छत्तीसगढ़

वरिष्ठ समाजसेवी रामजीलाल अग्रवाल का 96 वर्ष की आयु में निधन, समाजसेवा और गौसेवा को समर्पित रहा पूरा जीवन

Shantanu Roy
24 May 2025 7:19 PM IST
वरिष्ठ समाजसेवी रामजीलाल अग्रवाल का 96 वर्ष की आयु में निधन, समाजसेवा और गौसेवा को समर्पित रहा पूरा जीवन
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज एक युग का अंत हो गया। अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर वर्तमान छत्तीसगढ़ तक समाज सेवा, गौसेवा और सामाजिक एकता के प्रतीक रहे वरिष्ठ समाजसेवी श्री रामजीलाल अग्रवाल ने 96 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। अपने जीवनकाल में उन्होंने न केवल अग्रवाल समाज बल्कि समूचे प्रदेश में मानवीय मूल्यों, सेवा भाव और सामाजिक समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी प्रेरणा के रूप में स्मरण करती रहेंगी।
राजस्थान के टीबा बसाई (झुंझनू) से आकर रायपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले रामजीलाल जी का जीवन संघर्ष, संकल्प और सेवा का परिचायक रहा। सन् 1951 में विवाह उपरांत रायपुर आकर उन्होंने रामसागरपारा में व्यवसायिक जीवन की शुरुआत की और शीघ्र ही समाजसेवा से जुड़ गए। सामाजिक सक्रियता का उनका सफर 1960 के दशक से आरंभ हुआ, जो अंतिम सांस तक जारी रहा।
सामाजिक और पारिवारिक जीवन का आदर्श स्वरूप
श्री रामजीलाल अग्रवाल एक आदर्श परिवार के मुखिया रहे। वे श्रीमती सावित्री देवी अग्रवाल के पति और सांसद एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल सहित गोपालकृष्ण, विजय, योगेश, यशवंत अग्रवाल के पिता थे। इसके अतिरिक्त वे विष्णु अग्रवाल के बड़े भाई, पूरनलाल, राजेन्द्र प्रसाद, कैलाश, अशोक अग्रवाल के चाचा, और देवेंद्र एवं गणेश अग्रवाल के ताऊजी थे। उनका विशाल परिवार आज भी सामाजिक व व्यावसायिक क्षेत्र में सक्रिय है, जो उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
नेतृत्व, संगठन और सेवा की त्रिवेणी
रामजीलाल जी ने समाज को एकजुट करने के लिए अनेक पहल की। वे चार बार रायपुर अग्रवाल सभा के अध्यक्ष बने, जिनमें तीन बार सर्वसम्मति से चुने गए। एक बार लोकतांत्रिक चुनाव के माध्यम से विजय प्राप्त की और उसके बाद प्रतिद्वंद्वी को गले लगाकर यह संदेश दिया कि समाज को जोड़ने के लिए दिल बड़ा होना चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण आज भी अनुकरणीय है।
महावीर गौशाला से उनका जुड़ाव 1967 से रहा और 1988 में वे इसके अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में गौशाला में शेड, हरे चारे और पानी की समुचित व्यवस्था हुई। गौसेवा को उन्होंने साधना का रूप दिया और छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें "राज्य अलंकरण" से सम्मानित किया।
एक व्यक्तित्व, जो सबका प्रिय बना
रामजीलाल जी अपने विनम्र, सादे और अनुशासित जीवन के लिए जाने जाते थे। गांधी टोपी और शुभ वस्त्रों में सदा सक्रिय रहने वाले इस कर्मयोगी से जो कोई एक बार मिल लेता, वह उन्हें भूल नहीं पाता। बीमारी के दौरान भी वे व्हीलचेयर पर बैठकर आने-जाने वालों से आत्मीयता से मिलते और भोजन का आग्रह करते – एक गुण जो आज दुर्लभ है। सुबह 4:30 बजे उठने की उनकी दिनचर्या अंतिम दिनों तक जारी रही। उनका जीवन संदेश देता था कि आत्मविश्वास और कर्मठता से कोई भी परिस्थिति पार की जा सकती है। वे कहा करते थे कि "दुख और निराशा पानी के बुलबुले की तरह हैं – टिकते नहीं।"
सम्मान और प्रेरणा की गौरवगाथा
श्री रामजीलाल अग्रवाल को उनके सामाजिक योगदान के लिए देश के अनेक प्रतिष्ठित नेताओं ने सम्मानित किया, जिनमें तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत, हरियाणा के मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और गुजरात के राज्यपाल शामिल हैं। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी में भी उन्हें सदस्य के रूप में चुना गया।
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