
कोयला लेवी के करोड़ों रुपए लेकर पार्टी औऱ पत्रकारों का हिस्सा खाया
बंटई के पैसे में सबसे ज्यादा प्रवक्ताओं में आरपी सिंह ने काटी चांदी
आरपी सिंह तो पत्रकारों को कुछ समझता ही नहीं था, वो खुद को ही संपूर्ण मीडिया समझता था, जबरन पत्रकारों का नाम ले रहा है
एक-दो फर्जी पत्रकारों को पैसा और दारू पिलाकर पूरे पत्रकार विरादरी को बदनाम कर रहा, कड़ी कार्रवाई हो
अगर दिया हो तो किन-किन पत्रकारों को पैसा दिया नाम उजागर हो
भूपेश बघेल ने आरपी सिंह, रामगोपाल अग्रवाल पप्पू बंसल जैसे कई परदेशिया लोगों को वसूली के लिए अपने साथ रखा था
इन सभी नेताओं ने जमकर प्रॉपर्टी और गाडियां खरीदी
रायपुर । छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला केस में ईडी की चार्जशीट में एक और खुलासा हुआ है। 570 करोड़ में सबसे ज्यादा फायदा 8 नेताओं और अफसरों को मिला। नेताओं और अफसरों ने कोल स्कैम के पैसों से जमकर प्रॉपर्टी खरीदी। गहने खरीदे और चुनाव में लाखों रुपए उड़ाए। अब ईडी आरपीसिंह से जानना चाह रही है कि कौन -कौन से पत्रकार और मीडिया घराने को कितना-कितना पैसा दिया। पैसा लेने पत्रकारों की एक डायरी ईडी को मिली है जिसके आधार पर ईडी उन पत्रकारों से जानना चाहती है किस खबर को रोकने के लिए कितना पैसा दिया। इस मामले में मजेदार मोड आ गया है, पत्रकार भी ईडी वालों के पास पहुंच गए है कि आऱपीसिंह ने किन-किन पत्रकारों को कितना पैसा दिया। ईडी भी आरपी सिंह से पूछताछ में बार -बार यही पूछ रही है कि किसको -किसको कब -कब कितना पैसा दिया। ये उपहार थे या सरकार के खिलाफ घोटाले वाले खबर को रोकने के लिए दिए गए थे।
आरपी बांटने का पैसा लेकर खुद गटक गया
आरपीसिंह कांग्रेस के मीडिया प्रवक्ता के नाम पर अखबार मािलकों और पत्रकारों को मैनेज करने के नाम पर पार्टी से पैसा लेकर खुद गटक जाता था, लगातार सरकार के खिलाफ मीडिया में खबरें चलने के बात भूपेश सरकार के कर्ताधर्ताओं आरपीसिंह की क्लास लगाई तो पता चला कि उसने कोयला लेवी के पैसे तो ले लिए और खुद अपनी प्रापर्टी बनाकर पत्रकारों और मीडिया हाउस के मालिकों को पैसा नहीं देने के बाद लगातार सरकार विरोधी खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार परेशान हो गई । आऱपीसिंह तो पत्रकारों से सीधे मुंह बात तक नहीं करता था, उसका टेटर किसी मंत्री से कम नहीं था, पत्रकारों के फोन तक रिसीव नहीं करता था, जबिक पार्टी के मीडिया प्रभारी सुशील आनंद शुक्ला बार -बार कहते रहे कि मीडिया घराने और पत्रकारों के लिए पार्टी ने आरपी सिंह को पैसा दे दिया है। आप लोग उनसे संपर्क करें. इस तरह आरपीसिंह सरकार के खिलाफ विरोधी गतिविधियों संलिप्त रहा। उसे 2018 में कांग्रेस की सरकार बनते ही मीडिया विभाग में प्रवक्ता बना दिया गया जिसका लाभ सरकार के खसकने तक आरपी सिंह उठाता रहा है। जब इस संबंध में छत्तीसगढ़ के पत्रकारों से सच जानने कुछ नामचीन पत्रकारों से पूछने पर बताया कि आरपीसिंह एक नंबर का झूठा कांग्रेसी है, एक आज तक किसी भी एक अठन्नी तक नहीं दिया बल्कि उनके हिस्से का पूरा माल अकेले ही गटक गया।
कांग्रेस नेता आरपी सिंह पर कोयला लेवी मामले में 2 करोड़ 1 लाख 40 हज़ार रुपये लेने का आरोप है। उन्होंने ईडी की पूछताछ में यह बात स्वीकार की। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल पार्टी के लिए गाडिय़ों और मीडिया का प्रबंध करने में किया।
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक कोल स्कैम के मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी से सौम्या चौरसिया ने 169 बार में 31 करोड़ लिए, निलंबित ढ्ढ्रस् रानू साहू ने 13 बार में 5.52 करोड़ रुपए लिए। वहीं विधायक देवेंद्र यादव को 11 बार में 3 करोड़ रुपए मिले। देवेंद्र यादव ने पैसों को खैरागढ़ उप चुनाव औरयूपी चुनाव में खर्च किए। इसके साथ ही कांग्रेस के पूर्व विधायक चंद्रदेव राय सूर्यकांत से 2 बार में लिए 46 लाख रुपए लिए, 42 लाख को यूपी चुनाव में खर्च किए, जबकि 4 लाख रुपए में रायपुर एक ज्वेलरी शॉप से पत्नी के लिए 60 ग्राम सोने की हार की खरीदारी की। कोल वाशरी और ट्रांसपोर्टर्स से वसूलकर सूर्यकांत तिवारी अपने कर्मचारियों के माध्यम से अफसरों और नेताओं तक पैसों को पहुंचवाया। निखिल चंद्राकर पैसे भेजने में मेन रोल में रहा। अधिकतर लोगों तक इसी ने पैसे पहुंचाए हैं।
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक कोल स्कैम का मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी कोयला ट्रांसपोर्टिंग का करने वालों से वसूली का काम करता था। कोल वाशरी संचालकों से 100 रुपए प्रति टन और वाशरी से कोयला निकलने पर 25 रुपए प्रति टन अतिरिक्त ट्रांसपोर्टिंग शुल्क लिया जाता था। कोयले का बिजनेस करने वालों को सूर्यकांत तिवारी को 2 बार कमीशन देना पड़ता था। कोरबा और रायगढ़ में वसूली के लिए अलग से ऑफिस खोले गए थे। वसूली के पैसों को सूर्यकांत तिवारी ही संभालता था, फिर नेताओं और अफसरों को डील के मुताबिक रकम उपलब्ध कराता था।
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक सौम्या चौरसिया को 31 करोड़, निलंबितआईएएस रानू साहू को 5.52 करोड़ रुपए और देवेंद्र यादव को 3 करोड़ रुपए मिले। कुमार विश्वास के कार्यक्रम के नाम पर भी सूर्यकांत से पैसे लिए। वहीं सूर्यकांत तिवारी से चंद्रदेव राय को 46 लाख रुपए मिले। वहीं कांग्रेस नेता और प्रवक्ता आरपी तिवारी ने पैसे को गाडिय़ां, प्रापर्टी और मीडिया मैनेजमेंट में खर्च किया। इसके साथ ही कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने कोल लेवी के पैसों से संपत्ति खरीदी। साथ ही खैरागढ़ चुनाव में कोल लेवी से मिली रकम का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही सौम्या चौरसिया ने मां के करीब 22 प्रॉपर्टी खरीदी। रानू साहू ने घोटाले की रकम से 13 प्रॉपर्टी खरीदी है। रानू ने ये संपत्ति अपने भाई सहित अन्य रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी है। ईडी ने जांच के बाद सबूतों को कोर्ट में पेश किया है।
ईडी के मुताबिक कोल लेवी स्कैम में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव भी थे, जो डायरेक्ट सूर्यकांत तिवारी के टच में थे। एमएलए देवेंद्र यादव और सूर्यकांत के बीच वॉट्सऐप चैट में बातचीत होती थी। बातचीत में देवेंद्र और सूर्यकांत के बीच खैरागढ़ चुनाव, रायपुर आने, समय पर पहुंचने और इंतजार करने जैसी चैटिंग है।
इसके बाद बाद देवेंद्र यादव सूर्यकांत से कहते हैं ओके भैया, फिर सूर्यकांत का जवाब आता है कि आपको रोशन कॉल कर रहा है, फिर देवेंद्र यादव सूर्यकांत से कहते हैं ओके भैया। इसके बाद देवेंद्र अनुपम नगर पहुंचकर कहते हैं कि भैया मैं पहुंच गया हूं। कितना समय लगेगा।
इसके बाद सूर्यकांत तिवारी का जवाब नहीं आता, कुछ देर बाद आता है। सूर्यकांत तिवारी ने लिखा डोन । इसके बाद फिर देवेंद्र यादव मैसेज करते हैं कि भैया कितना समय लगेगा, आपको पहुंचने में। मुझे खैरागढ़ पहुंचना है, आपको और कितना समय लगेगा।ईडी ने चार्जशीट में वॉट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट लगाए हैं। ईडी की जांच में सामने आया है, कि कांग्रेस के पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय ने सूर्यकांत तिवारी से 46 लाख रुपए लिया है। इस पैसों को उसने क्क चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया। पैसों को चुनाव में इस्तेमाल करने के अलावा कांग्रेस नेता राय ने अपनी पत्नी को सोने का हार भी दिलाया। ईडी के मुताबिक वॉट्सऐप चैट में चंद्रदेव राय सूर्यकांत तिवारी से कह रहे हैं कि भैया जी किस ज्वेलरी शॉप में जाऊं, तो उधर से एक ज्वेलरी शॉप का नाम लिखकर आता है।





