छत्तीसगढ़

सड़क किनारे लावारिस पड़ी तेंदूपत्तों की बोरियां, बारिश में बर्बादी की आशंका

Shantanu Roy
8 July 2026 9:53 PM IST
सड़क किनारे लावारिस पड़ी तेंदूपत्तों की बोरियां, बारिश में बर्बादी की आशंका
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Jagdalpur. जगदलपुर। बस्तर संभाग में आदिवासी और स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख साधन माने जाने वाले तेंदूपत्ते को लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय के नजदीक ग्राम सरगीपाल में सड़क किनारे तेंदूपत्तों से भरी कई बोरियां लावारिस हालत में पड़ी मिली हैं। बारिश के मौसम में इन कीमती पत्तों के खराब होने की आशंका जताई जा रही है। तेंदूपत्ता बस्तर क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे स्थानीय लोग "हरा सोना" भी कहते हैं, क्योंकि इसके संग्रहण से हजारों परिवारों को रोजगार और आय का साधन मिलता है। ऐसे में सड़क किनारे बड़ी मात्रा में तेंदूपत्तों का इस तरह पड़े रहना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, जगदलपुर जिला मुख्यालय के समीप ग्राम सरगीपाल में सड़क किनारे तेंदूपत्तों से भरी कई बोरियां दिखाई दीं। बताया जा रहा है कि रखरखाव और सुरक्षा के अभाव में बोरियों की सिलाई खुल गई है, जिससे तेंदू के पत्ते सड़क पर बिखर रहे हैं। स्थानीय लोगों का अनुमान है कि बीते दिनों इस मार्ग से तेंदूपत्तों से भरा कोई मालवाहक वाहन गुजर रहा होगा। आशंका है कि वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हुआ होगा, जिसके बाद वाहन को तो वहां से हटा लिया गया, लेकिन तेंदूपत्तों से भरी कुछ बोरियां सड़क किनारे ही छोड़ दी गईं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में बारिश शुरू हो चुकी है। यदि जल्द ही इन बोरियों को सुरक्षित स्थान या गोदाम तक नहीं पहुंचाया गया तो नमी के कारण तेंदूपत्ते खराब हो सकते हैं। इससे न केवल वन संपदा का नुकसान होगा, बल्कि उन लोगों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिनकी मेहनत से इन पत्तों का संग्रहण किया गया है। तेंदूपत्ता संग्रहण बस्तर क्षेत्र के हजारों आदिवासी परिवारों के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम है। ग्रामीण जंगलों से तेंदूपत्ते एकत्र कर अपनी आय अर्जित करते हैं। इसके बाद इन पत्तों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संग्रहण केंद्रों और गोदामों तक पहुंचाया जाता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क किनारे पड़े इन तेंदूपत्तों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए, ताकि बारिश के कारण होने वाली बर्बादी को रोका जा सके। साथ ही उन्होंने संबंधित विभाग से इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेंदूपत्ता केवल एक वन उपज नहीं बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है। इसकी सुरक्षा और उचित भंडारण की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सड़क किनारे पड़ी तेंदूपत्तों की बोरियां किसकी हैं और इन्हें यहां किस परिस्थिति में छोड़ा गया। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और खराब होने से पहले इन कीमती पत्तों को सुरक्षित किया जाता है या नहीं।
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