता कंपनी से कराई गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
कंपनी ने स्पष्ट रूप से बताया कि उक्त बैच नंबर की दवा न तो उनके द्वारा निर्मित की गई है और न ही बाजार में आपूर्ति की गई है। इससे यह सिद्ध हुआ कि संबंधित सिरप पूरी तरह नकली और जाली है। साथ ही, मेडिकल स्टोर द्वारा प्रस्तुत किया गया बिल भी प्रथम दृष्टया कूटरचित और फर्जी पाया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मेसर्स नवकार मेडिकल स्टोर्स के प्रोपराइटर पारसमल जैन एवं अन्य लोगों ने मेसर्स कुलेश्वर मेडिकल स्टोर एंड जनरल स्टोर्स, राजिम के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत नकली औषधियों का अवैध व्यापार किया। इस नेटवर्क के जरिए आम लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था।
प्रकरण में आरोपी सीताराम साहू ने अपने बयान में स्वीकार किया कि उसे उक्त अवमानक और नकली औषधि नवकार मेडिकल स्टोर्स से ही प्राप्त हुई थी। इस बयान के बाद दोनों मेडिकल स्टोर्स के बीच सीधी आपराधिक कड़ी स्थापित हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना गोबरा नवापारा में भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। वहीं खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा इस पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य संभावित लिंक भी खंगाले जा रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि नकली दवाओं का कारोबार सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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