जनता से रिश्ता के स्थापना दिवस पर जल संरक्षण विषय पर संगोष्ठी आयोजित

मिड-डे अखबार जनता से रिश्ता के 13 वें स्थापना दिवस पर जल संरक्षण पर आयोजित संगोष्ठी में बुद्धिजीवियों ने जल को इस धरती की सबसे अमूल्य़ धरोहर कहा। वक्ताओं ने कहा कि आज जो स्थिति निर्मित हुई है उसके पीछे बिना सोचे समझे विकास के नाम पर जंगलों की अंधाधुंध कटाई है। पेड़ों से पयार्वरण संरक्षित होने से जल भी संरक्षित होता है। पेड़ों की कटाई के कारण जल संकट उत्पन्न हुआ है। इसे मानव मूल्यों के विकास के लिए यदि पेड़ों की कटाई हो रही है तो एक पेड़ काटने पर 10 पेड़ लगाए और उसे अपनी जिम्मेदारी के सात घऱ के सदस्य के रूप में पालन पोषण करें तो आने वाले संंकटों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। नहीं तो पानी के लिए सभी को दौडऩा पड़ेगा। अपार धन संपदा के लालच में जल संरक्षण को अनदेखा करने पर आने वाले दिनों में इससे भी ज्यादा भयावह संकट झेलना पड़ सकता है।
जल को संरक्षित करने वर्षा जल को संग्रहित करें: पप्पू फरिश्ता
जनता से रिश्ता के प्रधान संपादक पप्पू फरिश्ता जल संरक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू जल संचयन है। वर्षा के पानी को संचित करना एक प्रभावी उपाय है, जो न केवल जल की उपलब्धता को बढ़ाता है, बल्कि भूजल स्तर को भी बनाए रखता है। विभिन्न तकनीकें जैसे कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जलाशयों का निर्माण, और तालाबों का निर्माण जल संकट को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसके साथ ही, जल पुनर्चक्रण तकनीकें भी एक महत्वपूर्ण कदम हैं। हमें अपने घरों और समुदायों में जल पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए, जिससे हम उपयोग किए गए जल को फिर से उपयोग में ला सकें। जल के संरक्षण के लिए हमें सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। यह केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के प्रत्येक सदस्य को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। शिक्षा और जागरूकता का स्तर बढ़ाना बेहद जरूरी है। हमें बच्चों और युवा पीढ़ी को जल के महत्व और उसके संरक्षण के तरीकों के बारे में शिक्षित करना चाहिए। विद्यालयों और कॉलेजों में जल संरक्षण पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, जिससे युवा वर्ग में जल के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
समुदाय में जल संरक्षण की जागरूकता फैलाने के लिए कई प्रकार के अभियानों का आयोजन किया जा सकता है। जल की बर्बादी रोकने के लिए पब्लिक वर्कशॉप्स, सेमिनार, और जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके जल संरक्षण के महत्व के बारे में संदेश फैलाना भी प्रभावी हो सकता है। इसके साथ ही, सुरक्षित पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल संचय की तकनीकों का उपयोग करना चाहिए। जल की एक-एक बूंद कीमती है, और इसके संरक्षण के लिए जागरूकता जरूरी है। जल संरक्षण के माध्यम से हम स्वच्छ और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं और आने वाली पीढिय़ों को भी संतोष और सुरक्षा दे सकते हैं।
आज मैं जद में हूं तो इतना खुश गुमान ना हो, चिराग़ बुझेगी तो सब की बुझेगी...
जनता से रिश्ता के स्थापना दिवस पर जल बचाओ विषय पर हुई परिचर्चा में राज.संपादक ज़ाकिर घुरसेना ने कहा कि यदि हम अपना कल महफूज़ रखना चाहते हैं तो आज हर हाल में पानी बचाना होगा। शायर और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी द्वारा संसद में पढ़े गए शेर का जिक्र करते हुए मै पानी बचाने की अहमियत को बता रहा हूं। शेर में कहा गया था कि आज मैं जद में हूं तो इतना खुश गुमान ना हो, चिराग़ बुझेगी तो सब की बुझेगी, हवा किसी की नहीं होती। जंगल में जब आग लगती है तो न वो बरगद बचती है जो हवा को आंधी में तब्दील करती है और वो बांस भी नहीं बचती जो रगडक़र चिंगारी पैदा करती है। यानी जितना पानी हम बर्बाद करेंगे आने वाले दिन में हमें उतनी ही तकलीफ उठानी होगी। इस परेशानी का सामना सब को करना पड़ेगा। इस्लाम धर्म में भी पानी बचाने की बड़ी फजीलत बताई गई है अधिक पानी फेंकने वालों को अल्लाह के अजाब का सामना करना होगा और एक एक बूंद पानी का हिसाब देना होगा। किसी के नहीं रहने या किसी चीज़ की कमी पडऩे पर उसकी अहमियत का पता चलता है। पानी की अहमियत प्यासा ही जनता है। जिस इंसान का पेट भरा हो और उसके सामने खाना रखा जाए तो उसे खाने की अहमियत समझ में नहीं आएगी और यदि भूखे के सामने खाना रखा जाए तो वह उसकी अहमियत समझेगा। ठीक इसी तरह पानी भी है। लोग बेतहाशा बरबादी कर रहे हैं। पर्यावरण में हरियाली लाने हो या इंसान के लिए हो बहुत ही जरूरी होता है पानी। शायरों ने भी पानी को लेकर तरह तरह की शायरी किए हैं। पानी की रवानी को शायरों ने जिंदगी की गतिशीलता से भी जोड़ा है उनके मुताबिक पानी का ठहर जाने की तुलना जिंदगी के ठहर जाने से किया है। मेरे गांव में आज की स्थिति में पानी की किल्लत है सारे कुएं सूख गए हैं ट्यूबवेल से भी पानी नहीं आ रहा है। अभी फि़लहाल दो बोर ही है जिससे पीने के लिए उपयोग में ले रहे हैं। मजबूरन मेरे भाइयों को गांव से रायपुर और बिलासपुर की ओर रुख करना पड़ा है। सरकार को चाहिए गर्मी में धान की फसल लेने के बजाय चना, गेहूं या सब्जी बोने के लिए किसानों को प्रेरित करें ताकि पानी का उपयोग कम हो और फ़ायदा भी ज़्यादा हो। खास मौके पर ही हम लोग पानी बचाने की बात करते और सोचते हैं, देश के के बड़े शहरों में आज पानी की किल्लत हो गई है जिससे लोग शहर छोड़ रहे हैं। शायर मुजफ्फर वारसी ने ठीक ही कहा है कि हाथ आंखों पे रख लेने से खतरा नहीं जाता, आज हम सिर्फ पानी पर गुफ्तगू कर लें सिर्फ इससे पानी बचाया नहीं जा सकता। परेशानी अगर आने वाली है तो हमें अभी से हल के बारे में भी सोचना होगा। मेरे गांव की भयावह स्थिति तो मैने अभी देख ही लिया है। रविवार को मै गांव जाता ही हूं लेकिन अभी भाइयों ने आने से मना कर दिया और खुद भी रायपुर आ पहुंचे, वजह पानी नहीं है। पानी यदि इंसान के जीवन में नहीं है तो मरा और आंख से भी पानी उतर जाए तो उस इंसान को मरा हुआ ही जानो। पानी का इंसान के जीवन में बहुत अहमियत है। हमे आज ही यह अहद करना होगा शपथ लेना होगा कि हमको हर हाल में पानी बचाना है। दूसरी बात यह भी है कि पानी बचाओ, पर्यावरण बचाओ के लिए कुछ खास वर्ग के लोग ही देखे जाते हैं यानी जिनके पास जीविका के भरपूर साधन हैं ऐसे लोग जो पानी को ही जीविका के साधन मान रहे हैं उन्हें भी इसके उपयोग और दुरुपयोग के बारे में बताना होगा। सिर्फ पानी बचाओ पर्यावरण बचाओ संगोष्ठी करके इतिश्री करना किसी भी ठोस परिणाम के लिए नाकाफी है। सभी वर्गों को इस मुहिम में शामिल करने से ही कुछ भला हो सकता है। ये तो सच है कि जिस स्तर से वाटर लेबल डाउन हो रहा है आने वाला कल भयावह होगा इससे इनकार नहीं किया जा सकता इसलिए समय रहते इसके लिए गंभीरता दिखाना होगा।
टैंकरों के भरोसे रायपुर के रहवासी, बंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार
सह संपादक कैलाश यादव वे कहा जनता से रिश्ता ने जनसरोकार के तहत शहर भीषण समस्य़ा पर संगोष्ठी का आयोजन किया जिसमें वक्ताओ्ं ने रायपुर की सबसे विकराल समस्या पर विचार मंथन किया। वक्ताओ् ने कहा कि पानी भी राजनीति की शिकार हो गई है। पानी वालों को ही पानी नसीब हो रहा है। पानी पर एक खासवर्ग का कब्जा है जो अपनी गाड़ी को धोने में हजार-2 हजार लीटर पानी फेंक सकते है पर शहर में प्यासी जनता को एक बाल्टी पानी मुहैया नहीं करा सकते है। राजधानी में निगम में सत्ता किसी भी पार्टी की हो मार्च से जून तक पानी की समस्या से जूझना अब रायपुरवासियों की आदत में शामिल हो चुका है। कांग्रेस हो या भाजपा की परिषद हो पानी को लेकर किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई । लोगों की सहानुभूति हासिल करने बड़े -बड़े दावे और वादे करने में राय़पुर के पार्षदों से बड़ा कोई नेता ही नहीं हो सकता। निगम में जिसकी भी सत्ता होती है वो पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर पानी की राजनीति से बच नहीं सकती। निगम की सत्ता में काबिज नेताओ्ं ने इसे अपनी निजी जागीर की तरह उपय़ोग करते है। पानी तो बहाना होता है पर असल में वह राजनीति का हिस्सा होता है। जो लोग निगम चुनाव में वोट नहीं िदया या पार्षद प्रत्याशी को सहयोग नहीं दिया तो वो जीतने के बाद अपने वार्ड की समस्या का समाधान करना चाहिए उसे छोडक़र प्रताडि़त करने की राजनीति करते है। अपनी निजी जागीर समझ कर अपने अधिकार का दुरुपयग करते है।
70 वार्ड में 43 पानी टंकियां
महानगर की तर्ज पर रायपुर शहर तेजी से विकसित होता जा रहा है. विकसित होते शहर पर उसी तेजी से आबादी का भी दबाव बढ़ता जा रहा है. जितनी तेजी से आबादी बढ़ रही है उतनी तेजी से वाटर सोर्स नहीं बढ़े हैं. वर्तमान में रायपुर नगर निगम की आबादी लगभग 15 लाख है. ऐसे में वर्तमान समय में रायपुर नगर निगम में 70 वार्ड में 43 पानी टंकियो के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है.
जल...हमारे अस्तित्व का एक सत्य ...
जनता से रिश्ता के समाचार संपादक अतुल्य चौबे ने कहा- जल हमारे जीवन का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण तत्व है। यह न केवल हमारे शरीर के ऊर्जा स्रोत, स्वास्थ्य, और संतुलित विकास की नींव है, बल्कि जीवन के सभी पहलुओं में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है। जल के बिना न तो हमारा अस्तित्व संभव है और न ही कोई जीवित रचना आ सकती है। हमारे आस-पास के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र में जल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जल का महत्व सिर्फ मानव जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी जीवों के लिए आवश्यक है। पेड़-पौधों से लेकर जानवरों तक, हर जीव को अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जल की जरूरत होती है। हमारे खाद्य चक्र का आधार जल है, क्योंकि जल के बिना कृषि असंभव है। कृषि से मिलने वाला भोजन न केवल हमारे शरीर को पोषण देता है, बल्कि यह हमारी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करता है।
स्वच्छ जल केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्वच्छ जल पीने से विभिन्न बीमारियों, जैसे डायरिया, हैजा, और अन्य जलजनित रोगों से बचा जा सकता है। इसलिए, जल के माध्यम से स्वास्थ्य की सुरक्षा करना हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है। एक स्वस्थ व्यक्ति ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकता है, और इस प्रक्रिया में जल की भूमिका अविस्मरणीय है। इसके अतिरिक्त, जल हमें स्वच्छता, समृद्धि, और विकास की दिशा में अग्रसर करता है। जल का उपयोग न केवल व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह हमारे चारों ओर के वातावरण को भी साफ-सुथरा रखने में मदद करता है। नदियों, तालाबों, और झीलों का अस्तित्व केवल जल का स्रोत नहीं है, बल्कि ये हमारे प्राकृतिक सौंदर्य और पारिस्थितिकी तंत्र का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये जल निकाय न केवल जल का संग्रह करते हैं, बल्कि वे जलवायु नियंत्रण और जैव विविधता के संरक्षण में भी मदद करते हैं।
जल की कमी एक गंभीर वैश्विक मुद्दा बन चुकी है।
आज कई देश जल संकट का सामना कर रहे हैं। भारत जैसे देश में, जहां जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, जल की उपलब्धता में कमी आ रही है। कई क्षेत्रों में सूखा और अकाल जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं, जो कृषि और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। विभिन्न समाचार रिपोर्टों में बताया गया है कि कई राज्यों में पानी की भारी कमी हो रही है, जिससे लोग त्रस्त हैं। बढ़ती जनसंख्या, विनियमित जल उपयोग, और अवैध जल प्रदूषण के कारण नदियां, झीलें, और अन्य जल संरचनाएं प्रदूषित हो रही हैं। इससे पृथ्वी के जल संसाधनों की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है और पानी के उपयोग की उचित व्यवस्था में कमी होती है। जल के महत्व को समझकर हमें जल संरक्षण के लिए सजग और सतर्क बनना चाहिए। हमें जल की बचत करनी चाहिए, अपने उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए, और जल संसाधनों को संरक्षित रखने के लिए जल संरचना को सुधारना चाहिए। अंत में, जल के महत्व को पहचानना और इसके संरक्षण को प्राथमिकता देना हम सभी की जिम्मेदारी है। यह न केवल हमारे जीवन के लिए आवश्यक है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, पर्यावरण, और समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। जल हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है, और इसे बचाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। हमें यह समझना होगा कि "जल ही जीवन है" केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि यह हमारे अस्तित्व का एक सत्य है, जिसे हमें अपने व्यवहार में अपनाना चाहिए। जल का संरक्षण न केवल हमारे लिए, बल्कि पूरी धरती के लिए अनिवार्य है।





