नक्सली हिड़मा की मौत पर समाजसेवी अंकुश देवांगन का सम्मान

भिलाई। दुर्दांत नक्सली हिड़मा की मौत पर बस्तर के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 37 वर्षों से बच्चों को निशुल्क चित्र मूर्तिकला सिखाने वाले सुप्रसिद्ध मूर्तिकार अंकुश देवांगन का सम्मान किया गया। जहां अंकुश देवांगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा गृह मंत्री विजय शर्मा को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ से नक्सली समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। इस दौरान श्री शिव शक्ति फाउंडेशन सेलूद के हीरेंद्र कुमार साहू, माता घमोती, ओमी साहू, जागृत तथा संस्था के पदाधिकारीगण मौजूद थे।
ज्ञात हो कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र दल्ली राजहरा में जन्म लिए अंकुश देवांगन ने अपने आस-पास के गांवों में नक्सली विचारधाराओं से प्रभावित होने वाले बच्चों को देखा है। और यह भी देखा कि जो बच्चे उनके साथ कला की कुछ नज्में सीख जाते हैं वह कभी नक्सलाइड नहीं बनते। इस छोटे से विचार ने उनके जीवन की दशा और दिशा दोनों बदल कर रख दी। अतः उन्होंने बचपने से ही बच्चों को चित्रकला और मूर्तिकला की शिक्षा देनी शुरू कर दी और इसे अपना जीवन लक्ष्य बना लिया। ताकि वे हिंसा के रास्ते में न जाएं तथा एक श्रेष्ठ नागरिक के रूप में भारत देश की सेवा करें। जिसका सदैव उचित प्रतिफल सामने आता रहा है और उनसे सीखे हजारों बच्चे कभी हिंसा के रास्ते में नहीं गए। भिलाई इस्पात संयंत्र में नौकरी लगने के बाद भी वे अपने तमाम छुट्टियों का उपयोग इन पुण्यार्थ के कार्यों में लगाते रहे हैं।
वे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपने दुनिया की सबसे छोटी मूर्तियों और चावल के छोटे-छोटे दानों पर पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाते हैं ताकि बच्चे और बड़े कला के प्रति आकर्षित हो सके। जिसका फायदा हुआ कि उनकी प्रदर्शनी देखने के लिए बीहड़ क्षेत्रों में त्यौहारों सा माहौल बन जाता है। और सभी ग्रामीण दीवानों की तरह उनकी कला को देखने के लिए उत्सुक हो उठते हैं। वे दूरस्थ अंचलों में साइकिल से और पैदल भी कई-कई किलोमीटर तक अंदर जाकर कला प्रदर्शनी और प्रशिक्षण देते रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों द्वारा कुख्यात नक्सली हिड़मा को मारने के बाद कहा है कि अब फिर कभी कोई बच्चा नक्सली विचारधारा से प्रेरित नहीं होगा। और न ही उनके जैसे कलाकारों को अब बच्चों को हिंसा के रास्ते में जाने से रोकने के लिए कोई मिशन चलाना पड़ेगा।
शिव शक्ति फाउंडेशन सेलूद के सदस्य हीरेंद्र कुमार साहू ने भी अंकुश के समाज सेवा और उनकी कला को नमन करते हुए उन्हें वाल्मीकि रचित रामायण ग्रंथ भेंट किया। ज्ञात हो कि अंकुश देवांगन देश-विदेश में अपनी विश्व स्तरीय मूर्तिकला की कारण भी जाने जाते हैं। उन्होंने न सिर्फ दुनिया की सबसे छोटी मूर्तियां बनाई है बल्कि दुनिया के सबसे ऊंचे लौहरथ का भी दल्ली राजहरा में निर्माण किया है। दुनिया का सबसे लंबा भित्तिचित्रण रायपुर का पुरखौती मुक्तांगन उनके कालजयी रचना का एक और गवाह है। देश के अनेक हिस्सों में उनके द्वारा बनाई गई रचनाएं मौजूद है। जिसके कारण संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली ने उन्हें ललित कला अकादमी की मानद सदस्यता प्रदान की है। जहां वे छत्तीसगढ़ राज्य से प्रथम बोर्ड मेंबर बने हैं।





