छत्तीसगढ़
अनुकंपा नियुक्ति विवाद का निकलेगा हल सरकार ने सात सदस्यीय कमेटी बनाई
Shantanu Roy
21 Sept 2026 9:17 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित परिवारों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से लंबित चल रहे अनुकंपा नियुक्ति के मामलों के समाधान के लिए राज्य सरकार ने सात सदस्यीय अंतर्विभागीय समिति का गठन किया है। यह समिति अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन कर एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
लंबे समय से लंबित थे नियुक्ति के मामले
विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित सदस्यों को पहले शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान था। लेकिन समय के साथ शिक्षाकर्मी का पद समाप्त हो गया। इसके बाद 13 दिसंबर 2022 को सरकार ने आदेश जारी कर छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर नियुक्ति देने की व्यवस्था बनाई थी। हालांकि, अधोसंरचना विकास निगम में पर्याप्त संख्या में पद उपलब्ध नहीं होने के कारण कई अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण लंबित रह गए।
आश्रित परिवारों को हो रही थी परेशानी
लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान के लिए नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति विघटित परिवहन निगम के कर्मचारियों के आश्रितों के लंबित मामलों, वर्तमान नियमों और उपलब्ध विकल्पों का अध्ययन करेगी। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पहल
अधिकारियों के अनुसार, उच्च न्यायालय द्वारा एक याचिका में नई नीति बनाने के संबंध में दिए गए निर्देश और प्रभावित परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने 14 जुलाई 2026 को समिति गठन का आदेश जारी किया। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव को मंत्रि-परिषद के सामने अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद नई अनुकंपा नियुक्ति नीति को अधिसूचित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि नई नीति बनने के बाद लंबे समय से लंबित मामलों के निराकरण का रास्ता साफ होगा और पात्र आश्रितों को नियुक्ति मिल सकेगी।
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