छत्तीसगढ़

बसवराजू के खात्मे पर DGP अरुण देव गौतम को मिली बधाइयों की बौछार

Shantanu Roy
24 May 2025 6:39 PM IST
बसवराजू के खात्मे पर DGP अरुण देव गौतम को मिली बधाइयों की बौछार
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) में आज का दिन खास रहा। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम से एक विशेष मुलाकात के दौरान नक्सल विरोधी अभियान में हालिया सफलता को लेकर उन्हें न केवल प्रशंसा मिली, बल्कि राज्य भर से शुभकामनाओं और बधाइयों का भी तांता लग गया। इस अवसर पर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के छत्तीसगढ़ प्रांत के सभी पदाधिकारियों एवं संगठन के कार्यकर्ताओं ने
DGP
गौतम को नक्सली कमांडर बसवराव राजू के खात्मे और उसकी टीम के सफाए पर हृदय से बधाई और शुभकामनाएं दीं। पार्टी की ओर से कहा गया कि यह सफलता केवल एक रणनीतिक विजय नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ को शांति और विकास के रास्ते पर अग्रसर करने वाला निर्णायक कदम है।
नक्सली कमांडर बसवराव राजू का खात्मा — एक ऐतिहासिक उपलब्धि
बसवराव राजू नक्सलवाद की उस विचारधारा का प्रतिनिधि चेहरा था, जिसने दशकों तक छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में विकास की गति को बाधित किया और आम नागरिकों को भय के वातावरण में जीने पर मजबूर किया। हालिया ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने जबरदस्त संयोजन और सूझबूझ का
परिचय
देते हुए इस वांछित नक्सली को ढेर कर दिया। बसवराजू लंबे समय से सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में शामिल था और उसकी गतिविधियों से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी खतरा था। उसका खात्मा सुरक्षा बलों की सूचनात्मक रणनीति, धरातलीय समन्वय और नेतृत्व क्षमता की मिसाल है।
DGP अरुण देव गौतम की नेतृत्व भूमिका
DGP अरुण देव गौतम की रणनीतिक सूझबूझ और नेतृत्व के कारण यह ऑपरेशन इतना सफल हो सका। उन्होंने न केवल खुफिया एजेंसियों और जमीनी सुरक्षा बलों के बीच सामंजस्य स्थापित किया, बल्कि हर स्तर पर अभियान की निगरानी की। गौतम साहब के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ पुलिस ने आधुनिक तकनीक, ड्रोन सर्विलांस, और लोकल इंटेलिजेंस नेटवर्क को सशक्त करते हुए नक्सलियों के खिलाफ कई प्रभावी कार्रवाई की हैं।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से समर्थन
इस मौके पर RPI (आठवले) के नेताओं ने कहा, "हम सब छत्तीसगढ़ के सशक्त भविष्य के लिए गौतम साहब जैसे मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व का सम्मान करते हैं। नक्सलवाद से मुक्ति केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक मुक्ति का भी प्रतीक है।" उन्होंने आगे कहा कि नक्सलवाद का खात्मा राज्य के विकास और निवेश की राह को प्रशस्त करेगा, जिससे आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस बल के प्रयासों से राज्य लगातार नक्सल मुक्त होने की दिशा में अग्रसर है। अब तक दर्जनों हार्डकोर नक्सलियों को या तो मारा गया है या आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया गया है। हाल के वर्षों में नक्सल प्रभावित जिलों में सड़कें, स्कूल और अस्पताल बन रहे हैं, जो कि बदले हुए परिदृश्य का संकेत है।
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