छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का रजत जयंती वर्ष : बदला दौर, अब चेहरों पर खुशहाली की झलक

Nil dhankar
27 Aug 2025 12:50 PM IST
छत्तीसगढ़ का रजत जयंती वर्ष : बदला दौर, अब चेहरों पर खुशहाली की झलक
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सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ति से आ रहा सकारात्मक सामाजिक- आर्थिक बदलाव

छत्तीसगढ़ राज्य इस वर्ष 2025 में अपनी स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। एक राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद छत्तीसगढ़ में अपनी सतत विकास यात्रा शुरू की। इस विकास यात्रा के दौरान कई चुनौतियां भी आईं। राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव के नेतृत्व में सरकार गठन के बाद अब तेजी के साथ सामाजिक आर्थिक विकास हो रहा है। राज्य में डबल इंजन की सरकार काम कर रही है और लोगों के चेहरे पर समृद्धि और खुशहाली की झलक भी नजर आने लगी है। सरकार ने सामाजिक आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लोक कल्याण की ऐसी योजनाएं तैयार की हैं, जिनके प्रभाव से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश के विकसित राज्यों में से एक होगा। पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने अनेक चुनौतियों के बावजूद सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य ने औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, और सामाजिक न्याय के क्षेत्रों में संतुलित विकास करते हुए देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। आगामी वर्षों में छत्तीसगढ़ को हरित विकास, डिजिटल नवाचार और सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता देते हुए और भी ऊंचाइयों तक पहुंचने की जरूरत है। यदि यही गति और समर्पण बना रहा, तो छत्तीसगढ़ "समृद्ध छत्तीसगढ़" की अवधारणा को साकार करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुनिश्चित करेगा।



25 वर्षों की विकास यात्रा

छत्तीसगढ़ राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था, जब यह मध्यप्रदेश से अलग होकर एक नया राज्य बना। जनजातीय बहुल यह प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों, खनिजों, सांस्कृतिक विविधता और कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है। अपने गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने विकास की एक लंबी और प्रेरणादायक यात्रा तय की है। यह यात्रा राज्य की आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में किए गए प्रयासों का सजीव प्रमाण है।

आर्थिक क्षेत्र में प्रगति

छत्तीसगढ़ ने बीते दो दशकों में आर्थिक मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। खनिज संसाधनों से समृद्ध यह राज्य देश की इस्पात, कोयला और बिजली उत्पादन में अग्रणी है। औद्योगिक विकास के क्षेत्र में विशेष रूप से भिलाई, कोरबा, रायगढ़ और जगदलपुर जैसे शहरों में तेजी से प्रगति हुई है। राज्य सरकार की औद्योगिक नीति ने निवेशकों को आकर्षित किया है और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। राज्य के बजट का आकार कई गुना बड़ा है जिससे अधोसंरचना और सामाजिक विकास में प्रगति आई है।

कृषि और ग्रामीण विकास

छत्तीसगढ़ को "धान का कटोरा" कहा जाता है। कृषि इस राज्य की रीढ़ है और किसानों की स्थिति सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं। बकाया धान बोनस भुगतान, पीएम किसान सम्मान निधि, ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी, सौर सुजला योजना जैसी योजनाएं किसानों को समृद्धि की ओर ले जा रही हैं। इन योजनाओं से किसानों को सीधा लाभ पहुंचा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। जल-संसाधनों के बेहतर उपयोग और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से कृषि उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार

राज्य सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। विद्यालयों के अधोसंरचना में सुधार, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, पीएम श्री विद्यालय, छात्रवृत्ति योजनाएं और "शालाओं का युक्तियुक्तकरण" जैसे कदमों से शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है। स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में मजबूती आई है और शहरों से लेकर गांवों तक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ है। नए मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों की स्थापना से सुदूर इलाकों तक लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुनिश्चित हुई है।

सामाजिक और सांस्कृतिक विकास

छत्तीसगढ़ ने अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति, नृत्य, संगीत, त्योहारों और जनजातीय परंपराओं को संरक्षित और प्रचारित करने का कार्य किया है। तीज-त्यौहार, जैसे हरेली, छेरछेरा, तीजा पोरा, करमा राज्य की सांस्कृतिक पहचान हैं। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग सांस्कृतिक पहचान स्थानीय महोत्सव और लोकपर्वों के आयोजन में सरकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकार के प्रयासों से बस्तर दशहरा जैसे लोक उत्सव को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

सामाजिक सशक्तिकरण

राज्य में महिला सशक्तिकरण, आदिवासी कल्याण, तथा बाल विकास के क्षेत्र में अनेक योजनाएं शुरू की गईं। महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए महतारी वंदन योजना चलाई जा रही है। इसके अलावा आत्मनिर्भरता के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत विभिन्न रोजगार मूलक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। श्रमिक परिवार के मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति योजना चलाई जा रही है। सखी वन स्टॉप सेंटर, सुपोषण अभियान, बिजली बिल हाफ योजना से समाज के सशक्तिकरण का रास्ता प्रशस्त हो रहा है।

सड़क और बुनियादी ढांचे का विकास

छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल लगातार विस्तृत हो रहा है। गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य सरकार की योजनाएं प्रभावी साबित हुई हैं। रेलवे, हवाई सेवा और नगरीय ढांचे में सुधार ने कनेक्टिविटी को नया आयाम दिया है। रायपुर का नया रेल कॉरिडोर, रायपुर- विशाखापट्टनम नई सड़क परियोजना, जगदलपुर हवाई सेवा और बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजना इसके उदाहरण हैं।

राज्य का बजट आकार

2001-02- 3,999 करोड़

2025-26- 1,65,000 करोड़

*राज्य सकल घरेलू उत्पाद*

2001-02- 25,845 करोड़

2025-26- 3,21,945 करोड़

*बेरोजगारी दर*

2017-18- 3.5%

2025-26- 2.5%

*शासकीय विद्यालय*

2001-02- 38050

2025-26- 56615

*शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या*

2001-02- 21000

2025-26- 278798

*शासकीय महाविद्यालय*

2001-02- 116

2025-26- 335

*विश्वविद्यालय*

2000- 4

2025- 26

*जिला अस्पताल*

2001-02- 6

2025-26- 27

*घरेलू विद्युतीकरण*

2001-02- 18 %

2025-26- 100 %

*राष्ट्रीय राजमार्ग*

2001-02- 1827 किलोमीटर

2022-23- 3482 किलोमीटर

*स्टेट हाईवे*

2001-02- 2074 किलोमीटर

2025-26- 4310 किलोमीटर

*ग्रामीण सड़क*

2001-02- 28393 किलोमीटर

2022-23- 160116 किलोमीटर

सामाजिक- आर्थिक बदलाव लाने वाली योजनाएं

*तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक वृद्धि*

तेंदूपत्ता संग्राहकों का संग्रहण पारिश्रमिक ₹4,500 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति मानक बोरा

*महतारी वंदन योजना*

माताओं- बहनों को प्रतिमाह ₹1000 की आर्थिक सहायता

*नियद नेल्ला नार योजना*

बस्तर के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के कैंपों के समीप स्थापित 324 गांवों में तीव्र सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए समन्वित योजना कार्यक्रम

*चरण पादुका योजना*

तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका का वितरण

*बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरण*

आदिवासी बाहुल्य बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में समन्वित विकास के लिए स्थापित विशेष प्राधिकरण

*प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि*

किसानों पर फसल उत्पादन के लागत मूल्य का बोझ कम करने के लिए आदान सहायता

*सौर सुजला योजना*

अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप की सहायता

*नक्सल उन्मूलन कार्यक्रम*

इस तीव्र अभियान के तहत पिछले डेढ़ वर्ष के अंदर 435 से अधिक नक्सलियों को किया न्यूट्रलाइज, 1450 से अधिक ने किया आत्म समर्पण

*सतत् विकास की राह*

*शिक्षा*सन् 2025

शिक्षा सूचकांक: 0.520 32 हजार 461 प्राइमरी स्कूल महिला साक्षरता 70% से अधिक 15 शासकीय और 18 निजी विवि 11 मेडिकल कॉलेज।

सन् 2000

शिक्षा सूचकांक: 0.249

प्राथमिक विद्यालयों की संख्या सीमित, ग्रामीण क्षेत्रों में कमी

महिला साक्षरता 50% से कम

उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या कम

*स्वास्थ्य*

सन् 2025

स्वास्थ्य सूचकांक: 0.672 शिशु मृत्यु दरः प्रति हजार जीवित जन्म पर 38 बदलाव लाने के लिए नक्सली इलाकों में पीएचसी-सीएचसी की शुरुआत

सन् 2000

स्वास्थ्य सूचकांक: 0.585

शिशु मृत्यु दरः प्रति हजार जीवित जन्म पर 67

कुल प्रजनन दर: 3.0 के आसपास

ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा कमजोर

*उद्योग*सन् 2025

औद्योगिक योगदान: 42.4% इस्पात, सीमेंट, बिजली उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में बड़े औद्योगिक निवेश क्षेत्र और औद्योगिक पार्क स्थापित

सन् 2000

औद्योगिक योगदान राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग 30%प्रमुख रूप से खनन और इस्पात आधारित उद्योग सीमित निवेश व बड़े औद्योगिक क्षेत्र कम

*रोजगार* सन् 2025

बेरोजगारी दरः 2.4% महिला श्रम भागीदारी दर: 59.8% महिला समूह योजनाओं से रोजगार में वृद्धि कृषि के साथ उद्योग, आईटी, पर्यटन, सेवा क्षेत्र व स्वरोजगार में भी रोजगार के अवसर

सन् 2000बेरोजगारी दर लगभग 6%

महिला श्रम भागीदारी दर 30%स्वरोजगार योजनाएं सीमित

छत्तीसगढ़ की ज़्यादातर आबादी सिर्फ खेती और पारंपरिक कामों पर निर्भर थी

*कृषि* सन् 2025

21.76 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का विस्तार सिंचाई नेटवर्क और खरीदी केंद्रों समेत उत्पादन तकनीक को बढ़ावा धान उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में वार्षिक वृद्धि दर: 7.8%

सन् 200013.28 लाख हेक्टेयर थी सिंचाई क्षमता

सिंचाई के सीमित संसाधन, वर्षा पर निर्भरता ज्यादा, तकनीक की कमी समर्थन मूल्य की नीति कमजोर थी राज्य में बैल और पारंपरिक औजार मुख्य थे

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