छत्तीसगढ़

बैंक में गिरवी रखी दुकान 21 लाख में बेची, आरोपी गिरफ्तार

Shantanu Roy
15 Oct 2026 6:13 PM IST
बैंक में गिरवी रखी दुकान 21 लाख में बेची, आरोपी गिरफ्तार
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बैंक से ऋण लेने के लिए बंधक रखी गई दुकान को बिना अनुमति दूसरे व्यक्ति को बेचने का मामला सामने आया है। तारबाहर थाना पुलिस ने इस धोखाधड़ी के मामले में 55 वर्षीय फनीन्द्र मिश्रा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने बैंक ऑफ इंडिया की व्यापार विहार शाखा में अपनी दुकान बंधक रखकर ऋण लिया और बाद में बैंक को जानकारी दिए बिना उसी दुकान को 21 लाख 11 हजार रुपए में बेच दिया। इतना ही नहीं, आरोपी पर संपत्ति से संबंधित तथ्यों को छिपाकर दुकान की रजिस्ट्री और नामांतरण कराने का भी आरोप है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

बैंक में दुकान गिरवी रखकर लिया था कर्ज
जानकारी के मुताबिक, नया रायपुर के सेक्टर-24 निवासी सूरज कुमार (41 वर्ष) ने तारबाहर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि बिलासपुर के विद्यानगर निवासी फनीन्द्र मिश्रा उर्फ फणीन्द्र (55 वर्ष) ने बैंक में बंधक रखी संपत्ति को धोखाधड़ीपूर्वक बेच दिया। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 16 अक्टूबर 2020 को वृंदावन कॉम्प्लेक्स के प्रथम तल पर स्थित दुकान क्रमांक ए-308 को बैंक ऑफ इंडिया की व्यापार विहार शाखा में बंधक रखा था। इस संपत्ति के एवज में आरोपी ने बैंक से ऋण प्राप्त किया था। दुकान बैंक के पास बंधक होने के कारण उसके हस्तांतरण के लिए ऋण अनुबंध की शर्तों और बैंक की अनुमति का पालन करना आवश्यक था।

21 लाख 11 हजार रुपए में बेच दी दुकान
पुलिस के अनुसार, आरोपी फनीन्द्र मिश्रा ने बैंक से ऋण लेने के बाद 11 जुलाई 2022 को उसी दुकान को बबीता बजाज नामक खरीदार को बेच दिया। दुकान की बिक्री 21 लाख 11 हजार रुपए में की गई थी। आरोप है कि इस सौदे से पहले आरोपी ने बैंक से आवश्यक अनुमति नहीं ली और बंधक संपत्ति होने की जानकारी भी छिपाई। बैंक के पास संपत्ति बंधक होने के बावजूद दुकान की खरीद-बिक्री होने से मामला सामने आया। शिकायत के बाद पुलिस ने संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू की।

शपथपत्र देकर कराई रजिस्ट्री और नामांतरण
मामले में यह भी आरोप है कि फनीन्द्र मिश्रा ने दुकान से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर शपथपत्र प्रस्तुत किया। इसके आधार पर दुकान की रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई गई। शिकायत में इसे बैंक और खरीदार के साथ धोखाधड़ी बताया गया है। पुलिस जांच में बैंक के ऋण दस्तावेज, संपत्ति के बंधक होने की जानकारी और बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।

बैंक की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ मामला
बैंक अधिकारियों की रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच के आधार पर तारबाहर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी द्वारा संपत्ति बंधक होने की जानकारी छिपाकर बिक्री करने का मामला सामने आया है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि दुकान की बिक्री किन परिस्थितियों में हुई और बैंक की अनुमति के बिना रजिस्ट्री तथा नामांतरण कैसे कराया गया।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा जेल
धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद तारबाहर पुलिस ने आरोपी फनीन्द्र मिश्रा की तलाश शुरू की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे स्थानीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश दिया।
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