छत्तीसगढ़

अनुसूचित जाति बालक प्री-मेट्रिक छात्रावास बना शिक्षा और अनुशासन का मॉडल

Shantanu Roy
24 April 2026 6:55 PM IST
अनुसूचित जाति बालक प्री-मेट्रिक छात्रावास बना शिक्षा और अनुशासन का मॉडल
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Mahasamund. महासमुंद। जिले के बागबाहरा स्थित अनुसूचित जाति बालक प्री-मेट्रिक छात्रावास में शिक्षा, अनुशासन और करियर मार्गदर्शन के जरिए छात्रों का भविष्य संवर रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के छात्र बड़े लक्ष्य तय कर उन्हें हासिल करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। छात्रावास अधीक्षक मनोज चौधरी के मार्गदर्शन में शैक्षणिक वातावरण को मजबूत किया गया है, जिसका सीधा असर छात्रों के परिणामों पर दिखाई दे रहा है। इस वर्ष छात्रावास के 7 छात्रों का चयन प्रतिष्ठित प्रयास आवासीय विद्यालय के लिए हुआ है। एक ही छात्रावास से इतने छात्रों का चयन होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है और यह यहां दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता को दर्शाता है।
छात्रावास केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यहां के एक छात्र ने कड़ी मेहनत के बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में चयन प्राप्त किया है, जो अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है। शैक्षणिक प्रदर्शन की बात करें तो कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में छात्रावास के दो छात्रों ने अपने-अपने विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि छात्रावास में पढ़ाई को गंभीरता से लिया जा रहा है और नियमित मार्गदर्शन दिया जा रहा है। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यहां डिजिटल बोर्ड के माध्यम से स्मार्ट लर्निंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इससे छात्रों को तकनीकी तरीके से पढ़ाई करने में मदद मिल रही है और वे प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर पा रहे हैं।
छात्रावास में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और अनुशासन पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। छात्रों के शारीरिक विकास के लिए ओपन जिम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे पढ़ाई के साथ अपने स्वास्थ्य को भी संतुलित रख सकें। यहां का वातावरण सकारात्मक और घर जैसा महसूस कराने वाला बताया जाता है, जिससे छात्र मानसिक रूप से भी बेहतर प्रदर्शन कर पा रहे हैं। छात्रावास अधीक्षक मनोज चौधरी ने बताया कि बच्चों को सही मार्गदर्शन, अनुशासन और निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि वे अपने जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल कर सकें। उनका कहना है कि ग्रामीण और सीमित संसाधनों वाले छात्रों को भी अगर सही दिशा मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं। यह छात्रावास अब केवल रहने और पढ़ाई का स्थान नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा केंद्र बन गया है जहां से छात्रों के सपनों को दिशा और मजबूती मिल रही है। यहां की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से हर लक्ष्य को पाया जा सकता है।
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