छत्तीसगढ़

खम्हारडीह थाने में समझौता रुकवाकर जबरन FIR?

Nil dhankar
29 Jun 2026 11:23 AM IST
खम्हारडीह थाने में समझौता रुकवाकर जबरन FIR?
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रायपुर। राजधानी के थाना खम्हारडीह से जुड़ा एक मामला पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। जांजगीर-चांपा निवासी शिकायतकर्ता शिवधर सागर ने आरोप लगाया है कि पैसों के लेन-देन के विवाद में दोनों आरोपी थाने पहुंचने के बाद तत्काल पूरी राशि लौटाने के लिए तैयार हो गए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपियों ने पैसे भी मंगवा लिए थे ताकि उसी समय राशि वापस कर विवाद समाप्त किया जा सके। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह भी राशि प्राप्त कर कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराना चाहता था।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही थाने में समझौते की पूरी स्थिति बन चुकी थी, लेकिन थाना प्रभारी भावेश गौतम ने उसे समझौता करने से रोक दिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि थाना प्रभारी ने बार-बार डीसीपी नॉर्थ आईपीएस मयंक गुर्जर का हवाला देते हुए कहा कि "साहब का आदेश है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करनी ही है। अब थाना में कोई समझौता नहीं होगा। यदि समझौता करना है तो न्यायालय जाकर करना। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने कई बार थाना प्रभारी से कहा कि जब उसे उसकी पूरी राशि वापस मिल रही है, तब वह अपराध दर्ज नहीं कराना चाहता। इसके बावजूद उसकी बात नहीं सुनी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि थाना प्रभारी भावेश गौतम ने डीसीपी नॉर्थ आईपीएस मयंक गुर्जर का नाम लेकर लगातार दबाव बनाया और आरोपियों से उसे पैसे तक नहीं लेने दिए, जबकि दोनों आरोपी भुगतान करने के लिए तैयार थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसकी स्पष्ट इच्छा के विपरीत, समझौते की संभावना समाप्त कर उस पर एफआईआर दर्ज कराने का दबाव बनाया गया और अंततः उसकी मर्जी के विरुद्ध अपराध दर्ज करा दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि एफआईआर दर्ज होने से पहले दोनों पक्ष समझौते के लिए सहमत थे, तो फिर थाना स्तर पर समझौता क्यों नहीं होने दिया गया और शिकायतकर्ता की इच्छा को क्यों नजरअंदाज किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की भूमिका और विवेकाधिकार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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