छत्तीसगढ़
कामठी गांव में नवरात्रि पंडाल विवाद से तनाव, पुलिस-ग्रामीण में झड़प
Shantanu Roy
21 Sept 2025 10:37 PM IST

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Kawardha. कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के कुकदूर थाना क्षेत्र के ग्राम कामठी में शनिवार को नवरात्रि पंडाल स्थापना को लेकर दो समुदायों—पटेल और गोंडवाना—के बीच विवाद फिर तूल पकड़ गया। सुबह एक पक्ष द्वारा मंदिर परिसर में पंडाल लगाने की कोशिश पर दूसरे पक्ष ने विरोध किया और उसे हटाने का प्रयास किया। इससे पहले से मौजूद तनाव एक बार फिर भड़क उठा। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कामठी गांव में बीचों-बीच स्थित प्राचीन मंदिर में वर्षों से स्थानीय लोग नियमित पूजा-अर्चना करते आए हैं। पिछले कुछ वर्षों से गोंडवाना समाज ने मंदिर पर अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया और हाल ही में मंदिर का नया नामकरण कर सतरंगी झंडा स्थापित किया। इस कारण से पटेल और गोंडवाना समाज के बीच पहले से ही तनाव था।
शनिवार को मंदिर परिसर में दुर्गा प्रतिमा की स्थापना और पंडाल सजाने की तैयारी के दौरान विवाद शुरू हुआ। गोंडवाना समाज ने पंडाल हटाने का प्रयास किया, जिससे पटेल समाज के लोग नाराज हो गए। गुस्से में बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर में जुट गए और हंगामा शुरू कर दिया। भीड़ ने मंदिर की दीवार तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दोनों पक्षों को नियंत्रित करने के प्रयास में पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई। इस झड़प में एक गर्भवती महिला आरक्षक घायल हो गई, और उनके हाथ में गंभीर चोट आई। साथ ही मौके पर मौजूद एसडीओपी के साथ भी अभद्र व्यवहार हुआ। पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। पुलिस ने तुरंत कामठी गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया और प्रशासन ने विवादित मंदिर को शासकीय घोषित कर दिया। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि किसी भी प्रकार का आगे का हिंसक घटनाक्रम न हो।
कवर्धा पुलिस ने स्पष्ट किया कि वायरल खबरों और अफवाहों में गलत सूचना फैलाई जा रही है। वास्तविक विवाद केवल पंडाल स्थापना से संबंधित था। सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखने में प्रशासन और पुलिस का सहयोग करें। कबीरधाम जिले के अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल भी दुर्गा प्रतिमा स्थापना और नवरात्रि के अवसर पर पूजा-अर्चना को लेकर इसी तरह का विवाद हुआ था। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर मामले को शांत कराया था, लेकिन आंतरिक नाराज़गी बनी रही। इस साल की घटना में भी प्रशासन ने सख्ती दिखाने का निर्णय लिया है। कवर्धा एसपी ने कहा कि मंदिर में पंडाल वहीं स्थापित होगा और किसी भी प्रकार के आस्था से खिलवाड़ करने वाले या उपद्रव करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उपद्रव करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के बीच स्थित प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन वर्षों से शांतिपूर्वक होते आए हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में बढ़ती आस्थाओं और अधिकार जताने की कोशिशों ने समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा दिया। पुलिस ने यह भी बताया कि स्थिति को देखते हुए गांव में निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और पुलिस लगातार गांव में शांति बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं। गांववासियों ने भी प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे धार्मिक स्थलों के संचालन और पंडाल स्थापना के मामलों में पारदर्शिता बनाए रखें ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद न हों।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के स्थानीय धार्मिक विवाद अक्सर आस्थाओं, अधिकार और पहचान के मुद्दों से जुड़े होते हैं। स्थानीय प्रशासन का जिम्मा है कि वह दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखे और किसी भी हिंसक स्थिति को फैलने से रोके। पुलिस ने सभी समुदायों से शांति और भाईचारे की अपील करते हुए कहा कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। कवर्धा एसपी ने दोहराया कि मंदिर परिसर में पंडाल स्थापना की अनुमति दी जाएगी और किसी भी प्रकार के उपद्रव में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर, कबीरधाम के कामठी गांव में नवरात्रि पंडाल को लेकर विवाद स्थानीय आस्थाओं और समुदायिक विवाद की जटिलता को उजागर करता है। प्रशासन और पुलिस की सक्रियता से स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन गांव में तनाव अभी भी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस लगातार निगरानी में है और किसी भी प्रकार के हिंसक घटनाक्रम को रोकने के लिए अलर्ट मोड में हैं।
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