छत्तीसगढ़

SECL को हाईकोर्ट से राहत, टेंडर प्रक्रिया में कंपनी को शर्तों की व्याख्या का है अंतिम अधिकार

Nilmani Pal
17 March 2026 4:14 PM IST
SECL  को हाईकोर्ट से राहत, टेंडर प्रक्रिया में कंपनी को शर्तों की व्याख्या का है अंतिम अधिकार
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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एसईसीएल के टेंडर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि टेंडर की शर्तों की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार उस विभाग या कंपनी के पास है जिसने टेंडर जारी किया है.

एसईसीएल ने कोरबा क्षेत्र की बगदेवा भूमिगत खदान के लिए नवनिर्मित स्वदेशी कंटीन्युअस माइनर मशीन के लिए ट्रायल टेंडर जारी किया था. रायपुर की कंपनी मोश वरया ने इसके लिए बोली लगाई और सैंडविक मॉडल एमसी-350 मशीन का प्रस्ताव दिया.

कंपनी का दावा था कि यह मशीन पुणे में बनी है और इसमें 57.23% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है,इसलिए इसे नवनिर्मित माना जाए. एसईसीएल की टेक्निकल कमेटी ने कंपनी की बोली यह कहते हुए खारिज कर दी कि सैंडविक का यही मॉडल पहले से ही हल्दीपला खदान में काम कर रहा है. जबकि टेंडर की स्पष्ट शर्त थी कि मशीन नवनिर्मित होनी चाहिए और भारत की किसी भी खदान में पहले उपयोग नहीं की गई होनी चाहिए. सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि टेंडर जारी करने वाली अथॉरिटी प्रोजेक्ट की जरूरतों को समझने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में होती है. कोर्ट तब तक ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता जब तक कि निर्णय पूरी तरह से मनमाना या दुर्भावनापूर्ण न हो.

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