छत्तीसगढ़

बस्तर के इस गांव में पादरियों की एंट्री पर रोक, लगा बोर्ड

Shantanu Roy
15 Oct 2026 1:19 PM IST
बस्तर के इस गांव में पादरियों की एंट्री पर रोक, लगा बोर्ड
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Bastar. बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बड़े बोदल गांव में धार्मिक गतिविधियों और बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश को लेकर ग्रामसभा ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामसभा ने गांव की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामाजिक विरासत के संरक्षण का हवाला देते हुए बाहरी पादरियों और पास्टरों के बिना अनुमति प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में गांव के मुख्य प्रवेश द्वार अटल चौक पर एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है।

अटल चौक पर लगाया गया सूचना बोर्ड
जानकारी के मुताबिक, बड़े बोदल गांव की ग्रामसभा ने प्रस्ताव पारित कर बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश और धार्मिक आयोजनों को लेकर नियम तय किए हैं। गांव के मुख्य द्वार अटल चौक पर लगाए गए बोर्ड में ईसाई धर्म की प्रार्थना सभाओं, धार्मिक कार्यक्रमों और बाहरी धर्म प्रचारकों से संबंधित प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है। बोर्ड पर गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ पंचायत की ओर से सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।


ग्रामसभा ने पेसा कानून का दिया हवाला
ग्रामसभा ने अपने निर्णय के समर्थन में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी पेसा (PESA) कानून का हवाला दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, गांव में किसी भी कार्यक्रम का आयोजन करने से पहले ग्रामसभा की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। ग्रामसभा का कहना है कि यह निर्णय गांव की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से लिया गया है।

धार्मिक आयोजनों के लिए अनुमति का प्रावधान
ग्रामसभा के प्रस्ताव के अनुसार, बाहरी पादरी या पास्टर को गांव में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पूर्व अनुमति लेनी होगी। सूचना बोर्ड में ईसाई प्रार्थना सभाओं और बाहरी धर्म प्रचारकों को लेकर प्रतिबंध की बात कही गई है। इस निर्णय के बाद गांव में धार्मिक गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर ग्रामसभा के फैसले को सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं को स्थानीय परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े अधिकार देता है। हालांकि, किसी धर्म विशेष के अनुयायियों के प्रवेश या प्रार्थना सभाओं पर प्रतिबंध की कानूनी वैधता अलग प्रश्न है, क्योंकि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की भी गारंटी देता है।
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