नाड़ा-पजामा छाप छुटभैया नेता अपनी पहुंच और रसूख का इस्तेमाल कर सरकार को दे रहे चुनौती

स्मार्ट सिटी में करोड़ों के घोटाले पुख्ता सबूत होने के बाद सरकार कब करेगी कार्रवाई
रायपुर स्मार्ट सिटी के मास्टर प्लान में बड़ा फर्जीवाड़ा, वित्त मंत्री ने दिया बयान
रायपुर ग्रामीण में - सरोरा, बिरगांव, रावाभाटा, उरकुरा, दलदलसिवनी, मोवा की उत्तरी सीमा तक
रायपुर पश्चिम में - सरोना, सोनडोगरी, चंदनडीह, अटारी, हीरापुर पश्चिम सीमा तक
रायपुर दक्षिण में - देवपुरी, बोरियाखुर्द, डुंडा, मठपुरैना, भाटागांव की दक्षिणी सीमा तक
रायपुर उत्तर में - खम्हारडीह, लाभांडी, फुंडहर, डूमरतराई की सीमा तक
रायपुर (जसेरि)। कांग्रेस की पाँच साल की भूपेश सरकार में नगर प्रशासन नगरीय निकाय और नगर निगम तीनों ने मिलकर जनता के पैसे की जमके बंदरबांट की और स्मार्ट सिटी घोटाले के अलावा नगरीय प्रशासन द्वारा दिए गई करोड़ों की धनराशि शासन की भारी भरकम योजनाओं को भी शहर विकास के लिए अनाप शनाप ठेकेदारों के माध्यम से सरकारी पैसों का बंदरबांट हुआ जिसका पुख्ता प्रमाण होने के बाद भी आखिर सरकार अब किसके आदेश का इंतजार कर रही है। तत्कालीन महापौर से लेकर स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने एैसी सोने की लंका बनाई जो जल तो गई पर एैंठन अभी तक नजर आ रही है। तत्कालीन परिषद में रावण राज चलता था, अधिकारियों ने अपने ठेकेदारों और संगे संबंधियों को लाभ पहुंचाने के लिए महापौर को बिना सिरपौर के स्मार्टप्रोजेक्ट बनानते ते ताकि राजधानी में कोई काम न हो पर काम होने जैसा नजर आए और करोड़ों रुपए अंदर हो जाए।
पिछले 6 महीने से भाजपा की पिरषद बनने के बाद पिछले 15 सालौं के घोटालों की जांच सीएजी सहित वित्तीय संस्थाएं कर रही है जिसमें साफ दिखाई दे रहा है है कि रायपुर स्मार्ट बनाने के फेर में नाड़ा पजामा छाप नेताओं अरबों डकारने के बाद अजगर की तरह अपने हाजमे का प्रदर्शन कर रहे है। आखिर सरकार अरबों डकारने वाले नाड़ा पजामा छाप नेताओं को क्यों बख्श रही है। क्या और प्रमाण जुटा रहे है या फिर कोई नया खेल चल रहा है।
विकास के नाम पर लूट का छूट : लगातार शहर विकास के लिए नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा रायपुर शहर में 10, हज़ार से ज़्यादा कार्य स्वीकृत किए थे पूर्व शासनकाल के पाँच साल में सरकारी पैसे का जमकर भ्रष्टाचार हुआ शायर में विकास के नाम पर कुछ भी पाँच साल में आम जनता को देखने नहीं मिला वही इस स्मार्ट सिटी का करोड़ों लाखों रुपया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया नाही जनता के लिए स्मार्ट टॉयलेट काम आए है नाहीं स्मार्ट बस स्टॉप, है न ही एलईडी काम आ रही है
स्मार्ट वही होता है जो सब कुछ पचा जाए, और बिना डकार के अरबों को पानी की तरह गटक जाए। रायपुर को भी अभिशाप है कि जब शहर को सजाने संवारने और सुंदर बनाने की सोच धरातल पर उतरेगी और फंड जारी होते ही सत्ता धारी दल के नेता और अधिकारी उस पर गिद्ध की तरह टूट पड़ेंगे। पिछले 25 सालों से राजधानी का तमगा लगाए रायपुर देश दुनिया को बता रहा है है कि मैं सबसे स्मार्ट हो गया हूं। यह आइना निगम के तत्कालीन सत्ताधारी दल के नेता और तत्कालीन अधिकारी शहर की जनता में यह भ्रम फैला कर राजनीति करने की सबसे निम्न स्तरीय सोच की साजिश की हिस्सा है। रायपुर का जो भी मेयर बना वह काजल की कोठरी बनी स्मार्ट सिटी की कालिख से बच नहीं पाया है। शहर में बने चौक -चौराहे स्मार्ट टायलेट, पिंक टाय़लेट और अन्य विकास कार्य अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे न कोई जनआंदोलन हो रहा न ही अधिकारी और नेता इस विषय पर कुछ बोलना पंसद कर रहे है स्मार्ट सिटी के पैसों को जमकर दुरूपयोग औऱ दोहन किया गया । नगर निगम प्रशासन और राज्य सासन को इस मामले को संज्ञान में लेकर तत्तकाल कार्रवाई करने से कई अधिकारी और नेता जेल की शोभा बढ़ा सकते है।
जांच में पाया कि नियमों के बाहर जाकर बदलाव किया गया -चौधरी : छत्तीसगढ़ की राजधानी के मास्टर प्लान में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। जांच समिति का मानना है कि व्यवस्थित शहर के लिए प्लान में एक तिहाई तक बदलाव करना होगा। दरअसल, मास्टर प्लान में मिली शिकायतों के बाद मार्च में पहली बार जांच समिति बनी थी। उसने जांच में पाया कि शहर के बड़े हिस्से में नियमों के बाहर जाकर बदलाव किया गया है। पूर्व कांग्रेस शासन काल में राजधानी के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग रायपुर ने वर्ष 2031 के लिए जो मास्टर प्लान लागू किया है इनमें थोक में गड़बडिय़ां पाई गई है। इसकी जानकारी प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आई है। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन अब दोबारा दावा-आपत्तियां मंगाने की तैयारी में है। यह दावा-आपत्ति सिर्फ उन्हीं प्रकरणों के लिए मंगाई जाएंगी, जिनमें गड़बड़ी मिली है।
जानकारी के मुताबिक, कमेटी की प्रारंमिक जांच में नये मास्टर प्लान में कई तरह की गड़बड़ी सामने आई है। इसमें कहीं जलाशय की जगह को आवासीय घोषित कर दिया गया है तो कहीं आवासीय क्षेत्र को जलाशय क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है। इसके अलावा कई जमीनों को आवासीय की जगह में तो कहीं कृषि भूमि को मिश्रित एवं व्यवसायिक क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। इस पूरे मामले में पार्षद एवं रूढ्ढष्ट सदस्य सुंदर जोगी का कहना है कि सरकार मास्टर प्लान को लेकर जो भी निर्णय लाए मंजूर है। वहीं पार्षद एवं उपनेता प्रतिपक्ष मनोज वर्मा ने कहा, पिछले कई बार हम मास्टर प्लान में हुई गड़बडिय़ों को लेकर नगर निगम की आमसभा में आवाज उठा चुके है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई है। इस बार बीजेपी की सरकार में जरूर जिम्मेदार पर गाज गिरेगा।
चौधरी ने जांच के निर्देश भी दिए : मास्टर प्लान में गड़बडिय़ों को लेकर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जांच के निर्देश भी दिए हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री चौधरी ने कहा, मास्टर प्लान के संबंध में अनेक बार यह विषय विधानसभा में भी उठा था। लगातार अनेक शिकायती भी हुई थी। अभी मास्टर प्लान की जो भी गड़बडिय़ां हुई है जो भी प्रक्रिया है गलतियां है गड़बडिय़ां है, किसी के द्वारा गलत किया गया हो उसके लिए एक कमेटी आवास पर्यावरण विभाग के अंतर्गत उसके जांच का काम कर रही है। जो भी गलत हुए हैं उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी। उसे ठीक करने का काम भी किया जाएगा।
2031 के मास्टर प्लान से पहले दो बार ही प्लान लागू किया : रायपुर शहर के 2031 के मास्टर प्लान से पहले दो बार ही प्लान लागू किया गया था। राज्य बनने के बाद पहला मास्टर प्लान 2000 में लाया गया था, जो 2001 से 2011 तक के लिए लागू था। फिर 2011 से 2021 तक लाया गया, लेकिन 2011 में जारी मास्टर प्लान विवादों के चलते पहले जारी किए गए। प्लान में कई संशोधन के बाद इसे 2011 में फिर से जारी किया गया था। 2021 के बाद 2031 तक के लिए तीसरा प्लान बनाया गया। बता दें कि रायपुर जिले में मास्टर प्लान को 2 पार्ट में तैयार किया गया है। पहला पार्ट 2023 से 2025 और दूसरा पार्ट 2026 से 2031 तक के लिए लागू किया जाएगा। पहला पार्ट पूरा होने के साथ ही दूसरे पार्ट को धरातल में लाया जाएगा। बनाए गए इस मास्टर प्लान गड़बडिय़ों से आने वाले समय में रायपुर जिले के रहवासियों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। लिहाजा मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश के बाद इस मास्टर प्लान की कड़ाई से जांच की जा रही है। पूरी जांच के बाद कुछ कहा जा सकता है।
बृजमोहन के सवाल पर तत्कालीन मंत्री डहरिया का जवाब
कांग्रेस शासन काल 2024 में विधानसभा में बृजमोहन अग्रवाल ने सवाल किया था कि रायपुर को विकास कार्यों के लिए कुल कितनी राशि आबंटित की गई थी। इसके जवाब में तत्कालीन नगरीय निकाय मंत्री डा. शिवडहरिया ने विधानसभा में बताया था कि रायपुर के विकास कार्य के कुल 9615 कार्य स्वीकृत प्रदेश शासन ने किए थे, जिसपर 1327करोड़ 39 लाख 32 हजार जिस पर खर्च किया गया। 13 हजार से ज्यादा की रकम डकारने के बाद भूपेश ने जांच भी नहीं की। 10 हजार करोड़ रायपुर शहर के लिए मंजूरी अब तक हो चुकी है। भारी भरकम रकम जनता का पैसा रायपुर शहर में तत्कालीन महापौर एजाज ढेबर ने अपने चेहते ठेकेदारों के माध्यम से बड़े कमीशन दर में आनन फानन में बेतुका तरीके से खर्च करना बताया।





