छत्तीसगढ़

किरायेदार सत्यापन अब अनिवार्य, बिना पुलिस सूचना किराये पर मकान देना पड़ेगा भारी

Nil dhankar
26 July 2026 5:21 PM IST
किरायेदार सत्यापन अब अनिवार्य, बिना पुलिस सूचना किराये पर मकान देना पड़ेगा भारी
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रायगढ़। जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा असामाजिक एवं आपराधिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी मयंक चतुर्वेदी द्वारा 25 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163(2) के अंतर्गत जारी इस आदेश के अनुसार जिले में कोई भी भवन स्वामी, प्रतिष्ठान अथवा संस्थान बिना पुलिस को पूर्व सूचना दिए अपना भवन, मकान, कमरा अथवा परिसर किराये पर नहीं देगा। साथ ही वर्तमान में निवासरत सभी किरायेदारों का संपूर्ण विवरण भी संबंधित थाना में जमा करना अनिवार्य होगा।

जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि प्रायः देखा गया है कि कुछ असामाजिक एवं आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपनी पहचान छिपाकर शहरी एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किराये के मकानों में निवास करते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था एवं जन सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किरायेदारों एवं घरेलू सहायकों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया गया है।

आदेश के अनुसार प्रत्येक भवन स्वामी अपने किरायेदार का नाम, मूल पता, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र का विवरण एवं अन्य आवश्यक जानकारी संबंधित थाना प्रभारी को उपलब्ध कराएगा। किसी भी व्यक्ति को वैध एवं प्रामाणिक पहचान पत्र के बिना किराये पर आवास नहीं दिया जाएगा। जो किरायेदार पहले से रह रहे हैं, उनके संबंध में भी मकान मालिकों को तत्काल संबंधित थाना प्रभारी को जानकारी देना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था केवल आवासीय भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, उद्योगों एवं संस्थानों पर भी समान रूप से लागू होगी।

इसके अतिरिक्त यदि किसी किरायेदार अथवा उसके यहां आने वाले आगंतुक की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होती हैं, तो उसकी सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना या चौकी को देना आवश्यक होगा। नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है तथा व्यापक जनहित में इसे एकपक्षीय आदेश के रूप में पारित किया गया है।

कलेक्टर रायगढ़ द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के अंतर्गत दंडनीय अपराध होगा, जिसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आदेश के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लाउडस्पीकर, समाचार पत्र, सूचना पटल, पुलिस थानों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर इसकी जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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