बस्तर के इस गांव में पादरियों की एंट्री पर रोक, लगा बोर्ड

बस्तर से नक्सलवाद का नासूर तो खत्म हो गया, लेकिन धर्मांतरण का दंश अभी भी बाकी है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में #धर्मांतरण_कानून बनने के बाद से मतांतरण की गतिविधियों में कमी आई है और बस्तर के ग्रामीण भी पहले से अधिक सजग हुए हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में #Bastar जिले के बड़े बोदल गाँव की ग्रामसभा ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है। इसके तहत बाहरी पादरी या पास्टर को बिना अनुमति गाँव में प्रवेश करने की मनाही होगी। गाँव के मुख्य द्वार, अटल चौक पर इस संबंध में एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है। बोर्ड पर ईसाई धर्म की प्रार्थना सभाओं, धार्मिक आयोजनों और बाहरी धर्म प्रचारकों पर प्रतिबंध की बात लिखी गई है। साथ ही, हिंदू धर्म और संस्कृति को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ पंचायत द्वारा सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। ग्रामसभा ने अपने फैसले के लिए पेसा (PESA) कानून का हवाला दिया है। अब गाँव में किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले ग्रामसभा की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। #Chhattisgarh
— Anshuman Sharma (@anshuman_sunona) October 15, 2026





