छत्तीसगढ़

रोटी मेकर बन गया छत्तीसगढ़ में भ्रष्ट अधिकारियों की भूख मिटाने की मशीन

Nilmani Pal
2 April 2026 11:18 AM IST
रोटी मेकर बन गया छत्तीसगढ़ में भ्रष्ट अधिकारियों की भूख मिटाने की मशीन
x

रोटी मेकर खरीदी में बंदरबाट, दोषी पर कार्रवाई के बजाय मिला प्रमोशन दर प्रमोशन

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक लापरवाही है या जानबूझकर किया गया अपराध, उठ रही उच्च स्तरीय जाँच की मांग

आदिवासी विकास विभाग में करोड़ों का घोटौला, जांच रिपोर्ट आने के तीन माह बाद भी दागी देवांगन को बचाने में जुटे प्रमुख अधिकारी एवं सचिव स्तर के अधिकारी

फर्जी दलाल किस्म के भ्रष्ट अधिकारियों का गढ़ बन रहा है छत्तीसगढ़, लूटकर अपने प्रदेश भेज रहे सारा खजाना

आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष देव सोनी ने खोली भ्रष्टाचार की परतें, सीएम-मुख्यसचिव और प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा से की शिकायत

आदिवासी राज्य में आदिवासी मु यमंत्री होने के बावजूद बड़े भ्रष्ट अधिकारी बेखौफ सरकार को बदनाम और गुमराह कर रहे

रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ के आदिवासी विकास विभाग में भ्रष्टाचार की जो नई इबारत लिखी गई है, उसने प्रशासनिक शूचिता के दावों की हवा निकाल दी है। 192.33 लाख रुपये के बहुचर्चित रोटी मेकर घोटाले में जाँच रिपोर्ट आने के बाद भी कार्रवाई का न होना, शासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष देव सोनी ने दस्तावेजों के साथ यह खुलासा किया है कि किस तरह विभाग के शीर्ष अधिकारी अपने खास मातहतों को बचाने के लिए रक्षक की भूमिका में आ गए हैं।

3 महीने से ठंडे बस्ते में जाँच रिपोर्ट - आखिर किसकी शह पर? : आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष देव सोनी द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभागीय मंत्री के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय टीम ने दिसंबर 2025 में ही अपनी जाँच पूरी कर ली थी। इस रिपोर्ट में करोड़ों के गबन और नियमों के उल्लंघन की स्पष्ट पुष्टि हुई है। रिपोर्ट प्रमुख सचिव के पास विचाराधीन है, लेकिन तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी फाइल एक इंच आगे नहीं बढ़ी है। चर्चा है कि भ्रष्ट अधिकारियों ने अपने कमाऊ पुत्र कहे जाने वाले तारकेश्वर देवांगन को हर हाल में सुरक्षित सेवानिवृत्ति दिलाने की जुगत में लगे हैं, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद जाँच का शिकंजा ढीला पड़ जाए।

दागी तारकेश्वर देवांगन- अपराध और ईनाम का अजीब संगम : भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तत्कालीन सहायक आयुक्त तारकेश्वर देवांगन का इतिहास भी दागदार रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष देव सोनी ने उजागर किया है कि देवांगन के विरुद्ध लोक आयोग में पहले से ही भ्रष्टाचार के मामले लंबित हैं। इसके बावजूद, विभाग ने उन्हें दंडित करने के बजाय अपर संचालक के पद पर पदोन्नत कर दिया। विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में लंबित मामलों की जानकारी छिपाकर उन्हें यह उपहार दिया गया। यह प्रशासनिक लापरवाही है या जानबूझकर किया गया अपराध, इसकी उच्च स्तरीय जाँच की मांग उठ रही है।

बाजार दर से 5 गुना अधिक पर खरीदी- ऐसे चला खेल : घोटाले की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली रही है। जिस रोटी मेकिंग मशीन की अधिकतम बाजार कीमत 1.5 लाख से 3.85 लाख रुपये के बीच है, उसे विभाग ने 7.95 लाख रुपये में खरीदा।

* पोर्टल की अनदेखी: सामग्री क्रय करने के लिए अनिवार्य सरकारी पोर्टल का उपयोग नहीं किया गया।

* विकासखंडों में विभाजन: बड़ी राशि की निविदा और प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए ऑर्डर्स को जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया।

* अवैध आहरण: सबसे गंभीर पहलू यह है कि इसके लिए जिला कलेक्टर की अनुमति तक नहीं ली गई और सीधे सरकारी खजाने (ट्रेजरी) से राशि का आहरण कर निजी संस्थाओं को भुगतान कर दिया गया।

सीएम और मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायत : जाँच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई न होता देख, अब आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष देव सोनी ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मुख्य सचिव विकासशील और प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा से की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी कुछ दिनों में दागी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और गबन की गई राशि की वसूली शुरू नहीं होती, तो वे न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे।

आदिवासी विकास विभाग में तारकेश्वर का तांडव, डिजिटल सेंधमारी कर डकार गए करोड़ों का लोकधन, जांच रिपोर्ट में गबन प्रमाणित होने के बावजूद बड़े साहब सरपरस्ती में जांच को दबाए रखा

आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष देव सोनी

यह केवल एक विभागीय चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है। जब जाँच रिपोर्ट में गबन प्रमाणित हो चुका है, तो दोषियों को पदोन्नति देना और फाइल को दबाए रखना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देना है।

Next Story