छत्तीसगढ़

स्मार्ट सिटी का स्मार्ट शौचालय कबाड़ में तब्दील

Nilmani Pal
9 Sept 2025 12:09 PM IST
स्मार्ट सिटी का स्मार्ट शौचालय कबाड़ में तब्दील
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कबाड़ी भी अब खंडहर को लेने कतरा रहे

रायपुर। भूपेश सरकार के कार्यकाल में रायपुर शहर में पहली बार मुस्लिम मेयर एजाज ढेबर को भूपेश बघेल ने अपनी सर्व शक्ति और ताकत लगाकर बनाया था। कांग्रेस के अधिकांश नेताओं के विरोध के बाद मुस्लमान को रायपुर शहर का मेयर बनाया गया। एजाज ढेबर के लिए एक अच्छा अवसर था रायपुर शहर को सुधारकर इतिहास रचने का। लेकिन दुर्भाग्य भूपेश सरकार के पांच साल के कार्यकाल में 13 हजार करोड़ से ज्यादा राज्य सरकार के रायपुर को दिए गए अनुदान को कबाड़ में तब्दील कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट जिसमें 9 हजार करोड़ से ज्यादा का कार्य भी अलग से कबाड़ी के भाव में बिकता चला गया। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की टायलेट, बस स्टाप, एलईडी, पोल ट्यूब और साइकिल पाथवे जैसे हजारों प्रोजेक्ट कबाड़ हो गए हैं। इसके लिए जिम्मेदार कौन...? और कौन सा नेता वर्तमान में संपूर्ण कबाड़ हुए जनता के करोड़ों रुपए स्वाहा, करने वालों की जांच कौन रोक रहा। छत्तीसगढ़ की सरकार का जनता का करोड़ों का फंड नेता और अधिकारी मिलकर डकार गए। निर्माण कार्य गवाह के रूप में ताक रही है इसकी जांच कब होगी। जांच विभिन्न स्तरों में अटकी।

ईडी की कार्रवाई के बाद मोक्षित कार्पोरेशन को जीएसटी का नोटिस

जनता से रिश्ता ने किया था रिजेंट घोटाले का खुलासा

मोक्षित कॉरपोरेशन केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर , 650 करोड़ से ज्यादा का घोटाला

ईडी की छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ कार्रवाई , मोक्षित कॉर्पोरेशन के ठिकानों पर दवा खरीदी घोटाले की जांच

मोक्षित कोर्पोरेशन में घोटाले की खबर को सबसे पहले जनता से रिश्ता प्रमुखता से प्रकाशित

भूपेश सरकार के कार्यकाल में कोरोना काल की मेडिकल सप्लाई, पांच वर्ष के कार्यकाल की संपूर्ण कार्यप्रणाली पर ईडी और सीबीआई की गहरी नजर

रायपुर/दुर्ग। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (ष्ठत्रत्रढ्ढ), रायपुर जोनल यूनिट ने मेसर्स मोक्षित कारपोरेशन और उससे जुड़ी 85 फर्मों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 162.22 करोड़ रुपये के कर योग्य मूल्य पर 28।46 करोड़ रुपये के अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट का नोटिस जारी किया है। फरवरी 2024 से शुरू हुई जांच में पता चला कि मोक्षित कारपोरेशन ने फर्जी इनवॉइस के जरिए बड़े पैमाने पर त्रस्ञ्ज अपवंचन किया। जांच के दौरान विभागीय टीमों ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कई फर्मों के ठिकानों पर तलाशी और निरीक्षण किया। इस दौरान खुलासा हुआ कि फर्म के पार्टनर शशांक चोपड़ा ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर दर्जनों फर्जी फर्में स्थापित की थीं, जिनके जरिए अनुचित ढ्ढञ्जष्ट का दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियां संचालित की गईं। इन गतिविधियों के लिए 200 से अधिक बैंक खातों का उपयोग किया गया। जांच के बाद मोक्षित कारपोरेशन पर 28.46 करोड़ रुपये की कर मांग की गई है, साथ ही संबद्ध 85 फर्मों को दंड नोटिस जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर चल रहे त्रस्ञ्ज फर्जीवाड़े को उजागर करने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

क्या है पूरा मामला : छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में खून की जांच और दवाओं की आपूर्ति के नाम पर सीजीएमएससी के अधिकारियों ने गरीब मरीजों की सेहत से खिलवाड़ किया था। सरकार इसमें एसीबी और ईओडब्ल्यू से जांच करा रही है। सीजीएमएससी के रिएजेंट किट, दवा खरीदी में 750 करोड़ के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने 5 अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इसमें सीजीएमएससी के जीएम टेक्निकल कमल कांत पाटनवार, बायोमेडिकल इंजीनियर खिरौद रावतिया, पूर्व जीएम सीजीएमएससी बसंत कोशिक, स्वास्थय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और दीपर कुमार बांधे गिरफ्तार हुए थे। सभी को कोर्ट में पेश किया गया है और 15 दिन की पुलिस रिमांड के लिए आवेदन किया गया था। वहीं 3 ढ्ढ्रस् अधिकारी सीजीएमएससी की प्रबंध संचालक पद्मिनी भोई साहू, पूर्व प्रबंध संचालक चंद्रकांत वर्मा, पूर्व संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भीम सिंह से भी पूछताछ की गई थी।

मोक्षित कॉर्पोरेशन-पूर्व एजीएम के 5 ठिकानों पर दबिश : छापे की कार्रवाई में एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी कर्मचारियों के साथ सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की 25 सदस्यीय टीम भी शामिल थी। बता दें कि सीजीएमसी मैं हुए घोटाले को लेकर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ था। मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) में 660 करोड़ रुपए के रीएजेंट तथा उपकरण घोटाले में ईडी ने बुधवार को दुर्ग में मोक्षित कॉरपोरेशन और उसे संबंधित फार्म के साथ ही रायपुर के भाटागांव स्थित सीजीएमएससी के तत्कालीन उप महाप्रबंधक के पांच ठिकानों में छापा मारा। छापे की कार्रवाई में एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी कर्मचारियों के साथ सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की 25 सदस्यीय टीम भी शामिल थी। बता दें कि सीजीएमसी मैं हुए घोटाले को लेकर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ था। इसके बाद ईओडब्ल्यू और ईडी द्वारा छापेमारी की गई है।

नोटिस भेजकर अफसरों को तलब करेगी ईडी : छापेमारी के बाद ईडी जल्द ही स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को बयान लेने नोटिस जारी करेगी। रीजेंट और मेडिकल उपकरण की खरीदी के बाद संबंधित आपूर्ति वाले अस्पताल के अफसर और डिमांड आदेश जारी करने वालों को बुलवाया जाएगा। मोक्षित कार्पोरेशन ने अफसरों के साथ साठगांठ कर अलग-अलग जिलों में करोड़ों के मेडिकल उपकरण कई गुना कीमत पर आपूर्ति की थी। ज्यादातर आपूर्ति के कुछ माह बाद ही एक्सपायर हो गए। इनके सफेदपोशों के यहां छापेमारी : ईडी दुर्ग में मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा के साथ उसके रिश्तेदार सिद्धार्थ तथा शरद चोपड़ा के निवास तथा आवासीय परिसर में छापेमारी की। तलाशी के दौरान शशांक चोपड़ा और उसके रिश्तेदार के घरों से बड़ी संख्या में लेनदेन के दस्तावेज, वर्क आर्डर, मेडिकल से संबंधित सामानों की लिस्ट, बैंक ट्रांजैक्शन और निवेश से संबंधित दस्तावेज मिले हैं उक्त सभी को जांच के लिए जब्त किया गया है। हालांकि जांच एजेंसी द्वारा तलाशी में बरामद किए गए दस्तावेजों के संबंध में किसी भी तरह का खुलासा नहीं किया गया है। बता दे कि शशांक तथा कमलकांत ईओडब्लू द्वारा दर्ज रीएजेंट, उपकरण घोटाला केस में जेल भेजे गए हैं। प्रमुख आरोपियों की 40 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच : छत्तीसगढ़ में कथित मेडिकल घोटाला मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने मेडिकल घोटाला मामले में मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा और उनसे जुड़े लोगों और अन्य आरोपियों की करीब 40 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच करने का दावा किया है। ईडी की ओर से मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी पुष्टि की गई। ईडी ने दावा किया है कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी से जुड़े इनपुट मिले हैं। पीएमएलए एक्ट 2002 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है।

बता दें कि बीते 30 और 31 जुलाई को मामले के मुख्य आरोपी मोक्षित कारपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा, उनके परिवार के सदस्यों और उनकी व्यावसायिक संस्थानों और छत्तीसगढ़ राज्य के मेडिकल से जुड़े अधिकारियों व अन्य सहयोगियों के आवासीय व कार्यालय परिसरों पर छापेमार कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में बड़े पैमाने पर घोटाले से जुड़े दस्तावेज व अन्य जानकारियां मिलने की बात कही गई थी। 650 करोड़ का घोटाला का है आरोप : ईडी का दावा है की तलाशी के दौरान, जो अहम दस्तावेज मिले थे, उसके अलावा बैंक खातों में जमा राशि, डीमैट खातों में रखे शेयर और वाहनों के रूप में कुल 40 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के विभिन्न दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्तियां जब्त की गई। दरअसल, बीते 30 बाई 31 जुलाई को हुई कार्रवाई के बाद चर्चा थी कि सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल उपकरण, रीजेंट खरीदी में पिछली सरकार के दौरान करीब 650 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। इस मामले में राज्य सरकार की ईओडब्ल्यू और एसीबी विंग ने पहले ही छापामार कार्रवाई की थी। इस मामले में मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा समेत 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) से जुड़े अन्य लोगों के यहां भी करवाई होने की संभावना जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी भी की गई है।

ईडी की टीम फिर की बड़ी कार्रवाई : मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड में हुई गड़बड़ी मामले में ईडी की टीम फिर बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों की टीम ने दुर्ग के गंजपारा में इलाके में दबिश दी। ईडी के अधिकारी गंजपारा इलाके में मोक्षित कॉर्पोरेशन में जांच के लिए पहुंचे। टीम की जांच जारी है। मोक्षित कॉरपोरेशन के दुर्ग स्थित 3 घर और ऑफिस में दबिश दी गई। बताया जा रहा है कि 2 दर्जन से ज्यादा अधिकारियों ने बुधवार सुबह रेड की। ईडी की कार्रवाई के दौरान सीआरपीएफ के जवान भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। पूरी कार्रवाई छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड में हुई गड़बड़ी से जुड़ी हुई बताई जा रही है। इसी मामले में 6 महीने पहले ईओडब्ल्यू और एसीबी ने एक साथ रेड किया था। अब मोक्षित कॉरपोरेशन केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर है। 650 करोड़ से ज्यादा का ये घोटाला बताया जा रहा है।

जानें क्या है पूरा मामला : बता दें छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में खून की जांच और दवाओं की आपूर्ति के नाम पर सीजीएमएससी के अधिकारियों ने गरीब मरीजों की सेहत से खिलवाड़ किया था। सरकार इसमें एसीबी और ईओडब्ल्यू से जांच करा रही है। सीजीएमएससी के रिएजेंट किट, दवा खरीदी में 750 करोड़ के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने 5 अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इसमें सीजीएमएससी के जीएम टेक्निकल कमल कांत पाटनवार, बायोमेडिकल इंजीनियर खिरौद रावतिया, पूर्व जीएम ष्टत्ररूस्ष्ट बसंत कोशिक, स्वास्थय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और दीपर कुमार बांधे गिरफ्तार हुए थे। सभी को कोर्ट में पेश किया गया है और 15 दिन की पुलिस रिमांड के लिए आवेदन किया गया था। वहीं 3 ढ्ढ्रस् अधिकारी ष्टत्ररूस्ष्ट की प्रबंध संचालक पद्मिनी भोई साहू, पूर्व प्रबंध संचालक चंद्रकांत वर्मा, पूर्व संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भीम सिंह से भी पूछताछ की गई थी।

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