अवैध बिल्डरों पर सख्ती : रेरा में रजिस्ट्रेशन के बिना जमीन, मकान बेच पाना मुश्किल

उपभोक्ताओं के गाढ़ी कमाई को फर्जी बिल्डर, दलाल हड़प नहीं सकते
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जब से रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण रेरा में सरकारी और निजी निर्माण एजेंसियों को पंजीकृत किया है तब से आम उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है और वे फर्जीवाड़ा से बच गए हैं। उपभोक्ताओं के गाढ़ी कमाई को अब फर्जी बिल्डर या जमीन दलाल हड़प नहीं सकते। रेरा में निजी बिल्डर, सरकारी एजेंसियां,नए प्रोजेक्ट और रियल एस्टेट एजेंटों शामिल होंगे। शहर के बिल्डरों व सरकारी एजेंसियों को राजधानी रायपुर के रेरा दफ्तर में ही पंजीकृत किया गया है। जिसके तहत निर्माण एजेंसी या बिल्डर को पंजीयन के बाद एक यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन नंबर दिया गया है यह पंजीयन सुनिश्चित करेगा कि बिल्डर मानकों के अनुरूप और दिए गए ब्रोशर के अनुसार ही निर्माण कार्य करें और ग्राहकों से किए वादों को पूरा करें। मजे की बात बिल्डरों को अपने विज्ञापनों में भी अपने पंजीयन नंबर का उल्लेख करना होगा यह बिल्डर, निर्माण एजेंसी या जमीन के कारोबार से जुड़े फर्मों की ऑनलाइन पहचान भी होगी जिसकी जानकारी आम उपभोक्ता भी हासिल कर सकेंगे। इसमें जिन बिल्डरों का पंजीयन होगा उनकी प्रॉपर्टी खरीदना सुरक्षित माना जा सकता है, फर्जीवाड़े या धोखाधड़ी की आशंका कम होगी। दूसरी ओर छग में बिल्डर, कॉलोनाइजर या सरकारी संस्था जैसे हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम को रेरा में पंजीयन करना अनिवार्य कर दने से आम उपभोक्ता को फायदा पहुंचा है।
प्रदेश में रेरा बनने के पहले बिल्डर द्वारा उपभोक्ता से किये गए एग्रीमेंट या ब्रोशर में दिखाए गए वादों से मुकर जाते थे और विवाद की स्थिति निर्मित होती थी कई लगो के पैसे भी डूब जाते थे लेकिन अब इसकी गुंजाईश नहीं के बराबर हो गई है। बिल्डर अपने किये गए वादे से मुकरता है तो उसकी शिकायत रेरा से कर उन्हें दण्डित भी करवाया जा सकता है।उपभोक्ता की शिकायत मिलते ही तत्काल उसकी जांच की जाएगी। जांच सही पाई को बिल्डर का पंजीयन नंबर निरस्त करने के साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। मामला गंभीर हुआ तो उसके खिलाफ प्रकरण भी दर्ज किया जा सकता है। जिसके तहत तीन साल की सजा या पांच लाख रूपये जुर्माना का प्रावधान रखा गया है। देखा गया है कि बिल्डरों की योजनाओं को लेकर कई बार मकान खरीदने वालों और बिल्डरों के बीच तनाव की स्थिति निर्मित हो जाती है इस दशा में उपभोक्ता अपनी मांगों को लेकर लोग कोर्ट या उपभोक्ता फोरम जाना पड़ता था लेकिन रेरा का गठन होने के बाद अब बिल्डरों के प्रोजेक्ट में छोटे-छोटे विवादों का निपटारा रेरा खुद ही कर देगा। इस वजह से उपभोक्ताओं को बिल्डरों के खिलाफ कोर्ट या उपभोक्ता फोरम जाने की जरूरत नहीं होगी। यह लोगों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। प्रदेश सरकार ने आम उपभोक्ताओं को रहत देने के लिए ही रेरा का गठन किया है। मकान बेचते समय दिए गए ब्रोशर के अनुरूप और समय से निर्माण नहीं किए जाने पर भी बिल्डर को जुर्माना लगेगा या उपभोक्ता को ब्याज देना पड़ेगा ऐसा प्रावधान भी रेरा के अंतर्गत किया गया है। रेरा एक्ट में सिर्फ निजी बिल्डर ही नहीं बल्कि गृह निर्माण मंडल और नगर निगम को भी दायरे में रखा गया है। इसके तहत सभी आवासीय प्रोजेक्ट पंजीकृत होने के बाद खरीदी-बिक्री या आवंटन होगा उसके पहले नहीं की जा सकती।
खरीदारों को फायदा ही फायदा :
राजधानी में लगभग 20 से 25 बिल्डर और कालोनाइजर सक्रिय थे जो राजधानी के आसपास कृषि भूमि को प्लाट बनाकर बेचा करते थे ऐसा रेरा के गठन के पहले और बाद मे भी था लेकिन अब लगभग काफी हद तक इस पर अंकुश लगा गया है। राजधानी में विभिन्न कंपनियों ने लोगों को सस्ती दर पर फ्लैट व जमीन के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी कर भाग चुके हैं। कई कंपनियों के कर्ताधर्ता को पकड़ कर और उसकी चल अचल संपत्ति को कुर्क कर पीड़ितों को प्रदेश सरकार ने उनका पैसा लौटने का भी कार्य किया है लेकिन रेरा के आने पर अब इन गड़बडिय़ों पर लगाम लगना प्रारम्भ हो गया है।





